*🎍﷽ 🎍*
*💐गुलदस्ता ए मग़फिरत 💐*
*⚄ पार्ट↝01 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ - शिर्क व कुफ्र और बुग़्ज व हसद से बचिये, आपके गुनाह माफ :-*
*❉ _ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हू से मरवी है कि रसूल्लुलाह सल्ललाहू अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया-*
*“_हर पीर और जुमेरात को आमाल पेश किये जाते हैं फिर हर उस मोमिन की मग़फिरत कर दी जाती है जो अल्लाह के साथ किसी को शरीक ना करता हो, मगर वो शख्स कि उसके दरमियान और उसके भाई के दरमियान बुग़्ज, दुश्मनी और कीना हो,*
*❉ _ हक़ तआ़ला शान्हू फरिशतों से इरशाद फरमाते हैं इन दोनों को छोड़े रखो यहां तक कि ये आपस मे सुलह कर लें, (यानी इनकी मग़फिरत को सुलह पर मोकू़फ रखो)*
*📘 रवाह मुस्लिम,*
*💐गुलदस्ता ए मग़फिरत 💐*
*⚄ पार्ट↝01 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ - शिर्क व कुफ्र और बुग़्ज व हसद से बचिये, आपके गुनाह माफ :-*
*❉ _ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हू से मरवी है कि रसूल्लुलाह सल्ललाहू अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया-*
*“_हर पीर और जुमेरात को आमाल पेश किये जाते हैं फिर हर उस मोमिन की मग़फिरत कर दी जाती है जो अल्लाह के साथ किसी को शरीक ना करता हो, मगर वो शख्स कि उसके दरमियान और उसके भाई के दरमियान बुग़्ज, दुश्मनी और कीना हो,*
*❉ _ हक़ तआ़ला शान्हू फरिशतों से इरशाद फरमाते हैं इन दोनों को छोड़े रखो यहां तक कि ये आपस मे सुलह कर लें, (यानी इनकी मग़फिरत को सुलह पर मोकू़फ रखो)*
*📘 रवाह मुस्लिम,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝02 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ - शाबान की 15 वीं रात मे शिर्क करने वाले और बुग़्ज व अदावत रखने वाले के सिवा सबके गुनाह माफ:-*
*❉ _ हज़रत मुआज़ बिन जबल रज़ियल्लाहू अन्हू से मरवी है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*“_ हक़ तआला शान्हू शाबान की 15 वी रात को अपनी मख़लूक की तरफ तवज्जो फरमाते हैं और अपनी तमाम मख़लूक की मग़फिरत फरमा देते हैं सिवाय मुशरिक के और बुग़्ज व अदावत रखने वाले के _,“*
*📘कंज़ुल उम्माल 3/467,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝03 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जो शिर्क, जादू और कीना से बचा उसके गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"तीन ख़सलतें ऐसी हैं जिनमें से कोई एक भी किसी में ना हो तो अल्लाह तआला उनके अलावा की मग़फिरत फरमा देते हैं जिसके लिए चाहें:-*
*❉⇨1-जो इस हाल में मरे कि अल्लाह तआला के साथ किसी को शरीक ना ठहराता हो,*
*2- जादूगर ना हो कि जादूगरों के पीछे फिरता रहे,*
*3- और अपने भाई से कीना ना रखता हो_,*
*📘 (अखरजा तिबरानी, तरगी़ब-3/461, कंज़ुल उम्माल-15/840),*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝04 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ - आलिम बा-अमल बनिये गुनाह माफ _,*
*❉ _ क़यामत के दिन अल्लाह तआला फरमायेंगे,-*
*“ऐ उलमा की जमाअत ! मैने तुम्हारे सीनों मे सिर्फ इसलिये इल्म रखा था कि तुम्हारे ज़रिये से अपनी पहचान कराऊं,*
*❉ _ उठो बेशक मैं तुमको माफ कर चुका हूं,”*
*📘 कंज़ुल उम्माल- 10/173,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝05 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ जो इल्मे दीन की तलब में लग गया उसके गुनाह माफ _,*
*❉_ हज़रत सख़ीरह रज़ियल्लाहू अन्हू से मरवी है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया,-*
*“_ जो इल्म की तलब मे लग गया उसके गुजिस्ता गुनाहों की मग़फिरत हो जायेगी,“*
*📘 तिरमिज़ी, 2/9,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝06 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ जो तलब-ए-इल्म के लिये निकला उसके गुनाह माफ _,*
*❉_ हज़रत अली रज़ियल्लाहू अन्हू से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*”_जिस बंदे ने जूता पहना या चर्मी मोज़ा पहना या कोई लिबास पहना इल्म की तलब मे तो अल्लाह तआला उसके गुनाहों की मग़फिरत फरमा देते हैं हत्ताकि वो अपने घर की दहलीज़ पर पहुंचे,”*
*📘 अखरजा तिबरानी, तरगीब 1/105,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ ℘AЯT↝07 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ तालिब ए इल्म के ऐहतराम मे फरिश्ते परवाज़ रोक कर खड़े हो जाते हैं और आलिम ए दीन के लिये तमाम मख़लूक मग़फिरत की दुआ करती है _,*
*❉ _ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हू कहते हैं कि मैने रसूलुल्लाह ﷺ को इरशाद फरमाते हुए सुना-*
*”_ जो शख्स इल्म हासिल करने के लिये किसी रास्ते पर चले तो उसकी वजह से अल्लाह तआला उसके लिये जन्नत का रास्ता आसान फरमा देंगे और उसके अमल से खुश होकर फरिश्ते तालिब ए इल्म के लिये अपने परों को रख देते हैं (यानि परवाज़ रोक कर खड़े हो जाते हैं) और आलिम के लिये आसमानों की तमाम मख़लूक और ज़मीन की तमाम मख़लूक दुआ ए मग़फिरत करती हैं हत्ता कि मछलियां पानी मे,*
*❉ _और आलिम की फज़ीलत आबिद पर ऐसी है जैसी चांद की फज़ीलत बाक़ी सितारों पर, और तहक़ीक़ उल्मा अंबिया के वारिस हैं और अंबिया अलैहिस्सलाम दीनार और दिरहम का किसी को वारिस नहीं बनाते, वो तो इल्म का वारिस बनाते हैं, लिहाज़ा जिसने इल्म हासिल किया उसने बहुत बड़ी खैर हासिल कर ली,”*
*📘 तिरमिज़ी- ,2/93,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝08 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ दिन के शुरू और आखिरी हिस्से मे नेक काम किजीये, दरमियान के गुनाह माफ_,*
*❉ _ जिस शख्स ने दिन का आगाज़ भले काम से किया और दिन की इंतेहा भले काम से की उसके बारे मे अल्लाह तआला फरिश्तों से फरमाते हैं, इसके दरमियानी हिस्से के गुनाहों को मत लिखो,”*
*📘 कंज़ुल उम्माल- 15/781,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝09 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ जिसने आइंदा अच्छे काम किये उसके पिछले गुनाह माफ _,*
*❉ _ हज़रत रसूल ए पाक सल्ललाहु अलैहि वसल्लम का इरशाद है,-*
*”_ जिसने बाक़ी आइंदा ज़िन्दगी मे अच्छे आमाल किये तो माज़ी (पिछले) के गुनाहों की बखसिश कर दी जायेगी और जिसने बाक़ी आइंदा ज़िन्दगी को बुरे आमाल और गफलत मे गुजार दिया तो गुजिस्ता अय्याम और बाक़ी अय्याम दोनो का मुवाख्ज़ा (पूछ) होगा,_”*
*📘 अखरजा तिबरानी, कंज़ुल उम्माल- 2/244,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝10 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ नेक काम करो और बड़े गुनाहों से बचो, छोटे गुनाह माफ,*
*❉ _ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हू से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*”_कसम है उस ज़ात की जिसके कब्ज़े मे मेरी जान है, नहीं है कोई बंदा जो पांचो नमाज़े पढ़ता हो, रमजानुल मुबारक के रोज़े रखता हो, ज़कात अदा करता हो साथ कबाइर (बड़े गुनाह) से बचता हो मगर उसके लिये जन्नत के आठों दरवाजे क़यामत के दिन खोल दिये जायेंगे,*
*❉ _फिर रसूलुल्लाह ﷺ ने ये आयत तिलावत फरमायी,(तरजुमा सूरह निसा-31)- जिन कामों से तुमको मना किया जा रहा है अगर तुम उनमें से जो बड़े-बड़े गुनाह हैं बचते रहोगे तो हम तुम्हारे छोटे छोटे गुनाह तुमसे ज़ाइल कर देंगे,”*
*📘 अखरजा इब्ने माजा व इब्ने खुज़ेमा व इब्ने हिबान व हाकिम व सही कंज़ुल उम्माल- 15/862,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝11 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जिसने अपने बेटे को देख कर कुरआन पढ़ना सिखाया, उसके गुनाह माफ़_,*
*❉ _ हज़रत अनस रज़ियल्लाहू अन्हु से मरवी है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*”_ जिसने अपने बेटे को नाज़रा कुरआन पढ़ाया उसके अगले पिछले गुनाहों की मग़फिरत कर दी जायेगी ,”*
*📘 तबरानी,3/557, मजमुआ अज़्जावाइद, 7/168 ,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝12 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _अच्छी तरह वज़ू किजीये और नमाज़ पढ़ीये, गुनाह माफ _,*
*❉_ हज़रत उबादा बिन सामित रज़ियल्लाहू अन्हू कहते हैं कि मैने रसूलुल्लाह ﷺ को ये इरशाद फरमाते हुवे सुना,*
*”_ अल्लाह तआला ने 5 वक्त की नमाज़ फर्ज फरमाई है, जो शख्स इन नमाज़ों के लिये अच्छी तरह वज़ू करता है और उन्हें मुस्तहब वक़्त मे अदा करता है, रुकूअ (सज़्दा) इतमिनान के साथ करता है और पूरे खुशूअ से पढ़ता है, तो अल्लाह तआला का वादा है कि उसकी मग़फिरत फरमायेगा,*
*❉_ और जो शख्स इन नमाज़ों को वक़्त पर अदा नहीं करता और ना ही खुशूअ से पढ़ता है तो उससे मग़फिरत का कोई वादा नहीं, चाहे मग़फिरत फरमाये चाहे अज़ाब दे,”*
*📘रवाह अबु दाऊद, 465,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝13 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ नमाज़ के लिए वज़ू कीजिये, गुनाहों को धो डालिये _,*
*❉_ हज़रत अब्दुल्लाह सनाबिही रज़ियल्लाहू अन्हू से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*”_ जब मोमिन बंदा वज़ू करता और इस दरमियान कुल्ली करता है तो उसके मुंह के तमाम गुनाह धुल जाते हैं, जब वो नाक साफ करता है तो नाक के तमाम गुनाह धुल जाते हैं, जब चेहरा धोता है तो चेहरे के गुनाह धुल जाते हैं यहां तक कि पल्कों की जड़ों से निकल जाते हैं,*
*❉_ जब हाथों को धोता है तो हाथों के गुनाह धुल जाते हैं यहां तक कि हाथों के नाखुनों के नीचे से निकल जाते हैं, जब सर का मसाह करता है तो सर के गुनाह धुल जाते हैं यहां तक कि कानों से निकल जाते हैं और जब पांव धोता है तो पांव के गुनाह धुल जाते हैं यहां तक कि पांव के नाखुनों के नीचे से निकल जाते हैं,*
*❉_ फिर उसका मस्जिद की तरफ चल कर जाना और नमाज़ पढ़ना उसके लिये मजी़द ( फजी़लत का ज़रिया) होता है,”*
*📘 रवाह नसाई- 29/1103,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝14 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ नमाज़ पढ़िये, गुनाहों से पाक साफ हो जाइये _,*
*❉_ हज़रत अज्ञरु बिन अबसा सुल्मी रज़ियल्लाहू अन्हू फरमाते हैं कि -*
*”_अगर वजू के बाद खड़े होकर नमाज़ पढता है जिसमे अल्लाह तआला की ऐसी हम्द व सना और बुज़ुर्गी बयान करता है जो उसकी शान के लायक़ है और अपने दिल को तमाम फिक्रों से खाली कर के अल्लाह की तरफ मुतवज्जह रहता है तो ये शख्स नमाज़ से फारिग़ होने के बाद अपने गुनाहों से ऐसा पाक व साफ हो जाता है जैसा कि आज ही उसकी मां ने उसको जना हो,”*
*📘 रवाह मुस्लिम,1/276,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝15 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ अगर किसी से गुनाह सरज़द हो जाये तो अच्छी तरह वजू करके 2 रकात नमाज़ पढ़े और माफी मांगे गुनाह माफ _,*
*❉_ हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहू अन्हू फरमाते हैं के मैने रसूलुल्लाह ﷺ को ये इरशाद फरमाते हुवे सुना,-*
*”_ जिस शख्स से कोई गुनाह हो जाये फिर वो अच्छी तरह वजू करे और उठ कर 2 रकात नमाज पढ़े फिर अल्लाह तआला से माफी मांगे तो अल्लाह तआला माफ फरमा देते हैं,*
*❉_ इसके बाद आप ﷺ ने ये आयत तिलावत फरमाई, (तर्जुमा सूरह आले इमरान-135) - वो बंदे जिनका हाल ये है कि जब उनसे कोई गुनाह हो जाता है या कोई बुरा काम करके वो अपने ऊपर जुल्म कर बैठते हैं तो जल्दी ही उन्हें अल्लाह तआला याद आ जाते हैं, फिर वो अल्लाह तआला से अपने गुनाहों की माफी के तालिब होते हैं और बात भी ये है कि सिवाय अल्लाह के कोई गुनाहों को माफ नहीं कर सकता है और बुरे काम पर वो अड़ते नहीं और वो यक़ीन रखते हैं कि तौबा से गुवाह माफ हो जाते हैं,”*
*📘अबु दाऊद,1/213,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝16 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_वजु कर के फौरन यह दुआ पढ़िये, दो वजुओं के दरमियान जो गुनाह किये वो माफ_,*
*❉⇨ हज़रत उस्मान बिन अफ्फान रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि मैने नबी करीम ﷺ को य इरशाद फरमाते हुए सुना,-*
*"_ जिस आदमी ने वजू का इरादा किया फिर अपने दोनों हाथ धोए, फिर तीन बार कुल्ली की, तीन बार नाक में पानी डाला और तीन बार अपने चेहरे को धोया और अपने दोनों हाथ कोहनियों सहित तीन मरतबा धोया और अपने सर का मसाह किया, फिर अपने दोनों पांव को धोया फिर बात किए बिना ”अशहदु अल्लाइलाहा इल्लल्लाहु वहदहु ला शरीका लहू व अशहदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहु वा रसूलुहु,"पढ़ें तो उस वज़ू से लेकर आइंदा वज़ू तक गुनाहों की मगफिरत कर दी जाती है"*
*📘 अखरजा अबू याअला व दारुल कुत्नी कजा़ फिल तरगीब-1/72, मुसनद अबू याअला, 1/157,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝17 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ रात को बा-वज़ू सोया करो गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया,-*
*"_अपने जिस्म को पाक रखा करो अल्लाह ताला तुम्हें पाक रखेगा क्योंकि जो बंदा भी बा-वज़ू रात गुज़ारेगा तो उसके साथ उसके अंदरुनी कपड़े में (यानि बनियान वगेरह) एक फ़रिश्ता रात गुज़ारता है _,*
*❉_रात की जिस घड़ी में भी जब बंदा करवट लेता है तो फरिश्ता कहता है, ''ए अल्लाह!'' अपने इस बंदे की मग़फिरत फरमा दे क्यूँकि इसने बा-वज़ू रात गुज़ारी है,_"*
*📘रवाह तिबरानी, कज़ा फिल तरगीब-1 -409, कंज़ुल उम्माल-9/277,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝18 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जिसकी आमीन फरिश्तों की आमीन से मिल गई उसके पिछले सारे गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत अबु हरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*"_जब तुममें से कोई (सूरह फातिहा के आखिर में) आमीन कहता है तो उसी वक़्त फ़रिश्ते आसमान पर आमीन कहते हैं, अगर उस शख़्स की आमीन फ़रिश्ते की आमीन के साथ मिल जाती है तो उसके पिछले तमाम गुनाह माफ़ हो जाते हैं,"*
*📘 बुखारी-1/108, मुस्लिम-1/176,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ दिन के शुरू और आखिरी हिस्से मे नेक काम किजीये, दरमियान के गुनाह माफ_,*
*❉ _ जिस शख्स ने दिन का आगाज़ भले काम से किया और दिन की इंतेहा भले काम से की उसके बारे मे अल्लाह तआला फरिश्तों से फरमाते हैं, इसके दरमियानी हिस्से के गुनाहों को मत लिखो,”*
*📘 कंज़ुल उम्माल- 15/781,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝09 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ जिसने आइंदा अच्छे काम किये उसके पिछले गुनाह माफ _,*
*❉ _ हज़रत रसूल ए पाक सल्ललाहु अलैहि वसल्लम का इरशाद है,-*
*”_ जिसने बाक़ी आइंदा ज़िन्दगी मे अच्छे आमाल किये तो माज़ी (पिछले) के गुनाहों की बखसिश कर दी जायेगी और जिसने बाक़ी आइंदा ज़िन्दगी को बुरे आमाल और गफलत मे गुजार दिया तो गुजिस्ता अय्याम और बाक़ी अय्याम दोनो का मुवाख्ज़ा (पूछ) होगा,_”*
*📘 अखरजा तिबरानी, कंज़ुल उम्माल- 2/244,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝10 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ नेक काम करो और बड़े गुनाहों से बचो, छोटे गुनाह माफ,*
*❉ _ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हू से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*”_कसम है उस ज़ात की जिसके कब्ज़े मे मेरी जान है, नहीं है कोई बंदा जो पांचो नमाज़े पढ़ता हो, रमजानुल मुबारक के रोज़े रखता हो, ज़कात अदा करता हो साथ कबाइर (बड़े गुनाह) से बचता हो मगर उसके लिये जन्नत के आठों दरवाजे क़यामत के दिन खोल दिये जायेंगे,*
*❉ _फिर रसूलुल्लाह ﷺ ने ये आयत तिलावत फरमायी,(तरजुमा सूरह निसा-31)- जिन कामों से तुमको मना किया जा रहा है अगर तुम उनमें से जो बड़े-बड़े गुनाह हैं बचते रहोगे तो हम तुम्हारे छोटे छोटे गुनाह तुमसे ज़ाइल कर देंगे,”*
*📘 अखरजा इब्ने माजा व इब्ने खुज़ेमा व इब्ने हिबान व हाकिम व सही कंज़ुल उम्माल- 15/862,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝11 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जिसने अपने बेटे को देख कर कुरआन पढ़ना सिखाया, उसके गुनाह माफ़_,*
*❉ _ हज़रत अनस रज़ियल्लाहू अन्हु से मरवी है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*”_ जिसने अपने बेटे को नाज़रा कुरआन पढ़ाया उसके अगले पिछले गुनाहों की मग़फिरत कर दी जायेगी ,”*
*📘 तबरानी,3/557, मजमुआ अज़्जावाइद, 7/168 ,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝12 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _अच्छी तरह वज़ू किजीये और नमाज़ पढ़ीये, गुनाह माफ _,*
*❉_ हज़रत उबादा बिन सामित रज़ियल्लाहू अन्हू कहते हैं कि मैने रसूलुल्लाह ﷺ को ये इरशाद फरमाते हुवे सुना,*
*”_ अल्लाह तआला ने 5 वक्त की नमाज़ फर्ज फरमाई है, जो शख्स इन नमाज़ों के लिये अच्छी तरह वज़ू करता है और उन्हें मुस्तहब वक़्त मे अदा करता है, रुकूअ (सज़्दा) इतमिनान के साथ करता है और पूरे खुशूअ से पढ़ता है, तो अल्लाह तआला का वादा है कि उसकी मग़फिरत फरमायेगा,*
*❉_ और जो शख्स इन नमाज़ों को वक़्त पर अदा नहीं करता और ना ही खुशूअ से पढ़ता है तो उससे मग़फिरत का कोई वादा नहीं, चाहे मग़फिरत फरमाये चाहे अज़ाब दे,”*
*📘रवाह अबु दाऊद, 465,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝13 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ नमाज़ के लिए वज़ू कीजिये, गुनाहों को धो डालिये _,*
*❉_ हज़रत अब्दुल्लाह सनाबिही रज़ियल्लाहू अन्हू से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*”_ जब मोमिन बंदा वज़ू करता और इस दरमियान कुल्ली करता है तो उसके मुंह के तमाम गुनाह धुल जाते हैं, जब वो नाक साफ करता है तो नाक के तमाम गुनाह धुल जाते हैं, जब चेहरा धोता है तो चेहरे के गुनाह धुल जाते हैं यहां तक कि पल्कों की जड़ों से निकल जाते हैं,*
*❉_ जब हाथों को धोता है तो हाथों के गुनाह धुल जाते हैं यहां तक कि हाथों के नाखुनों के नीचे से निकल जाते हैं, जब सर का मसाह करता है तो सर के गुनाह धुल जाते हैं यहां तक कि कानों से निकल जाते हैं और जब पांव धोता है तो पांव के गुनाह धुल जाते हैं यहां तक कि पांव के नाखुनों के नीचे से निकल जाते हैं,*
*❉_ फिर उसका मस्जिद की तरफ चल कर जाना और नमाज़ पढ़ना उसके लिये मजी़द ( फजी़लत का ज़रिया) होता है,”*
*📘 रवाह नसाई- 29/1103,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝14 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ नमाज़ पढ़िये, गुनाहों से पाक साफ हो जाइये _,*
*❉_ हज़रत अज्ञरु बिन अबसा सुल्मी रज़ियल्लाहू अन्हू फरमाते हैं कि -*
*”_अगर वजू के बाद खड़े होकर नमाज़ पढता है जिसमे अल्लाह तआला की ऐसी हम्द व सना और बुज़ुर्गी बयान करता है जो उसकी शान के लायक़ है और अपने दिल को तमाम फिक्रों से खाली कर के अल्लाह की तरफ मुतवज्जह रहता है तो ये शख्स नमाज़ से फारिग़ होने के बाद अपने गुनाहों से ऐसा पाक व साफ हो जाता है जैसा कि आज ही उसकी मां ने उसको जना हो,”*
*📘 रवाह मुस्लिम,1/276,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝15 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ अगर किसी से गुनाह सरज़द हो जाये तो अच्छी तरह वजू करके 2 रकात नमाज़ पढ़े और माफी मांगे गुनाह माफ _,*
*❉_ हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहू अन्हू फरमाते हैं के मैने रसूलुल्लाह ﷺ को ये इरशाद फरमाते हुवे सुना,-*
*”_ जिस शख्स से कोई गुनाह हो जाये फिर वो अच्छी तरह वजू करे और उठ कर 2 रकात नमाज पढ़े फिर अल्लाह तआला से माफी मांगे तो अल्लाह तआला माफ फरमा देते हैं,*
*❉_ इसके बाद आप ﷺ ने ये आयत तिलावत फरमाई, (तर्जुमा सूरह आले इमरान-135) - वो बंदे जिनका हाल ये है कि जब उनसे कोई गुनाह हो जाता है या कोई बुरा काम करके वो अपने ऊपर जुल्म कर बैठते हैं तो जल्दी ही उन्हें अल्लाह तआला याद आ जाते हैं, फिर वो अल्लाह तआला से अपने गुनाहों की माफी के तालिब होते हैं और बात भी ये है कि सिवाय अल्लाह के कोई गुनाहों को माफ नहीं कर सकता है और बुरे काम पर वो अड़ते नहीं और वो यक़ीन रखते हैं कि तौबा से गुवाह माफ हो जाते हैं,”*
*📘अबु दाऊद,1/213,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝16 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_वजु कर के फौरन यह दुआ पढ़िये, दो वजुओं के दरमियान जो गुनाह किये वो माफ_,*
*❉⇨ हज़रत उस्मान बिन अफ्फान रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि मैने नबी करीम ﷺ को य इरशाद फरमाते हुए सुना,-*
*"_ जिस आदमी ने वजू का इरादा किया फिर अपने दोनों हाथ धोए, फिर तीन बार कुल्ली की, तीन बार नाक में पानी डाला और तीन बार अपने चेहरे को धोया और अपने दोनों हाथ कोहनियों सहित तीन मरतबा धोया और अपने सर का मसाह किया, फिर अपने दोनों पांव को धोया फिर बात किए बिना ”अशहदु अल्लाइलाहा इल्लल्लाहु वहदहु ला शरीका लहू व अशहदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहु वा रसूलुहु,"पढ़ें तो उस वज़ू से लेकर आइंदा वज़ू तक गुनाहों की मगफिरत कर दी जाती है"*
*📘 अखरजा अबू याअला व दारुल कुत्नी कजा़ फिल तरगीब-1/72, मुसनद अबू याअला, 1/157,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝17 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ रात को बा-वज़ू सोया करो गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया,-*
*"_अपने जिस्म को पाक रखा करो अल्लाह ताला तुम्हें पाक रखेगा क्योंकि जो बंदा भी बा-वज़ू रात गुज़ारेगा तो उसके साथ उसके अंदरुनी कपड़े में (यानि बनियान वगेरह) एक फ़रिश्ता रात गुज़ारता है _,*
*❉_रात की जिस घड़ी में भी जब बंदा करवट लेता है तो फरिश्ता कहता है, ''ए अल्लाह!'' अपने इस बंदे की मग़फिरत फरमा दे क्यूँकि इसने बा-वज़ू रात गुज़ारी है,_"*
*📘रवाह तिबरानी, कज़ा फिल तरगीब-1 -409, कंज़ुल उम्माल-9/277,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝18 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जिसकी आमीन फरिश्तों की आमीन से मिल गई उसके पिछले सारे गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत अबु हरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*"_जब तुममें से कोई (सूरह फातिहा के आखिर में) आमीन कहता है तो उसी वक़्त फ़रिश्ते आसमान पर आमीन कहते हैं, अगर उस शख़्स की आमीन फ़रिश्ते की आमीन के साथ मिल जाती है तो उसके पिछले तमाम गुनाह माफ़ हो जाते हैं,"*
*📘 बुखारी-1/108, मुस्लिम-1/176,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝19 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ जुमा के दिन गुस्ल कीजिए गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत अबू उमामा रज़ियल्लाहु अन्हु नबी करीम ﷺ का इरशाद नक़ल करते हैं कि आप ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*"_ जुमा के दिन गुस्ल करना गुनाहों को बालों की जड़ों से सौंत कर निकाल देता_"*
*📘कंज़ुल उम्माल-7/754,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝20 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जिसकी तमहीद फरिश्तों की तमहीद से मिल गई उसके पिछले सारे गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत अबू हरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत हे कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*"_ जब इमाम (रुकु से उठते हुए) "समिअल्लाहु लिमन हमीदाह" कहे तो तुम "अल्लाहुम्मा रब्बना लकलहम्द" कहो,*
*❉_ जिसका ये कहना फरिश्तों के कहने के साथ मिल जाता है, उसके पिछले सारे गुनाह माफ हो जाते हैं,'*
*📘 मुस्लिम,, 1/176,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝21 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ चाश्त की 2 रक़अत पढ़ने का अहतमाम कीजिये गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत अबू हरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ जो चाश्त की दो रक़अत पढ़ने का एहतमाम करता है उसके गुनाह माफ कर दिए जाते हैं अगरचे वो समंदर की झाग के बराबर हो,"*
*📘 इब्ने माजा, 98,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝22 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_अल्लाह को राज़ी करने के लिए नमाज़ पढ़िए गुनाह माफ_,*
*❉ _हज़रत अबुज़र रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि एक मरतबा नबी करीम ﷺ सर्दी के मौसम में बाहर तशरीफ़ लाए और पत्ते दरख्तों से गिर रहे थे, आपने एक दरख़्त की दो टेहनियां हाथ में ली उनके पत्ते और भी गिरने लगे तो नबी करीम ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*❉ _अबुज़र! मैने अर्ज़ किया लब्बेक या रसूलल्लाह! आपने इरशाद फरमाया- "मुसलमान बंदा जब अल्लाह तआला को राज़ी करने के लिए नमाज़ पढ़ता है तो उससे उसके गुनाह ऐसे ही गिरते हैं जैसे ये पत्ते इस दरख़्त से गिर रहे हैं _,*
*📚 रवाह अहमद- 5/179,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝23 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_तहज्जुद का अहतमाम कीजिए, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अबू उमामा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,*
*"_ तहज्जुद जरूर पढ़ा करो, वो तुमसे पहले के नेक लोगों का तरीक़ा रहा है, इससे तुम्हें अपने रब का क़ुर्ब हासिल होगा, गुनाह माफ़ होंगे और गुनाहों से बचे रहेंगे,"*
*📘 मुस्तदरक हाकिम, 1/308,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝24 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_इशराक़ की नमाज़ पढिये, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत मुआज़ बिन अनस जुहानी रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*"_ जो शख़्स फ़ज़र की नमाज़ से फ़ारिग़ होकर उसी जगह बैठा रहता है, ख़ैर के अलावा कोई बात नहीं करता फिर दो रक़ात इशराक़ की नमाज़ पढ़ता है उसके गुनाह माफ़ हो जाते हैं चाहे वो समंदर के झाग से ज़्यादा ही हों,_"*
*📚_अबू दाऊद, 1/182,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝25 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जुमा के दिन यह काम कीजिए, गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत अबू अय्यूब अंसारी रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि मैने नबी करीम ﷺ को इरशाद फरमाते हुए सुना-*
*"_ जिसने जुमा के दिन गुस्ल किया और जो अच्छे कपड़े उसे मयस्सर थे वो पहने और ख़ुशबू लगाई अगर उसके पास हो फिर वो नमाज़े जुमा के लिए हाज़िर हुआ और इसकी अहतयात की कि पहले से बैठे हुए लोगों की गर्दनों के ऊपर से फलांगता हुआ नहीं गया फिर (सुन्नतों और निफ्लों) की अल्लाह ने तोफीक दी वो पढ़ी,*
*❉_फिर जब इमाम खुतबा देने के लिए आया तो अदब और खामोशी से उसकी तरफ मुतवज्जह हो कर खुतबा सुना, यहां तक कि नमाज़ पढ़ कर फारिग हुआ तो उस बंदे की ये नमाज इस जुमा और इससे पहले वाले जुमा के दरमियान गुनाहों और खताओं के लिए कफ्फारा हो जाएगी_,"*
*📘मुसनद अहमद- 5/420,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝26 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_रमज़ान में तरावीह का अहतमाम कीजिए, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अबू हरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*"_ जो रमज़ान की रात में अल्लाह तआला के वादों पर यक़ीन करते हुए और उसके अज्र व इनाम के शोक में नमाज़ पढ़ता हैं उसके पिछले सब गुनाह माफ़ हो जाते हैं,*
*📚_ बुखारी,, 1/10,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝27 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ पैदल चल कर आइए और जमात से नमाज़ पढ़िये, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत उस्मान बिन अफ्फान रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि मैने रसूलुल्लाह ﷺ से इरशाद फरमाते हुए सुना,-*
*"_ जो शख़्स कामिल वज़ू करता है फिर फ़र्ज़ नमाज़ के लिए चल कर जाता है और लोगों के साथ या जमात के साथ या मस्जिद में नमाज़ अदा करता है तो अल्लाह तआला उसके गुनाह माफ़ फरमा देते हैं,"*
*📘 मुस्लिम-1/ 122,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝28 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ गुनाहों को मिटाने वाले चंद आमाल_,*
*❉⇨ हज़रत अबू हरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ क्या मै तुम्हें एसे अमल ना बतलाऊं जिनकी वजह से अल्लाह तआला गुनाहों को मिटाते हैं और दर्जे बुलंद फरमाते हैं? सहाबा रज़ियल्लाहु अन्हुम ने अर्ज़ किया- या रसूलल्लाह! जरूर बतलाइये,*
*❉_ इरशाद फरमाया- नागावरी व मशक्कत के बावजूद कामिल वजू करना, मसाजिद की तरफ कसरत से क़दम उठाना और एक नमाज़ के बाद दूसरी नमाज़ के इंतज़ार में रहना, यही हक़ीक़ी रूबात (दुश्मनाने दीन की निगरानी करना) है"*
*📘 मुस्लिम- 1/127,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝29 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ बुलंद आवाज़ से अज़ान दीजिये, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत बरआ बिन आज़िब रज़ियल्लाहु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*"_ बिला शुबहा अल्लाह तआला पहली सफ़ वालों पर रहमत भेजते हैं, फ़रिश्ते उनके लिए दुआ ए रहमत करते हैं और मोअज़्ज़िन के गुनाह माफ़ किये जाते हैं जहां तक उसकी आवाज़ पहुंचती है जो जानदार व बेजान उसकी आवाज़ को सुनते हैं उसकी तस्दीक़ करते हैं और मोअज़्ज़िन को उन तमाम नमाज़ियों के बराबर अजर् मिलता है जिन्होंने उसके साथ नमाज पढ़ी,"*
*📘नसाई-1/106,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ जुमा के दिन गुस्ल कीजिए गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत अबू उमामा रज़ियल्लाहु अन्हु नबी करीम ﷺ का इरशाद नक़ल करते हैं कि आप ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*"_ जुमा के दिन गुस्ल करना गुनाहों को बालों की जड़ों से सौंत कर निकाल देता_"*
*📘कंज़ुल उम्माल-7/754,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝20 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जिसकी तमहीद फरिश्तों की तमहीद से मिल गई उसके पिछले सारे गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत अबू हरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत हे कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*"_ जब इमाम (रुकु से उठते हुए) "समिअल्लाहु लिमन हमीदाह" कहे तो तुम "अल्लाहुम्मा रब्बना लकलहम्द" कहो,*
*❉_ जिसका ये कहना फरिश्तों के कहने के साथ मिल जाता है, उसके पिछले सारे गुनाह माफ हो जाते हैं,'*
*📘 मुस्लिम,, 1/176,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝21 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ चाश्त की 2 रक़अत पढ़ने का अहतमाम कीजिये गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत अबू हरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ जो चाश्त की दो रक़अत पढ़ने का एहतमाम करता है उसके गुनाह माफ कर दिए जाते हैं अगरचे वो समंदर की झाग के बराबर हो,"*
*📘 इब्ने माजा, 98,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝22 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_अल्लाह को राज़ी करने के लिए नमाज़ पढ़िए गुनाह माफ_,*
*❉ _हज़रत अबुज़र रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि एक मरतबा नबी करीम ﷺ सर्दी के मौसम में बाहर तशरीफ़ लाए और पत्ते दरख्तों से गिर रहे थे, आपने एक दरख़्त की दो टेहनियां हाथ में ली उनके पत्ते और भी गिरने लगे तो नबी करीम ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*❉ _अबुज़र! मैने अर्ज़ किया लब्बेक या रसूलल्लाह! आपने इरशाद फरमाया- "मुसलमान बंदा जब अल्लाह तआला को राज़ी करने के लिए नमाज़ पढ़ता है तो उससे उसके गुनाह ऐसे ही गिरते हैं जैसे ये पत्ते इस दरख़्त से गिर रहे हैं _,*
*📚 रवाह अहमद- 5/179,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝23 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_तहज्जुद का अहतमाम कीजिए, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अबू उमामा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,*
*"_ तहज्जुद जरूर पढ़ा करो, वो तुमसे पहले के नेक लोगों का तरीक़ा रहा है, इससे तुम्हें अपने रब का क़ुर्ब हासिल होगा, गुनाह माफ़ होंगे और गुनाहों से बचे रहेंगे,"*
*📘 मुस्तदरक हाकिम, 1/308,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝24 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_इशराक़ की नमाज़ पढिये, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत मुआज़ बिन अनस जुहानी रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*"_ जो शख़्स फ़ज़र की नमाज़ से फ़ारिग़ होकर उसी जगह बैठा रहता है, ख़ैर के अलावा कोई बात नहीं करता फिर दो रक़ात इशराक़ की नमाज़ पढ़ता है उसके गुनाह माफ़ हो जाते हैं चाहे वो समंदर के झाग से ज़्यादा ही हों,_"*
*📚_अबू दाऊद, 1/182,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝25 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जुमा के दिन यह काम कीजिए, गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत अबू अय्यूब अंसारी रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि मैने नबी करीम ﷺ को इरशाद फरमाते हुए सुना-*
*"_ जिसने जुमा के दिन गुस्ल किया और जो अच्छे कपड़े उसे मयस्सर थे वो पहने और ख़ुशबू लगाई अगर उसके पास हो फिर वो नमाज़े जुमा के लिए हाज़िर हुआ और इसकी अहतयात की कि पहले से बैठे हुए लोगों की गर्दनों के ऊपर से फलांगता हुआ नहीं गया फिर (सुन्नतों और निफ्लों) की अल्लाह ने तोफीक दी वो पढ़ी,*
*❉_फिर जब इमाम खुतबा देने के लिए आया तो अदब और खामोशी से उसकी तरफ मुतवज्जह हो कर खुतबा सुना, यहां तक कि नमाज़ पढ़ कर फारिग हुआ तो उस बंदे की ये नमाज इस जुमा और इससे पहले वाले जुमा के दरमियान गुनाहों और खताओं के लिए कफ्फारा हो जाएगी_,"*
*📘मुसनद अहमद- 5/420,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝26 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_रमज़ान में तरावीह का अहतमाम कीजिए, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अबू हरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*"_ जो रमज़ान की रात में अल्लाह तआला के वादों पर यक़ीन करते हुए और उसके अज्र व इनाम के शोक में नमाज़ पढ़ता हैं उसके पिछले सब गुनाह माफ़ हो जाते हैं,*
*📚_ बुखारी,, 1/10,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝27 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ पैदल चल कर आइए और जमात से नमाज़ पढ़िये, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत उस्मान बिन अफ्फान रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि मैने रसूलुल्लाह ﷺ से इरशाद फरमाते हुए सुना,-*
*"_ जो शख़्स कामिल वज़ू करता है फिर फ़र्ज़ नमाज़ के लिए चल कर जाता है और लोगों के साथ या जमात के साथ या मस्जिद में नमाज़ अदा करता है तो अल्लाह तआला उसके गुनाह माफ़ फरमा देते हैं,"*
*📘 मुस्लिम-1/ 122,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝28 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ गुनाहों को मिटाने वाले चंद आमाल_,*
*❉⇨ हज़रत अबू हरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ क्या मै तुम्हें एसे अमल ना बतलाऊं जिनकी वजह से अल्लाह तआला गुनाहों को मिटाते हैं और दर्जे बुलंद फरमाते हैं? सहाबा रज़ियल्लाहु अन्हुम ने अर्ज़ किया- या रसूलल्लाह! जरूर बतलाइये,*
*❉_ इरशाद फरमाया- नागावरी व मशक्कत के बावजूद कामिल वजू करना, मसाजिद की तरफ कसरत से क़दम उठाना और एक नमाज़ के बाद दूसरी नमाज़ के इंतज़ार में रहना, यही हक़ीक़ी रूबात (दुश्मनाने दीन की निगरानी करना) है"*
*📘 मुस्लिम- 1/127,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝29 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ बुलंद आवाज़ से अज़ान दीजिये, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत बरआ बिन आज़िब रज़ियल्लाहु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*"_ बिला शुबहा अल्लाह तआला पहली सफ़ वालों पर रहमत भेजते हैं, फ़रिश्ते उनके लिए दुआ ए रहमत करते हैं और मोअज़्ज़िन के गुनाह माफ़ किये जाते हैं जहां तक उसकी आवाज़ पहुंचती है जो जानदार व बेजान उसकी आवाज़ को सुनते हैं उसकी तस्दीक़ करते हैं और मोअज़्ज़िन को उन तमाम नमाज़ियों के बराबर अजर् मिलता है जिन्होंने उसके साथ नमाज पढ़ी,"*
*📘नसाई-1/106,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝30 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ पाँँचो नमाज़ों का अहतमाम कीजिए, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया,-*
*”_ पाँँचो नमाज़, जुमा की नमाज़ पिछले जुमा तक और रमज़ान के रोज़े पिछले रमज़ान तक के गुनाहों के लिए कफ़्फ़ारा है जबकि इन आमाल को करने वाला कबीरा गुनाहों से बचे_”*
*📘 मुस्लिम,, 1/122,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝31 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जनाबत के बाद गुस्ल कीजिए, गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अबू अय्यूब अंसारी रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया,-*
*”_ पाँचों नमाज़ें और एक जुमा से लेकर दूसरे जुमा तक और अमानत का अदा करना ये अपने दरमियानी गुनाहों का कफ़्फ़ारा है _,*
*❉_ अर्ज़ किया गया- “या रसूलल्लाह! अमानत का अदा करना क्या है? आप ﷺ ने इरशाद फरमाया,- ”जनाबत के बाद गुस्ल करना क्योंकी हर बाल के नीचे जनाबत यानि नजासत होती है,”*
*📘 इब्ने माजा,, 44,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝32 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ जुमा के दिन यह आमाल कीजिए गुनाह माफ़ _,*
*❉ _ हज़रत सलमान रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*"_ जो आदमी जुमा के दिन गुस्ल करे और जहाँ तक हो सके सफ़ाई पाकीज़गी का अहतमाम करे और जो तेल खुशबू उसके घर में हो वो लगाए फिर वो घर से नमाज़ के लिए जाए और मस्जिद में पहुँँचकर इसकी अहतयात करे कि जो दो आदमी पहले से साथ बैठे हों उनके बीच में न बैठे फिर जो नमाज़ यानि सुनन नवाफ़िल की जितनी रक़ात उसके लिए मुकद्दर हों पढ़े,*
*❉ _ फिर जब इमाम खुत्बा दे तो तवज्जो और खामोशी के साथ उसको सुने तो अल्लाह तआला की तरफ से उस जुमा और दूसरे जुमा के दरमियान की उसकी सारी खताएं ज़रूर माफ़ कर दी जाएंगी _,*
*❉ _ और नसाई की एक रिवायत में अल्फ़ाज़ ए हदीस यूं हैं:-*
*"_ जो भी आदमी जुमा के दिन गुस्ल करे जैसा कि अल्लाह तआला ने उसको हुक्म दिया है फिर वो अपने घर से निकले हत्ताकी नमाज़े जुमा के लिए वो हाज़िर हो जाए, फिर तवज्जो और ख़ामोशी के साथ खुत्बा को सुने हत्ताकी वो अपनी नमाज़ पूरी कर ले तो उसकी ये नमाज़ गुज़िश्ता जुमा के गुनाहों का कफ़्फ़ारा बन जाएगी _,*
*❉ _ और तिबरानी की रिवायत के आख़िर में यूं है कि उस बंदे की नमाज़ उस जुमा और दूसरे जुमा के दरमियान की सारी खताओं का कफ़्फ़ारा बन जाएगी जब तक कि कबाइर से बचा रहे और ये बरकत उसको हमेशा हमेशा हासिल होती रहेगी _,*
*📚 रवाह अल-बुखारी व नसाई व तरगीब-1/487,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝33 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ सफ़ में खाली जगह हो तो पुर कीजिए, गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अबू हुजैफ़ा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि नबी करीम ﷺ ने इरशाद फ़रमाया,-*
*”_जिस शख़्स ने सफ़ में ख़ाली जगह को पुर किया उसकी मग़फ़िरत कर दी जाती है”*
*📘 बिज़्ज़ार मजमूअज़ ज़वाइद, 2/ 251,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ ℘AЯT↝34 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ Jangal me Rehne Wala Jab Azaan kehta hai aur Namaz Padhta hai, To Uske Gunaah Ma'af _,*
*❉⇨ Hazrat Uqba bin Aamir Raziyallahu Anhu Se Marvi hai k Rasulullah ﷺ ne irshad farmaya,-*
*”_ Jab Koi Bakriya’n Charane Wala Kisi Pahaad ki Jad me ( ya Jangal me ) Azaan kehta hai Aur Namaz Padhne Lagta hai To Haq Ta’ala Shanh Usse behad khush hota hai aur Ta’ajjub v Tafakhur Se Farishto se farmata hai Dekho Mera Banda Azaan keh kar Namaz Padhne Laga Ye Sab Mere Dar ki Vajah Se kar raha hai Maine iski Magfirat kar di aur Jannat ka Dakhila tay kar diya_,*
*📚 Kanzul Ummal- 7/294, Abu Da'uwd -1/170,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝35 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ नमाज़ के लिए पैदल आएं और जाएं, हर क़दम पर एक गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया,-*
*”_ जो आदमी उस मस्जिद की तरफ़ चले जहाँ बा-जमाअत नमाज़ होती हो तो हर एक क़दम उसकी एक खता मिटा देगा और दूसरे क़दम पर एक नेकी लिखी जाएगी, आते हुए भी और जाते हुए भी,”*
*📘 तिबरानी, 1/ 207,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝36 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ अज़ान सुन कर ये दुआ पढ़ें, आपके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत साअद बिन अबी वका़स रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया,-*
*”_ जो शख़्स मोअज़्ज़िन की अज़ान सुनने के वक़्त (यानि जब वो अज़ान पढ़ कर फ़ारिग हो जाए) ये दुआ पढ़ें-*
*”_ अश'हदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु वह्दहु ला शरीका लहू व अन्ना मुहम्मदन अब्दुहु व रसूलुहु, रज़ितु बिल्लाहि रब्बंव व बिल इस्लामी दीनंव व बी मुहम्मदी सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम रसूला”*
*तो उसके गुनाह बख्श दिए जाएंगे_,*
*📘 रवाह मुस्लिम व तिर्मिज़ी व नसाई व तरगीब-1/185,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝37 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जिसने सजदे मे 3 मर्तबा "रब्बिगफिरली" कहा उसके गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अबू सईद रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*”_जिस आदमी ने सजदे की हलात में 3 मर्तबा “रब्बिगफिरली” कहा, सजदे से वो सर उठा ना पायेगा कि उसकी मगफिरत कर दी जाएगी,”*
*📘कंजुल उम्माल- 7/465,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝38 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ जिसने ज़ुहर से पहले 4 रक़अत सुन्नत पढ़ी, उसके दिन के गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*"_ जिसने ज़ुहर से पहले 4 रकअत पढ़ लीं तो अल्लाह तआला उसके उस दिन के गुनाहों को माफ़ कर देंगे_,"*
*📘 कंज़ुल उम्माल- 7/375,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝39 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जुमे के दिन खूब ध्यान से खुतबा सुनिए, 10 दिन के गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत अबू हरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*"_जो शख़्श अच्छी तरह से वज़ू करता है फिर जुमा की नमाज़ के लिए आता है, खूब ध्यान से खुतबा सुनता है और खुतबे के दौरान खामोश रहता है तो इस जुमा से गुज़िश्ता जुमा तक और मज़ीद 3 दिन के गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं,*
*❉_ और जिस शख़्स ने कंकरियों को हाथ लगाया यानि दौराने खुतबा उनसे खेलता रहा (या चटाई, कपड़ा वगैरा से खेलता रहा) तो उसने फ़िज़ूल काम किया,*
*📘 मुस्लिम, 1/283,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝40 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔*☞_ पाँँचो नमाज़ों का अहतमाम कीजिए, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया,-*
*”_ पाँँचो नमाज़, जुमा की नमाज़ पिछले जुमा तक और रमज़ान के रोज़े पिछले रमज़ान तक के गुनाहों के लिए कफ़्फ़ारा है जबकि इन आमाल को करने वाला कबीरा गुनाहों से बचे_”*
*📘 मुस्लिम,, 1/122,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝31 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जनाबत के बाद गुस्ल कीजिए, गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अबू अय्यूब अंसारी रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया,-*
*”_ पाँचों नमाज़ें और एक जुमा से लेकर दूसरे जुमा तक और अमानत का अदा करना ये अपने दरमियानी गुनाहों का कफ़्फ़ारा है _,*
*❉_ अर्ज़ किया गया- “या रसूलल्लाह! अमानत का अदा करना क्या है? आप ﷺ ने इरशाद फरमाया,- ”जनाबत के बाद गुस्ल करना क्योंकी हर बाल के नीचे जनाबत यानि नजासत होती है,”*
*📘 इब्ने माजा,, 44,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝32 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ जुमा के दिन यह आमाल कीजिए गुनाह माफ़ _,*
*❉ _ हज़रत सलमान रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*"_ जो आदमी जुमा के दिन गुस्ल करे और जहाँ तक हो सके सफ़ाई पाकीज़गी का अहतमाम करे और जो तेल खुशबू उसके घर में हो वो लगाए फिर वो घर से नमाज़ के लिए जाए और मस्जिद में पहुँँचकर इसकी अहतयात करे कि जो दो आदमी पहले से साथ बैठे हों उनके बीच में न बैठे फिर जो नमाज़ यानि सुनन नवाफ़िल की जितनी रक़ात उसके लिए मुकद्दर हों पढ़े,*
*❉ _ फिर जब इमाम खुत्बा दे तो तवज्जो और खामोशी के साथ उसको सुने तो अल्लाह तआला की तरफ से उस जुमा और दूसरे जुमा के दरमियान की उसकी सारी खताएं ज़रूर माफ़ कर दी जाएंगी _,*
*❉ _ और नसाई की एक रिवायत में अल्फ़ाज़ ए हदीस यूं हैं:-*
*"_ जो भी आदमी जुमा के दिन गुस्ल करे जैसा कि अल्लाह तआला ने उसको हुक्म दिया है फिर वो अपने घर से निकले हत्ताकी नमाज़े जुमा के लिए वो हाज़िर हो जाए, फिर तवज्जो और ख़ामोशी के साथ खुत्बा को सुने हत्ताकी वो अपनी नमाज़ पूरी कर ले तो उसकी ये नमाज़ गुज़िश्ता जुमा के गुनाहों का कफ़्फ़ारा बन जाएगी _,*
*❉ _ और तिबरानी की रिवायत के आख़िर में यूं है कि उस बंदे की नमाज़ उस जुमा और दूसरे जुमा के दरमियान की सारी खताओं का कफ़्फ़ारा बन जाएगी जब तक कि कबाइर से बचा रहे और ये बरकत उसको हमेशा हमेशा हासिल होती रहेगी _,*
*📚 रवाह अल-बुखारी व नसाई व तरगीब-1/487,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝33 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ सफ़ में खाली जगह हो तो पुर कीजिए, गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अबू हुजैफ़ा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि नबी करीम ﷺ ने इरशाद फ़रमाया,-*
*”_जिस शख़्स ने सफ़ में ख़ाली जगह को पुर किया उसकी मग़फ़िरत कर दी जाती है”*
*📘 बिज़्ज़ार मजमूअज़ ज़वाइद, 2/ 251,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ ℘AЯT↝34 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ Jangal me Rehne Wala Jab Azaan kehta hai aur Namaz Padhta hai, To Uske Gunaah Ma'af _,*
*❉⇨ Hazrat Uqba bin Aamir Raziyallahu Anhu Se Marvi hai k Rasulullah ﷺ ne irshad farmaya,-*
*”_ Jab Koi Bakriya’n Charane Wala Kisi Pahaad ki Jad me ( ya Jangal me ) Azaan kehta hai Aur Namaz Padhne Lagta hai To Haq Ta’ala Shanh Usse behad khush hota hai aur Ta’ajjub v Tafakhur Se Farishto se farmata hai Dekho Mera Banda Azaan keh kar Namaz Padhne Laga Ye Sab Mere Dar ki Vajah Se kar raha hai Maine iski Magfirat kar di aur Jannat ka Dakhila tay kar diya_,*
*📚 Kanzul Ummal- 7/294, Abu Da'uwd -1/170,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝35 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ नमाज़ के लिए पैदल आएं और जाएं, हर क़दम पर एक गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया,-*
*”_ जो आदमी उस मस्जिद की तरफ़ चले जहाँ बा-जमाअत नमाज़ होती हो तो हर एक क़दम उसकी एक खता मिटा देगा और दूसरे क़दम पर एक नेकी लिखी जाएगी, आते हुए भी और जाते हुए भी,”*
*📘 तिबरानी, 1/ 207,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝36 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ अज़ान सुन कर ये दुआ पढ़ें, आपके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत साअद बिन अबी वका़स रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया,-*
*”_ जो शख़्स मोअज़्ज़िन की अज़ान सुनने के वक़्त (यानि जब वो अज़ान पढ़ कर फ़ारिग हो जाए) ये दुआ पढ़ें-*
*”_ अश'हदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु वह्दहु ला शरीका लहू व अन्ना मुहम्मदन अब्दुहु व रसूलुहु, रज़ितु बिल्लाहि रब्बंव व बिल इस्लामी दीनंव व बी मुहम्मदी सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम रसूला”*
*तो उसके गुनाह बख्श दिए जाएंगे_,*
*📘 रवाह मुस्लिम व तिर्मिज़ी व नसाई व तरगीब-1/185,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝37 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जिसने सजदे मे 3 मर्तबा "रब्बिगफिरली" कहा उसके गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अबू सईद रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*”_जिस आदमी ने सजदे की हलात में 3 मर्तबा “रब्बिगफिरली” कहा, सजदे से वो सर उठा ना पायेगा कि उसकी मगफिरत कर दी जाएगी,”*
*📘कंजुल उम्माल- 7/465,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝38 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ जिसने ज़ुहर से पहले 4 रक़अत सुन्नत पढ़ी, उसके दिन के गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*"_ जिसने ज़ुहर से पहले 4 रकअत पढ़ लीं तो अल्लाह तआला उसके उस दिन के गुनाहों को माफ़ कर देंगे_,"*
*📘 कंज़ुल उम्माल- 7/375,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝39 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जुमे के दिन खूब ध्यान से खुतबा सुनिए, 10 दिन के गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत अबू हरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*"_जो शख़्श अच्छी तरह से वज़ू करता है फिर जुमा की नमाज़ के लिए आता है, खूब ध्यान से खुतबा सुनता है और खुतबे के दौरान खामोश रहता है तो इस जुमा से गुज़िश्ता जुमा तक और मज़ीद 3 दिन के गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं,*
*❉_ और जिस शख़्स ने कंकरियों को हाथ लगाया यानि दौराने खुतबा उनसे खेलता रहा (या चटाई, कपड़ा वगैरा से खेलता रहा) तो उसने फ़िज़ूल काम किया,*
*📘 मुस्लिम, 1/283,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ जिसने असर् से पहले 4 रका़त पढ़ी, उसके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अली करमुल्लाहु वज़्हू से मरवी है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*"_ मेरी उम्मत मुसलसल असर् से पहले 4 रक़अत पढ़ती रहेगी हत्ताकि वो ज़मीन पर इस हाल में चलेगी कि यक़ीनन उसकी मग़फिरत की जा चुकी होगी_,*
*📘 कंज़ुल उम्माल- 7/384,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝41 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ जिसने मगरिब के बाद 6 रकात पढ़ी, उसके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अम्मार बिन यासिर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि मैंने अपने हबीब रसूलुल्लाह ﷺ को देखा कि मगरिब के बाद 6 रकअते पढ़ते थे और हुज़ूर अनवर ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*"_ जो बंदा मगरिब के बाद 6 रकअत पढ़ेगा उसके गुनाहों की मगफिरत कर दी जाएगी चाहे समंदर के झाग के बराबर हो,"*
*📘 रवाह तिबरानी व तरगीब-1/ 404,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝42 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_मियां बीवी एक दूसरे को बेदार करे और तहज्जुद पढ़े, दोनों के गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु व अबू सईद रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*"_जब खाविंद रात को अपनी बीवी को उठाए फिर दोनों तहज्जुद पढ़ें तो उन दोनों को बा-कसरत अल्लाह का ज़िक्र करने वाले मर्द और बा-कसरत ज़िक्र करने वाली औरतों में लिख दिया जाता है _,*
*📚 रवाह अबू दाऊद,*
*❉_ जो आदमी रात को बेदार होकर अपनी बीवी को जगाये जिस पर नींद का गल्बा हो रहा हो (और गल्बा ए नींद की वजह से वो ना उठ सकी तो) उसके मुंह पर पानी का छींटा दे दिया, फिर दोनों अपने घर में इबादत के लिए खड़े हुए और रात की एक घड़ी अल्लाह तआला का ज़िक्र करने लगे तो अल्लाह तआला दोनों की मगफिरत फरमा देते हैं,'*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 7/ 793,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝43 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_सलातुत तस्बीह पढिये, सारे गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हुज़ूर अक़दस ﷺ ने एक मरतबा अपने चाचा हज़रत अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से फरमाया,- "ए मेरे चाचा क्या मैं तुम्हें एक अतिया करुं? एक बख्शीश करुं? एक चीज़ बताऊं? तुम्हें 10 चीज़ों का मालिक बनाऊं? जब तुम इस काम को करोगे तो हक़ तआला शान्ह तुम्हारे सब गुनाह पहले पिछले पुराने और नये, गलती से किये गये और जान बूझकर किये गये, छोटे और बड़े, छुप कर किये गये और खुल्लम खुल्ला किये गये सब ही माफ फरमा देगा,*
*❉_ वो काम ये है कि 4 रकअत निफ़्ल (सलातुत तस्बीह की नियत बांध कर) पढ़ों और हर रकअत में जब अलहम्द और सूरत पढ़ चुको तो रुकू से पहले खड़े हुए "सुब्हानल्लाहि वल्हमदुलिल्लाहि वा लाइलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर" 15 मर्तबा पढ़ो, फिर जब रुकू करो तो 10 मर्तबा उसे पढ़ो, फिर जब रुकू से खड़े हो तो 10 मर्तबा उसे पढ़ो, फिर जब सजदा करो तो 10 मरतबा उसमें पढ़ो, फिर सजदे से उठ कर बैठो तो 10 मर्तबा पढ़ों फिर जब दूसरे सजदे में जाओ तो 10 मर्तबा उसमें पढ़ों, फिर जब दूसरे सजदे से उठो तो ( दूसरी रकात में ) खड़े होने से पहले बैठ कर 10 मर्तबा पढ़ो, इन सब की मीजा़न 75 हुई, इसी तरह हर रकात में 75 दफा होगा,*
*❉_ अगर मुमकिन हो सके तो रोज़ाना एक मर्तबा पढ़ लिया करो ये भी ना हो तो हर जुमा को एक मर्तबा पढ़ लिया करो, ये भी ना हो सके तो हर महीने में एक मर्तबा पढ़ लिया करो, ये भी ना हो सके तो साल में एक मर्तबा पढ़ लिया करो, ये भी ना हो सके तो हर महीने में एक मर्तबा पढ़ लिया करो, ये भी ना हो सके तो हर साल में एक मरतबा पढ़ लिया करो यह भी ना हो सके तो उम्र भर में एक मर्तबा तो पढ़ ही लो_"*
*❉_और हज़रत अब्दुल्लाह बिन मुबारक रज़ियल्लाहु अन्हु से इस नमाज़ का ये तरीक़ा नक़ल किया गया है कि सना पढ़ने के बाद अलहम्दु शरीफ पढ़ने से पहले 15 दफा इन कल्मों को पढ़े, फिर आउजू और बिस्मिल्लाह पढ़ कर अलहम्द शरीफ और फिर कोई सूरत पढ़े, सूरत के बाद रुकू से पहले 10 मरतबा पढ़े, फिर रुकू में 10 मरतबा पढ़े, फिर रुकू से उठ कर, फिर दोनों सजदो में और दोनों सजदो के दरमियान बैठ कर 10 मर्तबा पढ़े ये 75 हो गई, (लिहाज़ा दूसरे सजदे के बाद बैठ कर पढ़ने की ज़रूरत नहीं रही),*
*📚 अखरजा़ नसाई व अबू दाउद -1/183 व इब्ने माजा व बैहिकी़ व इब्ने हिबान व तिबरानी व हाकिम व इब्ने खुज़ेमा फ़ी सहीह)*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝44 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_मस्जिदे अक्सा में नमाज पढ़िये, सारे गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_जब हज़रत सुलेमान बिन दाऊद अलैहिस्सलाम बैतुल मुक़द्दस की तामीर से फ़ारिग़ हो गए तो अल्लाह तआला से ये 3 दुआएं मांगे:-*
*1- ऐसा फैसला अता फरमा जो हुक्मे इलाही के मुवाफिक़ हो,*
*2- ऐ अल्लाह मुझे ऐसी सल्तनत अता फरमा जो मेरे सिवा किसी और के लिए मुनासिब न हो,*
*3- जो भी बंदा इस मस्जिद में सिर्फ नमाज़ पढ़ने की गर्ज से हाज़िर हो वो अपने गुनाहों से इस तरह निकल जाए जिस तरह मां से पैदाइश के दिन था (यानी कुछ भी गुनाह बाक़ी न रहे),*
*❉_ रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया, बहरहाल पहली दो दुआएं हजरत सुलेमान अलैहिस्सलाम की कुबूल कर ली गई और मुझे अल्लाह की ज़ाते आली से उम्मीद है कि उनकी तीसरी दुआ भी कुबूल फरमा ली गई,"*
*📘 नसाई, 1/112,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝46 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ मग़रिब और इशा के दरमियान नमाज़ पढ़ें, दिन भर के गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत सलमान रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ मगरिब और इशा के दरमियान नमाज़ को लाज़िम कपड़ों क्योंकि ये दिन भर के गुनाहों और बेहुदगियो को साफ कर देगी,_"*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 7/387,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝47 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ जुमे के दिन फजर की नमाज़ बा-जमाअत पढ़िये, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अबू उबैदा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ जुमा के दिन फजर की नमाज बा-जमाअत पढ़ने से कोई नमाज़ अफ़ज़ल नहीं है_,*
*❉_ और मेरा गुमान ये है कि जो आदमी फजर की नमाज़ बा-जमाअत पढ़ेगा उसकी ज़रूर बा ज़रूर मग़फिरत कर दी जाएगी,"*
*📚 रवाह अल- बिज़्ज़ार व अल- तिबरानी_,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝48 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ जिसने रज़ा ए इलाही के लिए मस्जिद बनाई या कुंवा ख़ुदवाया, उसके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*"_जिसने खालिस अल्लाह की रज़ा के लिए मस्जिद बनाई तो अल्लाह उसके लिए जन्नत में घर बनाएंगे, अगर उसी दिन मर गया तो उसकी मग़फिरत कर दी जाएगी,*
*❉_ और जिसने अल्लाह तआला की रज़ा के लिए कुंवा खोदा तो उसके लिए अल्लाह तआला जन्नत में घर बनाएँगे, अगर वो उसी दिन मर गया तो उसकी मग़फिरत कर दी जाएगी,"*
*📚 रवाह तिबरानी व कंज़ुल उम्माल- 7/655,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝49 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ दस मर्तबा अल्लाहु अकबर, दस मर्तबा सुब्हानल्लाह और दस मर्तबा अल्लाहुम्मग़फिरली कहिये, आपके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत सलमा रज़ियल्लाहु अन्हा से रिवायत है कि मैंने अर्ज़ किया- या रसूलल्लाह ! मुझे चंद कलीमात बता दीजिए मगर ज़्यादा ना हों, आप ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ 10 मर्तबा अल्लाहु अकबर कहो, अल्लाह तआला फरमाते हैं ये मेरे लिए हैं, 10 मर्तबा सुब्हानल्लाह कहो, अल्लाह तआला फरमाते हैं ये मेरे लिए हैं, और कहो, अल्लाहुम्मग़फिरली, ए अल्लाह मेरी मग़फिरत फरमा दे, अल्लाह तआला फरमाते हैं, मैंने मग़फिरत कर दी, तुम इसको 10 मर्तबा कहो, अल्लाह तआला हर मरतबा फरमाता है, मैंने मग़फिरत कर दी_,*
*📚 तिबरानी व मजमुअ अज़्ज़ावाइद- 10/109,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝50 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_तीसरे कलमे का विर्द कीजिये, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अबू दर्दा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया,-*
*"_ सुब्हानल्लाहि वल्हमदुलिल्लाहि व लाइलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर वला हवला वला कुव्वता इल्ला बिलाही" कहा करो, ये बाक़ियात ए सालिहात (बाक़ी रहने वाली नेकियां) हैं और ये गुनाहों को इस तरह मिटा देते हैं जिस तरह दरख़्त से (सर्दी के मौसम में) पत्ते झड़ते हैं और ये कलीमात जन्नत के खज़ानो में से हैं,*
*📚 तिबरानी व मजमूआ अज़्ज़ावइद- 10/ 104,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝51 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ये दुआ कीजिये, गुनाह माफ़_,*
*❉ ⇨ हज़रत ज़ैद रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि उनहोने नबी करीम ﷺ को ये इरशाद फ़रमाते हुए सुना :- जो शख्स "अस्तग़फिरुल्लाहिल्लज़ी ला इलाहा इल्ला हुवल हय्युल क़य्यूम व अतुबु इलैही" कहे उसकी मग़फिरत कर दी जाएगी....,*
*❉ _ एक रिवायत में इन कलमात को 3 मर्तबा पढ़ने का जिक्र है_,*
*"_(तर्जुमा) मैं अल्लाह तआला से मग़फिरत चाहता हूं जिसके सिवा कोई माबूद नहीं वो जिंदा है, क़ायम रखने वाला है और उसी के सामने तौबा करता हूं,"*
*📚_अबू दाऊद, मुस्तदरक हाकिम 2/118,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝52 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ आपके गुनाह समंदर के झाग के बराबर हो तो ये कलमात कहिये, सारे गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"ज़मीन पर जो शख़्स भी "ला इलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर वला हवला वला कुव्वता इल्ला बिल्लाहि" पढ़ता है तो उसके तमाम गुनाह माफ़ हो जाते हैं चाहे समंदर के झाग के बराबर हों,"*
*📚 तिर्मिज़ी, 2/184,*
*❉_ एक और रिवायत में ये फजी़लत "सुब्हानल्लाहि वल्हमदुलिल्लाहि" के इज़ाफे के साथ ज़िक्र की गई है_,*
*📚 मुस्तदरक हाकिम, 503,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝53 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ 100 मर्तबा सुब्हानल्लाह कहिए, 1000 नेकियां लिखी जाएंगी और 1000 गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत साद रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि हम रसूलल्लाह ﷺ की खिदमत में बेठे हुए थे कि आप ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ क्या तुममें से कोई शख्स हर रोज़ एक हज़ार नेकियां कमाने से आजिज़ है? आपके पास बैठे हुए लोगों में से किसी ने पूछा कि हममें से कोई आदमी एक हज़ार नेकियां किस तरह कमा सकता है?*
*"_आप ﷺ ने इरशाद फरमाया- जो शख़्स 100 मरतबा "सुब्हानल्लाहि" कहेगा उसके लिए एक हज़ार नेकियां लिख दी जाएगी और उसके एक हज़ार गुनाह माफ कर दिए जाएंगे,"*
*📚मुस्लिम,,2/345,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝54 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ जुमे की नमाज़ से फ़ारिग होकर “सुब्हानल्लाहिल अज़ीमी व बिहम्दिही” 100 मर्तबा कहो आपके एक लाख और वालदेन के 24 हज़ार गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ जिस शख़्स ने जुमे की नमाज़ से फ़ारिग होकर “सुब्हानल्लाहिल अज़ीमी व बिहम्दिही” 100 मर्तबा पढ़ा तो अल्लाह तआला उसके एक लाख गुनाह माफ़ फ़रमा देंगे और उसके वालदेन के 24 हज़ार गुनाह माफ़ फ़रमा देंगे,*
*📚 रवाह इब्नुल सुन्नी फ़ी अमल-अल-यौम, 164,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝55 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ बाज़ार में ये दुआ पढ़ कर क़दम रखिए, 10 लाख गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत उमर बिन खत्ताब रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ जिस शख़्स ने बाज़ार में क़दम रखते हुए ये कलमात पढ़े-*
*”ला इलाहा इल्लल्लाहु वाहदहु ला शरीका लहु लहुल मुल्कु वा लहुल हम्दु युहयी वा युमीतु वा हुवा हय्यु ला यमुतु बियदिहिल ख़ैरू वा हुवा आला कुल्ली शयइन क़दीर"*
*"_ अल्लाह तआला उसके लिए 10 लाख नेकियां लिख देते हैं और 10 लाख खताएं मिटा देते हैं और 10 लाख दर्जे़ बुलंद कर देते हैं,*
*📚 रवाह तिर्मिज़ी, हदीस- 3428,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝56 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ ला इलाहा इल्लल्लाहु कहिए, आपके गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”जो भी बंदा किसी वक़्त भी दिन में या रात में "ला इलाहा इल्लल्लाहु" कहता है उसके नामा आमाल में से बुराइयां मिटा दी जाती है और उनकी जगह नेकियां लिखी जाती है,*
*📚 रवाह अबू याअला, मुसनद अबू याअला, 3/ 445, मजमूआ अज़्ज़वा'इद,*
*❉_ जब मुसलमान बंदा "ला इलाहा इल्लल्लाहु" कहता है तो ये कलमा आसमानों को चीरता हुआ अल्लाह तआला के सामने खड़ा हो जाता है, तो हक़ तआला शान्हु इरशाद फरमाते हैं, ”ठहर जा” वो अर्ज़ करता है कि कैसे ठहर जाऊँ हालांकि मेरे पढ़ने वाले की मगफिरत नहीं हुई,*
*"_ हक तआला शान्हु इरशाद फरमाते हैं, ”मैने उसकी मगफिरत करने के लिए ही तुझको उसकी ज़ुबान से जारी किया था,”*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 1/48,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝57 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ सोने वाला जब करवट बदले तो ये कलमात कहे, गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ जब बंदा अपने बिस्तर पर या ज़मीन पर सोने के लिए लेटता है फिर रात को दांई जानिब या बांई जानिब करवट लेता है फिर वो "अश्'हदु अल्लाइलाहा इल्लल्लाहु वाहदहु ला शरीका लहू लहुल मुल्कु व लहुल हम्दु युहयी व युमीतु व हुवा हय्यु ला यमुतु बियदिहिल ख़ैरू वा हुवा अला कुल्ली शयइन क़दीर _," पढ़ता है तो हक़ तआला शान्ह फ़रिश्ते से फ़रमाते हैं -*
*“_ मेरे बंदे को देखो इस वक़्त भी मेरा बंदा मुझे भूला नहीं, मैं तुमको गवाह बनाता हूँ कि मैंने इस पर रहमत नाज़िल की और इसकी मग़फिरत कर दी,”*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 15/ 345,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝58 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ फजर की नमाज़ के बाद 100 मर्तबा सुब्हानल्लाह और 100 मर्तबा ला इलाहा इल्लल्लाह पढ़िए, सारे गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_जिसने सुबह की नमाज़ के बाद 100 मर्तबा सुब्हानल्लाह और 100 मरतबा ला इलाहा इल्लल्लाह पढ़ा तो उसके गुनाहों की मग़फिरत कर दी जाएगी चाहे उसके गुनाह समुंदर की झाग के बराबर हो,”*
*📚_ कंजुल उम्माल- 1/ 464,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝59 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ नमाज़ के बाद ये तस्बीह पढ़िए, गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ जो शख़्स नमाज़ के बाद कहे "सुब्हानल्लाहिल अज़ीमी व बिहम्दिही ला हवला वला कु़व्वता इल्ला बिल्लाहि" वो शख़्स इस हाल में खड़ा होगा कि उसकी मग़फ़िरत हो चुकी होगी _,*
*📚 रवाह अल बिज़्ज़ार, कज़ाफ़िल तरगीब, 2/ 454,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝60 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ सुबह व शाम 100 मर्तबा “सुब्हानल्लाहि वबिहम्दिहि” पढ़िए, सारे गुनाह माफ़ _,*
*∆⇨ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”जो शख़्स सुबह को 100 मर्तबा और शाम को 100 मर्तबा “सुब्हानल्लाहि वबिहम्दिहि” पढ़े उसके गुनाहों की मग़फ़िरत कर दी जाएगी, चाहे उसके गुनाह समुंदर के झाग से ज़्यादा हो,”*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 1/472,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝61 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ जुमा के दिन फजर की नमाज़ से पहले ये दुआ पढ़िए, सारे गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ जो शख़्स जुमा के दिन फजर की नमाज़ से पहले 3 मर्तबा "अस्तगफ़िरुल्लाहिल्लज़ी ला इलाहा इल्ला हुवल हैय्युल क़य्यूम व अतुबु इलैही," पढ़े तो अल्लाह तआला उसके गुनाहों की मगफ़िरत फ़रमा देंगे चाहे उसके गुनाह समुंदर के झाग के बराबर हों,”*
*📚 रवाह इब्नुल सुन्नी कज़ाफ़ी अमलल यौम- 83,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝62 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ सुबह शाम 100 मर्तबा सुब्हानल्लाहि व बिहम्दिही पढ़ लिया करें, दो हज़ार नेकियां मिलेंगी_,*
*❉_ हज़रत अबू दर्दा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*"_ तुममें से कोई शख्स इस बात को ना छोड़े कि वो दो हज़ार नेकियां कर लिया करे, सुबह के वक़्त और शाम के वक़्त सुब्हानल्लाहि व बिहम्दिही 100 मर्तबा कह लिया करे तो उसके लिए दो हज़ार नेकियां हो जाएंगी, इतने गुनाह इंशा अल्लाह रोज़ाना के होंगे भी नहीं और इस तस्बीह के अलावा जितने नेक काम होंगे उनका सवाब अलेहदा नफ़ा में है _,*
*📚 कंजुल उम्माल- 2/236,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝63 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ सुबह व शाम ये कलमात 10 मर्तबा कहो, 10 गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अबू अय्यूब अंसारी रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_जिस शख़्स ने सुबह के वक़्त "ला इलाहा इल्लल्लाहु वाहदहु ला शरीका लहू लहुल मुल्कु व लहुल हन्दू युहयी व युमीतु व हुवा अला कुल्ली शयइन क़दीर" 10 मर्तबा पढ़ा तो अल्लाह तआला उसके लिए 10 नेकीयां लिखेंगे और 10 खताओं को माफ़ फ़रमा देंगे और ये कलमात उसके लिए 10 गुलाम आज़ाद करने के बराबर होंगे,*
*❉_ और अल्लाह तआला उसको शैतान से पनाह में रखेंगे और जिस शख़्स ने कलमात मज़कूरा को रात के वक़्त पढ़ा तो भी मज़कूरा फ़ज़ीलत हासिल होगी,”*
*📚 कज़ाफ़िल तरगीब, 1/455, रवाह अहमद व नसाई,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝30 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ अल्लाह के पसंदीदा चार कलमे _,*
*❉⇨ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने चार कलमे चुन लिए हैं, "सुब्हानल्लाहि वलहम्दुलिल्लाहि व ला इलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर_"*
*"_ जिसने कहा "सुब्हानल्लाह" उसके लिए 20 नेकियां लिखी जाएंगी और 20 खताएं माफ़ की जाएंगी और जिसने "अल्लाहु अकबर" कहा उसको भी इतना ही सवाब मिलेगा और जिसने "ला इलाहा इल्लल्लाह" कहा उसके लिए भी इतना सवाब है _,*
*❉_ और जिसने इखलास से "अल्हम्दुलिल्लाहि रब्बिल आलमीन" कहा उसके लिए 30 नेकियां लिखी जाएंगी, 30 खताएं माफ़ होंगी,”*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 1/461,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ये दुआ कीजिये, गुनाह माफ़_,*
*❉ ⇨ हज़रत ज़ैद रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि उनहोने नबी करीम ﷺ को ये इरशाद फ़रमाते हुए सुना :- जो शख्स "अस्तग़फिरुल्लाहिल्लज़ी ला इलाहा इल्ला हुवल हय्युल क़य्यूम व अतुबु इलैही" कहे उसकी मग़फिरत कर दी जाएगी....,*
*❉ _ एक रिवायत में इन कलमात को 3 मर्तबा पढ़ने का जिक्र है_,*
*"_(तर्जुमा) मैं अल्लाह तआला से मग़फिरत चाहता हूं जिसके सिवा कोई माबूद नहीं वो जिंदा है, क़ायम रखने वाला है और उसी के सामने तौबा करता हूं,"*
*📚_अबू दाऊद, मुस्तदरक हाकिम 2/118,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝52 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ आपके गुनाह समंदर के झाग के बराबर हो तो ये कलमात कहिये, सारे गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"ज़मीन पर जो शख़्स भी "ला इलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर वला हवला वला कुव्वता इल्ला बिल्लाहि" पढ़ता है तो उसके तमाम गुनाह माफ़ हो जाते हैं चाहे समंदर के झाग के बराबर हों,"*
*📚 तिर्मिज़ी, 2/184,*
*❉_ एक और रिवायत में ये फजी़लत "सुब्हानल्लाहि वल्हमदुलिल्लाहि" के इज़ाफे के साथ ज़िक्र की गई है_,*
*📚 मुस्तदरक हाकिम, 503,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝53 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ 100 मर्तबा सुब्हानल्लाह कहिए, 1000 नेकियां लिखी जाएंगी और 1000 गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत साद रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि हम रसूलल्लाह ﷺ की खिदमत में बेठे हुए थे कि आप ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ क्या तुममें से कोई शख्स हर रोज़ एक हज़ार नेकियां कमाने से आजिज़ है? आपके पास बैठे हुए लोगों में से किसी ने पूछा कि हममें से कोई आदमी एक हज़ार नेकियां किस तरह कमा सकता है?*
*"_आप ﷺ ने इरशाद फरमाया- जो शख़्स 100 मरतबा "सुब्हानल्लाहि" कहेगा उसके लिए एक हज़ार नेकियां लिख दी जाएगी और उसके एक हज़ार गुनाह माफ कर दिए जाएंगे,"*
*📚मुस्लिम,,2/345,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝54 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ जुमे की नमाज़ से फ़ारिग होकर “सुब्हानल्लाहिल अज़ीमी व बिहम्दिही” 100 मर्तबा कहो आपके एक लाख और वालदेन के 24 हज़ार गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ जिस शख़्स ने जुमे की नमाज़ से फ़ारिग होकर “सुब्हानल्लाहिल अज़ीमी व बिहम्दिही” 100 मर्तबा पढ़ा तो अल्लाह तआला उसके एक लाख गुनाह माफ़ फ़रमा देंगे और उसके वालदेन के 24 हज़ार गुनाह माफ़ फ़रमा देंगे,*
*📚 रवाह इब्नुल सुन्नी फ़ी अमल-अल-यौम, 164,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝55 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ बाज़ार में ये दुआ पढ़ कर क़दम रखिए, 10 लाख गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत उमर बिन खत्ताब रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ जिस शख़्स ने बाज़ार में क़दम रखते हुए ये कलमात पढ़े-*
*”ला इलाहा इल्लल्लाहु वाहदहु ला शरीका लहु लहुल मुल्कु वा लहुल हम्दु युहयी वा युमीतु वा हुवा हय्यु ला यमुतु बियदिहिल ख़ैरू वा हुवा आला कुल्ली शयइन क़दीर"*
*"_ अल्लाह तआला उसके लिए 10 लाख नेकियां लिख देते हैं और 10 लाख खताएं मिटा देते हैं और 10 लाख दर्जे़ बुलंद कर देते हैं,*
*📚 रवाह तिर्मिज़ी, हदीस- 3428,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝56 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ ला इलाहा इल्लल्लाहु कहिए, आपके गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”जो भी बंदा किसी वक़्त भी दिन में या रात में "ला इलाहा इल्लल्लाहु" कहता है उसके नामा आमाल में से बुराइयां मिटा दी जाती है और उनकी जगह नेकियां लिखी जाती है,*
*📚 रवाह अबू याअला, मुसनद अबू याअला, 3/ 445, मजमूआ अज़्ज़वा'इद,*
*❉_ जब मुसलमान बंदा "ला इलाहा इल्लल्लाहु" कहता है तो ये कलमा आसमानों को चीरता हुआ अल्लाह तआला के सामने खड़ा हो जाता है, तो हक़ तआला शान्हु इरशाद फरमाते हैं, ”ठहर जा” वो अर्ज़ करता है कि कैसे ठहर जाऊँ हालांकि मेरे पढ़ने वाले की मगफिरत नहीं हुई,*
*"_ हक तआला शान्हु इरशाद फरमाते हैं, ”मैने उसकी मगफिरत करने के लिए ही तुझको उसकी ज़ुबान से जारी किया था,”*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 1/48,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝57 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ सोने वाला जब करवट बदले तो ये कलमात कहे, गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ जब बंदा अपने बिस्तर पर या ज़मीन पर सोने के लिए लेटता है फिर रात को दांई जानिब या बांई जानिब करवट लेता है फिर वो "अश्'हदु अल्लाइलाहा इल्लल्लाहु वाहदहु ला शरीका लहू लहुल मुल्कु व लहुल हम्दु युहयी व युमीतु व हुवा हय्यु ला यमुतु बियदिहिल ख़ैरू वा हुवा अला कुल्ली शयइन क़दीर _," पढ़ता है तो हक़ तआला शान्ह फ़रिश्ते से फ़रमाते हैं -*
*“_ मेरे बंदे को देखो इस वक़्त भी मेरा बंदा मुझे भूला नहीं, मैं तुमको गवाह बनाता हूँ कि मैंने इस पर रहमत नाज़िल की और इसकी मग़फिरत कर दी,”*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 15/ 345,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝58 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ फजर की नमाज़ के बाद 100 मर्तबा सुब्हानल्लाह और 100 मर्तबा ला इलाहा इल्लल्लाह पढ़िए, सारे गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_जिसने सुबह की नमाज़ के बाद 100 मर्तबा सुब्हानल्लाह और 100 मरतबा ला इलाहा इल्लल्लाह पढ़ा तो उसके गुनाहों की मग़फिरत कर दी जाएगी चाहे उसके गुनाह समुंदर की झाग के बराबर हो,”*
*📚_ कंजुल उम्माल- 1/ 464,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝59 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ नमाज़ के बाद ये तस्बीह पढ़िए, गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ जो शख़्स नमाज़ के बाद कहे "सुब्हानल्लाहिल अज़ीमी व बिहम्दिही ला हवला वला कु़व्वता इल्ला बिल्लाहि" वो शख़्स इस हाल में खड़ा होगा कि उसकी मग़फ़िरत हो चुकी होगी _,*
*📚 रवाह अल बिज़्ज़ार, कज़ाफ़िल तरगीब, 2/ 454,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝60 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ सुबह व शाम 100 मर्तबा “सुब्हानल्लाहि वबिहम्दिहि” पढ़िए, सारे गुनाह माफ़ _,*
*∆⇨ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”जो शख़्स सुबह को 100 मर्तबा और शाम को 100 मर्तबा “सुब्हानल्लाहि वबिहम्दिहि” पढ़े उसके गुनाहों की मग़फ़िरत कर दी जाएगी, चाहे उसके गुनाह समुंदर के झाग से ज़्यादा हो,”*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 1/472,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝61 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ जुमा के दिन फजर की नमाज़ से पहले ये दुआ पढ़िए, सारे गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ जो शख़्स जुमा के दिन फजर की नमाज़ से पहले 3 मर्तबा "अस्तगफ़िरुल्लाहिल्लज़ी ला इलाहा इल्ला हुवल हैय्युल क़य्यूम व अतुबु इलैही," पढ़े तो अल्लाह तआला उसके गुनाहों की मगफ़िरत फ़रमा देंगे चाहे उसके गुनाह समुंदर के झाग के बराबर हों,”*
*📚 रवाह इब्नुल सुन्नी कज़ाफ़ी अमलल यौम- 83,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝62 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ सुबह शाम 100 मर्तबा सुब्हानल्लाहि व बिहम्दिही पढ़ लिया करें, दो हज़ार नेकियां मिलेंगी_,*
*❉_ हज़रत अबू दर्दा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*"_ तुममें से कोई शख्स इस बात को ना छोड़े कि वो दो हज़ार नेकियां कर लिया करे, सुबह के वक़्त और शाम के वक़्त सुब्हानल्लाहि व बिहम्दिही 100 मर्तबा कह लिया करे तो उसके लिए दो हज़ार नेकियां हो जाएंगी, इतने गुनाह इंशा अल्लाह रोज़ाना के होंगे भी नहीं और इस तस्बीह के अलावा जितने नेक काम होंगे उनका सवाब अलेहदा नफ़ा में है _,*
*📚 कंजुल उम्माल- 2/236,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝63 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ सुबह व शाम ये कलमात 10 मर्तबा कहो, 10 गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अबू अय्यूब अंसारी रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_जिस शख़्स ने सुबह के वक़्त "ला इलाहा इल्लल्लाहु वाहदहु ला शरीका लहू लहुल मुल्कु व लहुल हन्दू युहयी व युमीतु व हुवा अला कुल्ली शयइन क़दीर" 10 मर्तबा पढ़ा तो अल्लाह तआला उसके लिए 10 नेकीयां लिखेंगे और 10 खताओं को माफ़ फ़रमा देंगे और ये कलमात उसके लिए 10 गुलाम आज़ाद करने के बराबर होंगे,*
*❉_ और अल्लाह तआला उसको शैतान से पनाह में रखेंगे और जिस शख़्स ने कलमात मज़कूरा को रात के वक़्त पढ़ा तो भी मज़कूरा फ़ज़ीलत हासिल होगी,”*
*📚 कज़ाफ़िल तरगीब, 1/455, रवाह अहमद व नसाई,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝30 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ अल्लाह के पसंदीदा चार कलमे _,*
*❉⇨ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने चार कलमे चुन लिए हैं, "सुब्हानल्लाहि वलहम्दुलिल्लाहि व ला इलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर_"*
*"_ जिसने कहा "सुब्हानल्लाह" उसके लिए 20 नेकियां लिखी जाएंगी और 20 खताएं माफ़ की जाएंगी और जिसने "अल्लाहु अकबर" कहा उसको भी इतना ही सवाब मिलेगा और जिसने "ला इलाहा इल्लल्लाह" कहा उसके लिए भी इतना सवाब है _,*
*❉_ और जिसने इखलास से "अल्हम्दुलिल्लाहि रब्बिल आलमीन" कहा उसके लिए 30 नेकियां लिखी जाएंगी, 30 खताएं माफ़ होंगी,”*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 1/461,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝65 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ मुसाफ़े के वक़्त दोनों ”यगफ़िरुल्लाहु लना वा लकुम” और मिज़ाज पुरसी के वक़्त ”अल्हम्दुलिल्लाह” कहें दोनों के गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत बरा’अ बिन आज़िब रज़ियल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”जब दो मुसलमान मुलाक़ात के वक़्त मुसाफ़ा करते हैं और अल्लाह तआला की तारीफ़ करते हैं और अल्लाह तआला से मग़फ़िरत तलब करते हैं, (यानि मुसाफ़े के वक़्त "यगफ़िरुल्लाहु लना व लकुम" और मिज़ाज पुरसी के वक़्त "अल्हम्दुलिल्लाह" कहते हैं) तो उनकी मग़फ़िरत कर दी जाती है,*
*📚 अबू दाऊद, 2/ 708,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝66 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ खाने के बाद और कपड़ा पहनते वक़्त ये दुआ पढ़िए, आपके अगले पिछले गुनाह माफ़ _,*
*❉ ⇨ हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ जिस शख़्स ने खाना खा कर ये दुआ पढ़ी "अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अतअमनी हाज़त्तआमा व रज़क़निही मिन गयरी हवली मिन्नी वला क़ुव्वती" (तर्जुमा) तमाम तारीफें अल्लाह के लिए है जिसने मुझे ये खाना खिलाया और मेरी कोशिश और ताक़त के बगेर मुझे ये नसीब फ़रमाया,*
*"_ तो उसके अगले पिछले गुनाह माफ़ हो जाते हैं,*
*❉ _और जिसने पकड़ा पहन कर ये दुआ पढ़ी "अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी कसानी हाज़ा व रज़कनीही मिन गयरी हवली मिन्नी वाला कुव्वती" (तर्जुमा) तमाम तारीफें अल्लाह तआला के लिए है जिसने मुझे ये पकड़ा पहनाया और मेरी कोशिश और ताक़त के बगेर मुझे ये नसीब फ़रमाया,*
*"_तो उसके अगले पिछले गुनाह माफ़ हो जाते हैं,"*
*📚अबू दाऊद, 2/557,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝67 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ अख़्ताम ए मजलिस पर ये दुआ पढ़िए, गुनाह माफ़ _,*
*❉ ⇨ हज़रत जुबेर बिन मुतइम रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_जिसने मजलिस के खत्म होने पर कहा "सुबहा नकलल्लाहुम्मा वा बिहम्दिका अशहदु अन ला इलाहा इल्ला अन्ता अस्तगफिरुका वा अतुबु इलयका," तो अगर ये ज़िक्र की मजलिस थी तो इस मजलिस पर मुहर लगा दी जाएगी और अगर ये बेहुदा और लायानी मजलिस थी तो ये कलमात उन मजलिस का कफ़्फ़ारा बन जाएंगे,”*
*📚 अख़रजा नसाई व तिबरानी व हाकिम व कंज़ुल उम्माल- 9/142,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝68 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जुमा के दिन फजर की नमाज़ से पहले ये दुआ पढ़िए, सारे गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_जो शख़्स जुमा के दिन फजर की नमाज़ से पहले तीन मर्तबा "अस्तग़फ़िरुल्लाहिल्लज़ी ला इलाहा इल्ला हुवल हय्युल क़य्यूम वा अतुबु इलैही" पढ़े तो अल्लाह तआला उसके गुनाहों की मगफ़िरत फ़रमा देंगे चाहे उसके गुनाह समुंदर के झाग के बराबर हों,”*
*📚 रवाह इब्नुल सुन्नी कज़ाफ़ी अमल अल-यौम, हदीस 83 सफ़ा 34,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝69 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ फजर और असर के बाद ये दुआ पढ़िए, सारे गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत मुआज़ बिन जबल रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि मैंने रसूलुल्लाह ﷺ को फ़रमाते हुए सुना है कि,-*
*”_जो शख़्स फजर की नमाज़ के बाद तीन मर्तबा और असर की नमाज़ के बाद तीन मर्तबा "अस्तगफ़िरुल्लाहिल्लज़ी ला इलाहा इल्ला हुवल हय्युल क़य्यूम व अतुबु इलैही" पढ़े तो उसके गुनाहों की बख़्शीश हो जाएगी चाहे उसके गुनाह समुंदर के झाग के बराबर ही क्यों न हो_,*
*📚_ कंज़ुल उम्माल- 2/150,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝70 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ लेटते वक्त ये दुआ तीन मर्तबा पढ़िये सारे गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*"जो शख़्स अपने बिस्तर पर लेटते हुए तीन मर्तबा "अस्तगफिरुल्लाहिल्लज़ी ला इलाहा इल्ला हुवल हय्युल कय्यूम वा अतुबु इलैही" पढ़े तो उसके गुनाहों की मग़फिरत कर दी जाएगी चाहे समुंदर के झाग के बराबर हों, चाहे दरख्त के पत्तों के शुमार के मुवाफिक हों, चाहे तह बा तह रेत के ज़र्रो के बराबर हों, चाहे दुनिया के दिनों के अदद के मुवाफिक हों_"*
*📚 रवाह तिर्मिज़ी कज़ा फिल तरगीब-1/416, तिर्मिज़ी -2/175, कंज़ुल उम्माल- 15/334,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝71 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _बेदार होते ही ये दुआ पढ़िये, गुनाह माफ़,*
*❉⇨ हज़रत उबादा बिन सामित रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_जिस शख़्स ने बेदार होते ही ये दुआ पढ़ी "ला इलाहा इल्लल्लाहु वाहदहु ला शरिका लहु लहुल मुलकु वा लहुल हमदु वा हुवा अला कुल्ली शयइन क़दीर, अल्हम्दुलिल्लाहि वा सुब्हानल्लाहि वा ला इलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर वला हवला वला कुव्वता इल्ला बिल्लाहि, "*
*"_ और फिर उसने कहा "अल्लाहुम्मगफिरली" या और कोई दुआ मांगी तो अल्लाह तआला कुबूल फरमाएंगे, उसके बाद वज़ु करके नमाज़ पढ़ी तो उसकी नमाज़ कुबूल होगी,"*
*📚 रवाह बुखारी व अबू दाऊद 273, तरगीब-1/421,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝72 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_अल्लाह की रज़ा के लिए सूरह यासीन पढ़िये, गुनाह माफ,*
*❉ _हज़रत जुन्दुब रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ जिस शख़्स ने सूरह यासीन किसी रात में अल्लाह तआला की रज़ा के लिए पढ़ी तो उसकी मग़फिरत कर दी जाती है,"*
*📚 इब्ने हिबान -4/121,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝73 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ सूरह मुल्क पढ़ लीजिये गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"कुरान ए करीम में एक सूरत 30 आयत की ऐसी है कि वो अपने पढ़ने वाले की शफाअत करती रहती है यहां तक कि उसकी मग़फिरत कर दी जाती है, वो सूरत तबरकल्लज़ी है"*
*📚 तिर्मिज़ी, 2/113,*,
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝74 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ फजर की नमाज़ के बाद 100 मर्तबा सूरह इखलास पढिये, गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत वासिला बिन असका़ रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं कि मैने रसूलुल्लाह ﷺ को ये इरशाद फरमाते हुए सुना-*
*"_जिस शख़्स ने सुबह की नमाज़ पढ़ी फिर बोलने से पहले 100 मर्तबा सूरह इख़लास पढ़ी (कु़ल हुवल्लाहु अहद) अल्लाह तआला उसके एक साल के गुनाहों की मग़फिरत फरमा देंगे,"*
*📚 कन्ज़ुल उम्माल- 2/152,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝75 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_जुमा की नमाज़ के बाद सूरह फातिहा, सूरह इख़लास और सूरह माउज़तीन सात सात मर्तबा पढिये, सारे गुनाह माफ़_,*
*❉⇨हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_जो शख़्स जुमा की नमाज़ के बाद "क़ुल हुवल्लाहु अहद, क़ुल आउज़ू बिरब्बिल फलक, क़ुल आउज़ू बिराब्बिन नास, सात सात मर्तबा पढ़े तो अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त आइंदा जुमा तक बुराई से पनाह में रखेंगे," (गुनाह के इर्तकाब से बढ़कर आदमी के लिए कौन सी बुराई हो सकती है)*
*📚 अखरजा इब्नुल सुन्नी फि अमल अल-यौम वल लैलाह, 1/145,*
*❉_और क़सीरी की रिवायत में अल्फ़ाज़ ए हदीस इस तरह है -*
*"_जो शख्स जुमा के दिन इमाम के सलाम फैरने के बाद उसी हालत में बैठे हुए "सूरह फातिहा, क़ुल हुवल्लाहु अहद, क़ुल आउज़ू बिरब्बिल फलक, क़ुल आउज़ू बिरब्बिन नास, सात सात मरतबा पढ़े तो उसके अगले पिछले गुनाहों की मगफिरत कर दी जाएगी,*
*"_ और जितने लोग अल्लाह और क़यामत के दिन पर ईमान रखते हैं उनके अदद के बा-क़दर उसको अजर् अता किया जाएगा,"*
*📚असक़लानी-98,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝76 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ सूरह हशर् की आखिरी तीन आयतें पढ़िए, सारे गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_जिसने सूरह हशर् की आखिरी तीन आयतें पढ़ीं तो उसके अगले पिछले गुनाहों की मग़फिरत कर दी जाएगी,”*
*📚 अबू इस्हाक़, अस्क़लानी- 102,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝77 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ हर रोज़ 200 मर्तबा सूरह इखलास पढिये, 50 साल के गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_जिस शख़्स ने हर रोज़ 200 मर्तबा "क़ुल हुवल्लाहु अहद" पढ़ी उसके 50 साल के गुनाह माफ़ कर दिये जायेंगे मगर ये कि उस पर क़र्ज़ हो, "*
*📚 रवाह तिर्मिज़ी, 2/448,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝78 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ गुनाह पर शर्मिंदगी का इज़हार करो, गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_जिस शख़्स ने कोई ग़लती की या कोई गुनाह किया फिर उस पर शर्मिंदा हुआ तो ये शर्मिंदगी उसके गुनाह का कफ्फारा है,"*
*📚 रवाह बैहक़ी फ़ि शोबुल ईमान, 5/387,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝79 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ए अल्लाह! तेरी मग़फिरत मेरे गुनाहों से बहुत ज्यादा वसी है और मैं अपने अमल से ज़्यादा तेरी रहमत का उम्मीदवर हूं" तीन मर्तबा कहने से गुनाह माफ _,*
*❉⇨ हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि एक शख़्स रसूलुल्लाह ﷺ की खिदमत में हाज़िर हुआ और कहने लगा- "हाय मेरे गुनाह! हाय मेरे गुनाह! उसने ये दो या तीन मर्तबा कहा, रसूलुल्लाह ﷺ ने उससे कहा, कहो:-*
*"_अल्लाहुम्मा मग़फिरतुका अव सऊ मिन ज़ुनुबी व रहमतुका अरजा इन्दी मिन अमली,*
*(तर्जुमा):- ऐ अल्लाह ! तेरी मग़फिरत मेरे गुनाहों से बहुत ज्यादा वसी है और मैं अपने अमल से ज़्यादा तेरी रहमत का उम्मीदवर हूं,"*
*❉_ उस शख़्स ने ये कलमात कहे, आप ﷺ ने इरशाद फरमाया, फिर कहो, उसने फिर कहा, आप ﷺ ने इरशाद फरमाया, फिर कहो, उसने तीसरी मर्तबा भी ये कलमात कहे, इसके बाद आप ﷺ ने इरशाद फरमाया, ''उठ जाओ, अल्लाह तआला ने तुम्हारी मग़फिरत फरमाया दी,”*
*📚 मुस्तदरक हाकिम, 1/543,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ मुसाफ़े के वक़्त दोनों ”यगफ़िरुल्लाहु लना वा लकुम” और मिज़ाज पुरसी के वक़्त ”अल्हम्दुलिल्लाह” कहें दोनों के गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत बरा’अ बिन आज़िब रज़ियल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”जब दो मुसलमान मुलाक़ात के वक़्त मुसाफ़ा करते हैं और अल्लाह तआला की तारीफ़ करते हैं और अल्लाह तआला से मग़फ़िरत तलब करते हैं, (यानि मुसाफ़े के वक़्त "यगफ़िरुल्लाहु लना व लकुम" और मिज़ाज पुरसी के वक़्त "अल्हम्दुलिल्लाह" कहते हैं) तो उनकी मग़फ़िरत कर दी जाती है,*
*📚 अबू दाऊद, 2/ 708,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝66 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ खाने के बाद और कपड़ा पहनते वक़्त ये दुआ पढ़िए, आपके अगले पिछले गुनाह माफ़ _,*
*❉ ⇨ हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ जिस शख़्स ने खाना खा कर ये दुआ पढ़ी "अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अतअमनी हाज़त्तआमा व रज़क़निही मिन गयरी हवली मिन्नी वला क़ुव्वती" (तर्जुमा) तमाम तारीफें अल्लाह के लिए है जिसने मुझे ये खाना खिलाया और मेरी कोशिश और ताक़त के बगेर मुझे ये नसीब फ़रमाया,*
*"_ तो उसके अगले पिछले गुनाह माफ़ हो जाते हैं,*
*❉ _और जिसने पकड़ा पहन कर ये दुआ पढ़ी "अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी कसानी हाज़ा व रज़कनीही मिन गयरी हवली मिन्नी वाला कुव्वती" (तर्जुमा) तमाम तारीफें अल्लाह तआला के लिए है जिसने मुझे ये पकड़ा पहनाया और मेरी कोशिश और ताक़त के बगेर मुझे ये नसीब फ़रमाया,*
*"_तो उसके अगले पिछले गुनाह माफ़ हो जाते हैं,"*
*📚अबू दाऊद, 2/557,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝67 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ अख़्ताम ए मजलिस पर ये दुआ पढ़िए, गुनाह माफ़ _,*
*❉ ⇨ हज़रत जुबेर बिन मुतइम रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_जिसने मजलिस के खत्म होने पर कहा "सुबहा नकलल्लाहुम्मा वा बिहम्दिका अशहदु अन ला इलाहा इल्ला अन्ता अस्तगफिरुका वा अतुबु इलयका," तो अगर ये ज़िक्र की मजलिस थी तो इस मजलिस पर मुहर लगा दी जाएगी और अगर ये बेहुदा और लायानी मजलिस थी तो ये कलमात उन मजलिस का कफ़्फ़ारा बन जाएंगे,”*
*📚 अख़रजा नसाई व तिबरानी व हाकिम व कंज़ुल उम्माल- 9/142,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝68 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जुमा के दिन फजर की नमाज़ से पहले ये दुआ पढ़िए, सारे गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_जो शख़्स जुमा के दिन फजर की नमाज़ से पहले तीन मर्तबा "अस्तग़फ़िरुल्लाहिल्लज़ी ला इलाहा इल्ला हुवल हय्युल क़य्यूम वा अतुबु इलैही" पढ़े तो अल्लाह तआला उसके गुनाहों की मगफ़िरत फ़रमा देंगे चाहे उसके गुनाह समुंदर के झाग के बराबर हों,”*
*📚 रवाह इब्नुल सुन्नी कज़ाफ़ी अमल अल-यौम, हदीस 83 सफ़ा 34,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝69 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ फजर और असर के बाद ये दुआ पढ़िए, सारे गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत मुआज़ बिन जबल रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि मैंने रसूलुल्लाह ﷺ को फ़रमाते हुए सुना है कि,-*
*”_जो शख़्स फजर की नमाज़ के बाद तीन मर्तबा और असर की नमाज़ के बाद तीन मर्तबा "अस्तगफ़िरुल्लाहिल्लज़ी ला इलाहा इल्ला हुवल हय्युल क़य्यूम व अतुबु इलैही" पढ़े तो उसके गुनाहों की बख़्शीश हो जाएगी चाहे उसके गुनाह समुंदर के झाग के बराबर ही क्यों न हो_,*
*📚_ कंज़ुल उम्माल- 2/150,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝70 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ लेटते वक्त ये दुआ तीन मर्तबा पढ़िये सारे गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*"जो शख़्स अपने बिस्तर पर लेटते हुए तीन मर्तबा "अस्तगफिरुल्लाहिल्लज़ी ला इलाहा इल्ला हुवल हय्युल कय्यूम वा अतुबु इलैही" पढ़े तो उसके गुनाहों की मग़फिरत कर दी जाएगी चाहे समुंदर के झाग के बराबर हों, चाहे दरख्त के पत्तों के शुमार के मुवाफिक हों, चाहे तह बा तह रेत के ज़र्रो के बराबर हों, चाहे दुनिया के दिनों के अदद के मुवाफिक हों_"*
*📚 रवाह तिर्मिज़ी कज़ा फिल तरगीब-1/416, तिर्मिज़ी -2/175, कंज़ुल उम्माल- 15/334,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝71 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _बेदार होते ही ये दुआ पढ़िये, गुनाह माफ़,*
*❉⇨ हज़रत उबादा बिन सामित रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_जिस शख़्स ने बेदार होते ही ये दुआ पढ़ी "ला इलाहा इल्लल्लाहु वाहदहु ला शरिका लहु लहुल मुलकु वा लहुल हमदु वा हुवा अला कुल्ली शयइन क़दीर, अल्हम्दुलिल्लाहि वा सुब्हानल्लाहि वा ला इलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर वला हवला वला कुव्वता इल्ला बिल्लाहि, "*
*"_ और फिर उसने कहा "अल्लाहुम्मगफिरली" या और कोई दुआ मांगी तो अल्लाह तआला कुबूल फरमाएंगे, उसके बाद वज़ु करके नमाज़ पढ़ी तो उसकी नमाज़ कुबूल होगी,"*
*📚 रवाह बुखारी व अबू दाऊद 273, तरगीब-1/421,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝72 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_अल्लाह की रज़ा के लिए सूरह यासीन पढ़िये, गुनाह माफ,*
*❉ _हज़रत जुन्दुब रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ जिस शख़्स ने सूरह यासीन किसी रात में अल्लाह तआला की रज़ा के लिए पढ़ी तो उसकी मग़फिरत कर दी जाती है,"*
*📚 इब्ने हिबान -4/121,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝73 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ सूरह मुल्क पढ़ लीजिये गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"कुरान ए करीम में एक सूरत 30 आयत की ऐसी है कि वो अपने पढ़ने वाले की शफाअत करती रहती है यहां तक कि उसकी मग़फिरत कर दी जाती है, वो सूरत तबरकल्लज़ी है"*
*📚 तिर्मिज़ी, 2/113,*,
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝74 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ फजर की नमाज़ के बाद 100 मर्तबा सूरह इखलास पढिये, गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत वासिला बिन असका़ रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं कि मैने रसूलुल्लाह ﷺ को ये इरशाद फरमाते हुए सुना-*
*"_जिस शख़्स ने सुबह की नमाज़ पढ़ी फिर बोलने से पहले 100 मर्तबा सूरह इख़लास पढ़ी (कु़ल हुवल्लाहु अहद) अल्लाह तआला उसके एक साल के गुनाहों की मग़फिरत फरमा देंगे,"*
*📚 कन्ज़ुल उम्माल- 2/152,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝75 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_जुमा की नमाज़ के बाद सूरह फातिहा, सूरह इख़लास और सूरह माउज़तीन सात सात मर्तबा पढिये, सारे गुनाह माफ़_,*
*❉⇨हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_जो शख़्स जुमा की नमाज़ के बाद "क़ुल हुवल्लाहु अहद, क़ुल आउज़ू बिरब्बिल फलक, क़ुल आउज़ू बिराब्बिन नास, सात सात मर्तबा पढ़े तो अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त आइंदा जुमा तक बुराई से पनाह में रखेंगे," (गुनाह के इर्तकाब से बढ़कर आदमी के लिए कौन सी बुराई हो सकती है)*
*📚 अखरजा इब्नुल सुन्नी फि अमल अल-यौम वल लैलाह, 1/145,*
*❉_और क़सीरी की रिवायत में अल्फ़ाज़ ए हदीस इस तरह है -*
*"_जो शख्स जुमा के दिन इमाम के सलाम फैरने के बाद उसी हालत में बैठे हुए "सूरह फातिहा, क़ुल हुवल्लाहु अहद, क़ुल आउज़ू बिरब्बिल फलक, क़ुल आउज़ू बिरब्बिन नास, सात सात मरतबा पढ़े तो उसके अगले पिछले गुनाहों की मगफिरत कर दी जाएगी,*
*"_ और जितने लोग अल्लाह और क़यामत के दिन पर ईमान रखते हैं उनके अदद के बा-क़दर उसको अजर् अता किया जाएगा,"*
*📚असक़लानी-98,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝76 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ सूरह हशर् की आखिरी तीन आयतें पढ़िए, सारे गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_जिसने सूरह हशर् की आखिरी तीन आयतें पढ़ीं तो उसके अगले पिछले गुनाहों की मग़फिरत कर दी जाएगी,”*
*📚 अबू इस्हाक़, अस्क़लानी- 102,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝77 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ हर रोज़ 200 मर्तबा सूरह इखलास पढिये, 50 साल के गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_जिस शख़्स ने हर रोज़ 200 मर्तबा "क़ुल हुवल्लाहु अहद" पढ़ी उसके 50 साल के गुनाह माफ़ कर दिये जायेंगे मगर ये कि उस पर क़र्ज़ हो, "*
*📚 रवाह तिर्मिज़ी, 2/448,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝78 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ गुनाह पर शर्मिंदगी का इज़हार करो, गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_जिस शख़्स ने कोई ग़लती की या कोई गुनाह किया फिर उस पर शर्मिंदा हुआ तो ये शर्मिंदगी उसके गुनाह का कफ्फारा है,"*
*📚 रवाह बैहक़ी फ़ि शोबुल ईमान, 5/387,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝79 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ए अल्लाह! तेरी मग़फिरत मेरे गुनाहों से बहुत ज्यादा वसी है और मैं अपने अमल से ज़्यादा तेरी रहमत का उम्मीदवर हूं" तीन मर्तबा कहने से गुनाह माफ _,*
*❉⇨ हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि एक शख़्स रसूलुल्लाह ﷺ की खिदमत में हाज़िर हुआ और कहने लगा- "हाय मेरे गुनाह! हाय मेरे गुनाह! उसने ये दो या तीन मर्तबा कहा, रसूलुल्लाह ﷺ ने उससे कहा, कहो:-*
*"_अल्लाहुम्मा मग़फिरतुका अव सऊ मिन ज़ुनुबी व रहमतुका अरजा इन्दी मिन अमली,*
*(तर्जुमा):- ऐ अल्लाह ! तेरी मग़फिरत मेरे गुनाहों से बहुत ज्यादा वसी है और मैं अपने अमल से ज़्यादा तेरी रहमत का उम्मीदवर हूं,"*
*❉_ उस शख़्स ने ये कलमात कहे, आप ﷺ ने इरशाद फरमाया, फिर कहो, उसने फिर कहा, आप ﷺ ने इरशाद फरमाया, फिर कहो, उसने तीसरी मर्तबा भी ये कलमात कहे, इसके बाद आप ﷺ ने इरशाद फरमाया, ''उठ जाओ, अल्लाह तआला ने तुम्हारी मग़फिरत फरमाया दी,”*
*📚 मुस्तदरक हाकिम, 1/543,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝80 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ नदामत के साथ अपने गुनाह का इकरार कीजिए और माफ़ी मांगिए, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि मैने रसूलुल्लाह ﷺ को इरशाद फरमाते हुए सुना:-*
*'"_कोई बंदा जब गुनाह कर लेता फिर (नादिम हो कर) कहता है: मेरे रब! मैं तो गुनाह कर बैठा अब तू मुझे माफ फरमा दे, तो अल्लाह तआला फरिश्तो के सामने फरमाता है, "क्या मेरा ये बंदा ये जानता है कि उसका कोई रब है जो गुनाहों को माफ करता है और उन पर पकड़ भी कर सकता है,?( सुन लो) मैंने अपने बंदे की मग़फिरत कर दी,"*
*❉_फिर वो बंदा जब तक अल्लाह चाहे गुनाह से रुका रहता है, फिर कोई गुनाह कर बैठता है तो (नादिम होकर) कहता है, ''मेरे रब! मैं तो एक और गुनाह कर बैठा तू इसको भी माफ़ कर दे, तो अल्लाह तआला फरिश्तों के सामने फरमाता है - क्या मेरा यह बंदा यह जानता है कि उसका कोई रब है जो गुनाहों को माफ़ करता है और उन पर पकड़ भी कर सकता है? (सुन लो) मैंने अपने बंदे की मग़फिरत कर दी, ''फिर वो बंदा जब तक अल्लाह तआला चाहे गुनाह से रुका रहता है,*
*❉_ इसके बाद फिर कोई गुनाह कर बैठता है तो (नादिम होकर) कहता है, "मेरे रब! मैं तो एक और गुनाह कर बैठा तू इसको भी माफ कर दे," तो अल्लाह तआला फरिश्तों के सामने फरमाता है, "क्या मेरा ये बंदा जानता है कि उसका कोई रब है जो गुनाहों को माफ करता है और उन पर पकड़ भी कर सकता है? (सुन लो) मैंने अपने बंदे की तीसरी मर्तबा भी मगफिरत कर दी, बंदा जो चाहे करे,"*
*📚 बुखारी,,2/1117,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝81 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ आपके गुनाह आसमान की बुलंदी तक पहुंच जाए, तो माफ़ी मांगेंगे, गुनाह माफ़_,*
*❉ ⇨ हज़रत अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_अल्लाह तआला इरशाद फरमाता है, ऐ आदम के बेटे! बेशक़ तू जब तक मुझसे दुआ मांगता रहेगा और (मग़फिरत की) उम्मीद रखेगा, मैं तुझको माफ करता रहूंगा, चाहे कितने ही गुनाह क्यों न हो और मुझको इसकी परवाह ना होगी, यानि तू चाहे कितना ही बड़ा गुनाहगार हो तुझे माफ़ करना मेरे नज़दीक कोई बड़ी बात नहीं है,*
*❉ आदम के बेटे ! अगर तेरे गुनाह आसमान की बुलंदियों तक भी पहुंच जाए फिर तू मुझसे बख़्शीश चाहे तो मैं तुझको बख़्श दूंगा और मुझको इसकी परवाह नहीं होगी,”*
*📚 तिर्मिज़ी, 2/193,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝82 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जुमे की रात में हामीम अद दुख़ान पढिये, गुनाह माफ,*
*❉⇨ हज़रत अबु हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ जिस शख़्स ने हामीम अद दुख़ान को शबे जुमा में पढ़ा तो उसकी मग़फिरत कर दी जाएगी,"*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 1/581,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝83 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जो मग़फिरत ए ख़ुदावंदी पर कामिल यक़ीन रखता है, उसके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨अल्लाह जल जलालहु ने इरशाद फरमाया-*
*"_जिस आदमी ने ये यक़ीन कर लिया कि मैं गुनाहों की मग़फिरत पर का़दिर हूं तो मैं उसकी मग़फिरत कर दूंगा, मुझे कोई परवाह नहीं जब तक वो मेरे साथ शिर्क ना करे,"*
*📚 जामिआ तिर्मिज़ी, 2/72,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝84 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ कसरत से इस्तग़फ़र करते रहो, हर तंगी से निजात और क़यामत के दिन मसर्रत होगी_,*
*❉⇨"जो शख्स इस्तग़फार में लगा रहेगा यानि जो शख्स कसरत से इस्तग़फार पढ़ेगा, अल्लाह तआला उसके लिए हर तंगी से निकलने का रास्ता बना देगा_"*
*📚अबू दाऊद, नसाई, इब्ने माजा, इब्ने हिबान अन इब्ने अब्बास -1/213)*
*❉⇨"जो शख़्स ये चाहता है कि (क़यामत के दिन) उसका नामा आमाल उसको ख़ुश करे तो कसरत से इस्तग़फ़ार करे _,*
*📚 तिबरानी,, 1/465,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝85 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ अल्लाह तआला ने क़सम खाई है कि बंदे जब तक इस्तग़फ़र करते रहेंगे, अल्लाह तआला माफ़ फरमाता रहेगा_,*
*❉⇨ इबलीस ने अपने रब से कहा- "तेरी इज़्ज़त और जलाल की क़सम! जब तक बनी आदम में रूह रहेगी मैं उनको गुमराह करता रहूंगा,"*
*"_हक़ तआला शान्ह ने उससे फरमाया, "मेरी इज़्ज़त और जलाल की क़सम! जब तक वो मुझसे मगफिरत तलब करते रहेंगे, मैं भी उनको मुसलसल माफ़ करता रहूँगा,"*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 1/481,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝86 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_तौबा का दरवाज़ा खटखटाइये, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त का पाक इरशाद है कि ''मुझसे बढ़कर कौन सखी़ है, बंदों की ख्वाबगाहों में हिफाज़त करता हूं गोया उन्होंने मेरी नाफरमानी नहीं की, और ये मेरा करम है कि तौबा करने वाले की तौबा कुबूल करता हूं, हत्ताकि वो तौबा ही करता रहता है,*
*"_ वो कौन है जिसने मेरा दरवाज़ा खटखटाया और मैंने उसके लिए दरवाज़ा ना खोला हो ? कौन है जिसने मुझसे मांगा हो और मैंने उसको ना दिया हो ? क्या मैं बख़ील हूं कि बंदा मुझको बुख्ल की तरफ मंसूब करता है?"*
*📚 कन्ज़ुल उम्माल- 4/229,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝87 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ रब्बिग़फिरली कह दीजिए, आपके गुमाह माफ़ _,*
*❉⇨ बंदा अर्ज़ करता है- “ए रब! मुझे माफ़ कर दे तहकी़क़ कि मै गुनाह कर बैठा,”*
*"_ फ़रिश्ते अर्ज़ करते हैं, ”ए बारी तआला ये इसका (मगफिरत का) अहल नहीं है,"*
*"_ हक़ तआला शान्हु इरशाद फ़रमाते हैं,”लेकिन मै तो इस बात का अहल हूँ कि उसकी मगफिरत कर दूँ, ”*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 1/480,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝88 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जिसको इस्तग़फार की तोफीक़ मिल गई, उसके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ जिसको 4 चीज़ें मिल गई हैं वो 4 चीज़ों से मेहरूम नहीं रहा:-*
*1- जिसको दुआ मिल गई वो कुबूलियत से महरूम नहीं रहा, इसलिए कि अल्लाह तआला फरमाते हैं, ”मुझसे दुआ मांगो, मैं तुम्हारी दुआ कुबूल करूंगा,”*
*2- जिसको शुक्र मिल गया वो ज़्यादती से मेहरूम नहीं रहा, इसलिए कि अल्लाह तआला फरमाते हैं, ”अगर तुम शुक्र करोगे तो फिर मैं तुम्हारी नियामतों में इज़ाफ़ा करूंगा,”*
*3- जिसको इस्तग़फार मिल गया वो मग़फिरत से मेहरूम नहीं रहा, इसलिए कि अल्लाह तआला इरशाद फरमाते हैं, ”अपने रब से बख्शीश चाहो वो बहुत माफ़ करने वाला है,*
*4- जिसको तौबा मिल गई वो कुबूलियत से मेहरूम नहीं रहा, इसलिए कि अल्लाह तआला इरशाद फरमाते हैं, ”अल्लाह तआला वो है जो अपने बंदों की तौबा कुबूल करता है”*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 15/874,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝89 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ हर नमाज़ से पहले 10 मर्तबा इस्तगफ़ार कीजिए, गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत उम्मे र'आफ़े रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_जब तुम नमाज़ के लिए खड़े हो तो 10 मर्तबा सुब्हानल्लाह कहो और 10 मर्तबा ला इलाहा इल्लल्लाह कहो और 10 मरतबा अस्तगफ़िरुल्लाह कहो,*
*❉_ सुब्हानल्लाह के जवाब में हक़ तआला शान्हु फ़रमाते हैं ये मेरे लिए है और जब तुमने ला इलाहा इल्लल्लाह कहा तो हक़ तआला शान्हु इरशाद फ़रमाते हैं ये मेरे लिए है और जब तुमने अस्तग़फिरुल्लाह कहा तो हक़ तआला शान्हु इरशाद फरमाते हैं मैंने तुम्हारी मग़फिरत कर दी,”*
*(10 मर्तबा अस्तगफिरुल्लाह कहने पर जवाब में 10 मर्तबा इरशाद होता है मैंने तेरी मग़फिरत कर दी)*
*📚 कंजुल उम्माल- 7/531,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ नदामत के साथ अपने गुनाह का इकरार कीजिए और माफ़ी मांगिए, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि मैने रसूलुल्लाह ﷺ को इरशाद फरमाते हुए सुना:-*
*'"_कोई बंदा जब गुनाह कर लेता फिर (नादिम हो कर) कहता है: मेरे रब! मैं तो गुनाह कर बैठा अब तू मुझे माफ फरमा दे, तो अल्लाह तआला फरिश्तो के सामने फरमाता है, "क्या मेरा ये बंदा ये जानता है कि उसका कोई रब है जो गुनाहों को माफ करता है और उन पर पकड़ भी कर सकता है,?( सुन लो) मैंने अपने बंदे की मग़फिरत कर दी,"*
*❉_फिर वो बंदा जब तक अल्लाह चाहे गुनाह से रुका रहता है, फिर कोई गुनाह कर बैठता है तो (नादिम होकर) कहता है, ''मेरे रब! मैं तो एक और गुनाह कर बैठा तू इसको भी माफ़ कर दे, तो अल्लाह तआला फरिश्तों के सामने फरमाता है - क्या मेरा यह बंदा यह जानता है कि उसका कोई रब है जो गुनाहों को माफ़ करता है और उन पर पकड़ भी कर सकता है? (सुन लो) मैंने अपने बंदे की मग़फिरत कर दी, ''फिर वो बंदा जब तक अल्लाह तआला चाहे गुनाह से रुका रहता है,*
*❉_ इसके बाद फिर कोई गुनाह कर बैठता है तो (नादिम होकर) कहता है, "मेरे रब! मैं तो एक और गुनाह कर बैठा तू इसको भी माफ कर दे," तो अल्लाह तआला फरिश्तों के सामने फरमाता है, "क्या मेरा ये बंदा जानता है कि उसका कोई रब है जो गुनाहों को माफ करता है और उन पर पकड़ भी कर सकता है? (सुन लो) मैंने अपने बंदे की तीसरी मर्तबा भी मगफिरत कर दी, बंदा जो चाहे करे,"*
*📚 बुखारी,,2/1117,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝81 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ आपके गुनाह आसमान की बुलंदी तक पहुंच जाए, तो माफ़ी मांगेंगे, गुनाह माफ़_,*
*❉ ⇨ हज़रत अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_अल्लाह तआला इरशाद फरमाता है, ऐ आदम के बेटे! बेशक़ तू जब तक मुझसे दुआ मांगता रहेगा और (मग़फिरत की) उम्मीद रखेगा, मैं तुझको माफ करता रहूंगा, चाहे कितने ही गुनाह क्यों न हो और मुझको इसकी परवाह ना होगी, यानि तू चाहे कितना ही बड़ा गुनाहगार हो तुझे माफ़ करना मेरे नज़दीक कोई बड़ी बात नहीं है,*
*❉ आदम के बेटे ! अगर तेरे गुनाह आसमान की बुलंदियों तक भी पहुंच जाए फिर तू मुझसे बख़्शीश चाहे तो मैं तुझको बख़्श दूंगा और मुझको इसकी परवाह नहीं होगी,”*
*📚 तिर्मिज़ी, 2/193,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝82 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जुमे की रात में हामीम अद दुख़ान पढिये, गुनाह माफ,*
*❉⇨ हज़रत अबु हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ जिस शख़्स ने हामीम अद दुख़ान को शबे जुमा में पढ़ा तो उसकी मग़फिरत कर दी जाएगी,"*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 1/581,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝83 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जो मग़फिरत ए ख़ुदावंदी पर कामिल यक़ीन रखता है, उसके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨अल्लाह जल जलालहु ने इरशाद फरमाया-*
*"_जिस आदमी ने ये यक़ीन कर लिया कि मैं गुनाहों की मग़फिरत पर का़दिर हूं तो मैं उसकी मग़फिरत कर दूंगा, मुझे कोई परवाह नहीं जब तक वो मेरे साथ शिर्क ना करे,"*
*📚 जामिआ तिर्मिज़ी, 2/72,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝84 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ कसरत से इस्तग़फ़र करते रहो, हर तंगी से निजात और क़यामत के दिन मसर्रत होगी_,*
*❉⇨"जो शख्स इस्तग़फार में लगा रहेगा यानि जो शख्स कसरत से इस्तग़फार पढ़ेगा, अल्लाह तआला उसके लिए हर तंगी से निकलने का रास्ता बना देगा_"*
*📚अबू दाऊद, नसाई, इब्ने माजा, इब्ने हिबान अन इब्ने अब्बास -1/213)*
*❉⇨"जो शख़्स ये चाहता है कि (क़यामत के दिन) उसका नामा आमाल उसको ख़ुश करे तो कसरत से इस्तग़फ़ार करे _,*
*📚 तिबरानी,, 1/465,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝85 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ अल्लाह तआला ने क़सम खाई है कि बंदे जब तक इस्तग़फ़र करते रहेंगे, अल्लाह तआला माफ़ फरमाता रहेगा_,*
*❉⇨ इबलीस ने अपने रब से कहा- "तेरी इज़्ज़त और जलाल की क़सम! जब तक बनी आदम में रूह रहेगी मैं उनको गुमराह करता रहूंगा,"*
*"_हक़ तआला शान्ह ने उससे फरमाया, "मेरी इज़्ज़त और जलाल की क़सम! जब तक वो मुझसे मगफिरत तलब करते रहेंगे, मैं भी उनको मुसलसल माफ़ करता रहूँगा,"*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 1/481,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝86 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_तौबा का दरवाज़ा खटखटाइये, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त का पाक इरशाद है कि ''मुझसे बढ़कर कौन सखी़ है, बंदों की ख्वाबगाहों में हिफाज़त करता हूं गोया उन्होंने मेरी नाफरमानी नहीं की, और ये मेरा करम है कि तौबा करने वाले की तौबा कुबूल करता हूं, हत्ताकि वो तौबा ही करता रहता है,*
*"_ वो कौन है जिसने मेरा दरवाज़ा खटखटाया और मैंने उसके लिए दरवाज़ा ना खोला हो ? कौन है जिसने मुझसे मांगा हो और मैंने उसको ना दिया हो ? क्या मैं बख़ील हूं कि बंदा मुझको बुख्ल की तरफ मंसूब करता है?"*
*📚 कन्ज़ुल उम्माल- 4/229,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝87 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ रब्बिग़फिरली कह दीजिए, आपके गुमाह माफ़ _,*
*❉⇨ बंदा अर्ज़ करता है- “ए रब! मुझे माफ़ कर दे तहकी़क़ कि मै गुनाह कर बैठा,”*
*"_ फ़रिश्ते अर्ज़ करते हैं, ”ए बारी तआला ये इसका (मगफिरत का) अहल नहीं है,"*
*"_ हक़ तआला शान्हु इरशाद फ़रमाते हैं,”लेकिन मै तो इस बात का अहल हूँ कि उसकी मगफिरत कर दूँ, ”*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 1/480,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝88 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जिसको इस्तग़फार की तोफीक़ मिल गई, उसके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ जिसको 4 चीज़ें मिल गई हैं वो 4 चीज़ों से मेहरूम नहीं रहा:-*
*1- जिसको दुआ मिल गई वो कुबूलियत से महरूम नहीं रहा, इसलिए कि अल्लाह तआला फरमाते हैं, ”मुझसे दुआ मांगो, मैं तुम्हारी दुआ कुबूल करूंगा,”*
*2- जिसको शुक्र मिल गया वो ज़्यादती से मेहरूम नहीं रहा, इसलिए कि अल्लाह तआला फरमाते हैं, ”अगर तुम शुक्र करोगे तो फिर मैं तुम्हारी नियामतों में इज़ाफ़ा करूंगा,”*
*3- जिसको इस्तग़फार मिल गया वो मग़फिरत से मेहरूम नहीं रहा, इसलिए कि अल्लाह तआला इरशाद फरमाते हैं, ”अपने रब से बख्शीश चाहो वो बहुत माफ़ करने वाला है,*
*4- जिसको तौबा मिल गई वो कुबूलियत से मेहरूम नहीं रहा, इसलिए कि अल्लाह तआला इरशाद फरमाते हैं, ”अल्लाह तआला वो है जो अपने बंदों की तौबा कुबूल करता है”*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 15/874,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝89 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ हर नमाज़ से पहले 10 मर्तबा इस्तगफ़ार कीजिए, गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत उम्मे र'आफ़े रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_जब तुम नमाज़ के लिए खड़े हो तो 10 मर्तबा सुब्हानल्लाह कहो और 10 मर्तबा ला इलाहा इल्लल्लाह कहो और 10 मरतबा अस्तगफ़िरुल्लाह कहो,*
*❉_ सुब्हानल्लाह के जवाब में हक़ तआला शान्हु फ़रमाते हैं ये मेरे लिए है और जब तुमने ला इलाहा इल्लल्लाह कहा तो हक़ तआला शान्हु इरशाद फ़रमाते हैं ये मेरे लिए है और जब तुमने अस्तग़फिरुल्लाह कहा तो हक़ तआला शान्हु इरशाद फरमाते हैं मैंने तुम्हारी मग़फिरत कर दी,”*
*(10 मर्तबा अस्तगफिरुल्लाह कहने पर जवाब में 10 मर्तबा इरशाद होता है मैंने तेरी मग़फिरत कर दी)*
*📚 कंजुल उम्माल- 7/531,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝90 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ शबे बारात में माफ़ी मांगिए, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अली करमुल्लाहु वजहु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_जब शाबान की 15वीं रात आए तो इस रात में अल्लाह के हुज़ूर नवाफ़िल पढ़ो, इस दिन को रोज़ा रखो क्योंकि इस रात गुरुबे आफ़ताब होते ही अल्लाह तआला की खास तजल्ली और रहमत पहले आसमान पर उतरती है और वो इरशाद फ़रमाता है, ”हे कोई बंदा जो मुझसे बख्शीश और मग़फिरत तलब करे और मैं उसकी मगफिरत का फ़ैसला करूँ, कोई बंदा है जो रोज़ी मांगें और मैं उसको रोज़ी देने का फ़ैसला करूँ, कोई मुब्तिला ए मुसीबत बंदा है जो मुझसे सेहत और आफ़ियत का सवाल करे और मैं उसको आफ़ियत अता करु,”*
*❉_ इस तरह मुख़्तलिफ़ क़िस्म के हाजत मन्दों को अल्लाह पुकारता है कि वो इस वक़्त मुझसे अपनी हाजतें माँगें और मैं अता हूँ, गुरूब आफ़ताब से ले कर सुबह सादिक़ तक अल्लाह तआला की रहमत इसी तरह अपने बंदों को पुकारती रहती है,”*
*📚 रवाह इब्ने माजा कज़ाफ़िल तरगीब- 2/119,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝91 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ हर नमाज़ के बाद "अस्तगफिरुल्लाह वा अतुबु इलैहि" कहें, सारे गुनाह माफ_,*
*❉ _हजरत बरा बिन आज़िब रजियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया-*
*"_ जो शख़्स हर नमाज़ के बाद "अस्तगफिरुल्लाह वा अतुबु इलैहि" पढ़ा करे तो उसकी मग़फिरत कर दी जाएगी ख्वाह वो मैदाने जंग से भाग कर ही क्यों ना आया हो _,*
*📚 रवाह तिबरानी, तरगीब- 2/454,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝92 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ बंदों की बीमारी गुनाह और उसका इलाज इस्तग़फ़ार है _,,*
*❉⇨ हज़रत अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ क्या मैं तुमको तुम्हारे मर्ज़ और तुम्हारी दवा के बारे में ना बताऊं? गौर से सुनो! तुम्हारा मर्ज़ गुनाह है और तुम्हारी दवा इस्तगफ़र है,"*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 1/479,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝93 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_जिसका दिल अल्लाह के रास्ते में कपकपाया, उसके गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत सलमान रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_जब मुसलमान का दिल अल्लाह के रास्ते में कपकपाने लगे तो उसकी खताएं ऐसी झड़ती हैं जैसे खजूर के खोशे (तेज़ हवा के चलने से) गिर जाते हैं _,*
*📚कन्ज़ुल उम्माल- 4/280,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝94 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जो लोग सिर्फ रज़ा ए इलाही के लिए अल्लाह को याद करते हैं, उनके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि जो भी क़ौम जमा हो कर अल्लाह का ज़िक्र करती है और मक़सूद अल्लाह की रज़ा ही होता है तो आसमान से एक फ़रिश्ता निदा करता है:-*
*"_ खड़े़ हो जाओ तुम्हारी मग़फिरत कर दी गई और तुम्हारी बुराइयों को नेकियों से तबदील कर दिया गया _,*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 9/133,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝95 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ नियामत मिलने पर अल्लाह की बार-बार तारीफ कीजिए, गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत जाबिर रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_अल्लाह जल जलालहु अपने बंदे को कोई नियामत अता फरमाते हैं फिर बंदा अल्लाह की तारीफ करता है (अल्हम्दुलिल्लाह) तो उसने उस नियामत का शुक्र अदा कर दिया,*
*❉⇨फिर अगर दूसरी मर्तबा "अल्हम्दुलिल्लाह" कहे तो अल्लाह तआला उसके सवाब की तजदीद फरमा देते हैं, फिर अगर तीसरी मर्तबा "अलहम्दुलिल्लाह" कहे तो अल्लाह तआला उसके गुनाहों की मग़फिरत फरमा देते हैं,"*
*📚 रवाह हाकिम व सहीह तरगीब- 2/427, कन्ज़ुल उम्माल- 3/253,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝96 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ ग़ाफ़िलीन के मजमे में अल्लाह को याद कीजिये, सारे गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ ग़ाफ़िलीन के मजमा में अल्लाह का ज़िक्र करने वाला उस सरसब्ज़ दरख्त की तरह है जो सूखे दरख्तो में हो, ग़ाफ़िल लोगो में अल्लाह का ज़िक्र करने वाला उस चिराग की तरह है जो अँधेरे घर में रखा हुआ हो, और ग़ाफ़िल लोगो के मजमा में अल्लाह तआला का ज़िक्र करने वाले को अल्लाह त'आला उसकी जिंदगी में ही जन्नत में उसका ठिकाना दिखा देंगे, हर इंसान और जानवर की तादाद के मुवाफिक अल्लाह तआला उसकी मग़फिरत फरमाएंगे,*
*❉_ और गाफ़िलीन में अल्लाह तआला का ज़िक्र करने वाले की तरफ़ हक़ तआला शान्हु ऐसी नज़र से देखेंगे कि कभी भी उसको अज़ाब नहीं देंगे, बाज़ार में अल्लाह तआला का ज़िक्र करने वाले के लिए उसके हर बाल के बदले क़यामत के दिन नूर होंगे_,"*
*📚 रवाह बेहक़ी फ़ि शोअब कज़ा फिल तरगीब-2/532,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝97 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _मय्यत को गुस्ल दीजिए और उसके उयूब छिपाइए, आपके 40 कबीरा गुनाह माफ़ और क़ब्र खोदने का सवाब _*
*❉⇨ हज़रत अबू राफ़े रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*"_जो शख़्स मय्यत को गुस्ल देता है और उसके सतर को और अगर कोई ऐब पाये तो उसको छुपाता है तो अल्लाह तआला उसके 40 बड़े गुनाह माफ़ फरमा देता है,*
*❉_ और जो अपने भाई की (मय्यत) के लिए क़ब्र खोदता है और उसको उसमें दफ़न करता है तो गोया उसने (क़यामत के दिन) दोबारा जिंदा उठाया जाने तक उसको एक मकान में ठहरा दिया यानि उसको इस क़दर अजर् मिलता है जितना कि उस शख़्स के लिए कयामत तक मकान देने का अजर् मिलता,"*
*📚 तिबरानी, मजमाउज़ ज़वाइद-3/114,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝98 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ मरहूम की तारीफ कीजिए, मरहूम के गुनाह माफ_,*
*❉⇨ जब लोग किसी की नमाजे़ जनाज़ा पढ़ ले और मय्यत के बारे मे कलमाते खैर कहे तो हक़ तआला शान्हु इरशाद फरमाते हैं-*
*"इनकी गवाही को इनके इल्म के मुताबिक़ नाफ़िज़ किया और जो ये नहीं जानते उसकी भी मग़फिरत करता हूं,"*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 15/583,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝99 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ दो पड़ोसी गवाही दे कि मरहूम भला आदमी था, मरहूम के गुनाह माफ़_,*
*❉⇨जब बंदा ए मोमिन इन्तेक़ाल कर जाए और उसके दो पड़ोसी ये कह दें कि ये शख़्स बड़ा भला था इसके अलावा हम कुछ नहीं जानते, हालांकी वो इल्मे ख़ुदावंदी में इसके बर अक्स था तो हक़ तआला शान्हु फरिश्तों से इरशाद फरमाते हैं-*
*❉⇨मेरे बंदे के बारे में मेरे बंदे की गवाही कुबूल कर लो, मेरे इल्म के मुताबिक़ ये जेसा भी था उससे दरगुज़र करो,"*
*📚_ कंजुल उम्माल- 15/685,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝100 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ जिसकी नमाज़े जनाज़ा 100 आदमियों ने पढ़ी, उसके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत इब्ने उमर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_जिस मय्यत की 100 आदमियों ने नमाजे़ जनाज़ा पढ़ ली अल्लाह तआला उस मय्यत की मगफिरत फरमा देते हैं,"*
*📚 तिबरानी व तरगी़ब- 4/343, तिर्मिज़ी, 1/122,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝101 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ मुसलमानों की तीन सफ़ो ने जिसकी नमाज़ ए जनाज़ा पढ़ी, उसके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत मालिक बिन हुबैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_जो मुसलमान इन्तेक़ाल कर जाए और उसकी नमाज़े जनाज़ा में मुसलमानो की तीन सफें हों तो मगफिरत या जन्नत वाजिब हो जाती है,"*
*❉_और हज़रत मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु जब किसी जनाज़े में शरीक होते तो तीन सफें बनाते इस हदीस पर अमल करने की वजह से,*
*📚 तिर्मिज़ी कज़ाफ़िल तरगीब- 4/343, अबू दाऊद- 2/451,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ शबे बारात में माफ़ी मांगिए, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अली करमुल्लाहु वजहु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_जब शाबान की 15वीं रात आए तो इस रात में अल्लाह के हुज़ूर नवाफ़िल पढ़ो, इस दिन को रोज़ा रखो क्योंकि इस रात गुरुबे आफ़ताब होते ही अल्लाह तआला की खास तजल्ली और रहमत पहले आसमान पर उतरती है और वो इरशाद फ़रमाता है, ”हे कोई बंदा जो मुझसे बख्शीश और मग़फिरत तलब करे और मैं उसकी मगफिरत का फ़ैसला करूँ, कोई बंदा है जो रोज़ी मांगें और मैं उसको रोज़ी देने का फ़ैसला करूँ, कोई मुब्तिला ए मुसीबत बंदा है जो मुझसे सेहत और आफ़ियत का सवाल करे और मैं उसको आफ़ियत अता करु,”*
*❉_ इस तरह मुख़्तलिफ़ क़िस्म के हाजत मन्दों को अल्लाह पुकारता है कि वो इस वक़्त मुझसे अपनी हाजतें माँगें और मैं अता हूँ, गुरूब आफ़ताब से ले कर सुबह सादिक़ तक अल्लाह तआला की रहमत इसी तरह अपने बंदों को पुकारती रहती है,”*
*📚 रवाह इब्ने माजा कज़ाफ़िल तरगीब- 2/119,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝91 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ हर नमाज़ के बाद "अस्तगफिरुल्लाह वा अतुबु इलैहि" कहें, सारे गुनाह माफ_,*
*❉ _हजरत बरा बिन आज़िब रजियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया-*
*"_ जो शख़्स हर नमाज़ के बाद "अस्तगफिरुल्लाह वा अतुबु इलैहि" पढ़ा करे तो उसकी मग़फिरत कर दी जाएगी ख्वाह वो मैदाने जंग से भाग कर ही क्यों ना आया हो _,*
*📚 रवाह तिबरानी, तरगीब- 2/454,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝92 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ बंदों की बीमारी गुनाह और उसका इलाज इस्तग़फ़ार है _,,*
*❉⇨ हज़रत अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ क्या मैं तुमको तुम्हारे मर्ज़ और तुम्हारी दवा के बारे में ना बताऊं? गौर से सुनो! तुम्हारा मर्ज़ गुनाह है और तुम्हारी दवा इस्तगफ़र है,"*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 1/479,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝93 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_जिसका दिल अल्लाह के रास्ते में कपकपाया, उसके गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत सलमान रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_जब मुसलमान का दिल अल्लाह के रास्ते में कपकपाने लगे तो उसकी खताएं ऐसी झड़ती हैं जैसे खजूर के खोशे (तेज़ हवा के चलने से) गिर जाते हैं _,*
*📚कन्ज़ुल उम्माल- 4/280,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝94 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जो लोग सिर्फ रज़ा ए इलाही के लिए अल्लाह को याद करते हैं, उनके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि जो भी क़ौम जमा हो कर अल्लाह का ज़िक्र करती है और मक़सूद अल्लाह की रज़ा ही होता है तो आसमान से एक फ़रिश्ता निदा करता है:-*
*"_ खड़े़ हो जाओ तुम्हारी मग़फिरत कर दी गई और तुम्हारी बुराइयों को नेकियों से तबदील कर दिया गया _,*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 9/133,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝95 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ नियामत मिलने पर अल्लाह की बार-बार तारीफ कीजिए, गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत जाबिर रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_अल्लाह जल जलालहु अपने बंदे को कोई नियामत अता फरमाते हैं फिर बंदा अल्लाह की तारीफ करता है (अल्हम्दुलिल्लाह) तो उसने उस नियामत का शुक्र अदा कर दिया,*
*❉⇨फिर अगर दूसरी मर्तबा "अल्हम्दुलिल्लाह" कहे तो अल्लाह तआला उसके सवाब की तजदीद फरमा देते हैं, फिर अगर तीसरी मर्तबा "अलहम्दुलिल्लाह" कहे तो अल्लाह तआला उसके गुनाहों की मग़फिरत फरमा देते हैं,"*
*📚 रवाह हाकिम व सहीह तरगीब- 2/427, कन्ज़ुल उम्माल- 3/253,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝96 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ ग़ाफ़िलीन के मजमे में अल्लाह को याद कीजिये, सारे गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ ग़ाफ़िलीन के मजमा में अल्लाह का ज़िक्र करने वाला उस सरसब्ज़ दरख्त की तरह है जो सूखे दरख्तो में हो, ग़ाफ़िल लोगो में अल्लाह का ज़िक्र करने वाला उस चिराग की तरह है जो अँधेरे घर में रखा हुआ हो, और ग़ाफ़िल लोगो के मजमा में अल्लाह तआला का ज़िक्र करने वाले को अल्लाह त'आला उसकी जिंदगी में ही जन्नत में उसका ठिकाना दिखा देंगे, हर इंसान और जानवर की तादाद के मुवाफिक अल्लाह तआला उसकी मग़फिरत फरमाएंगे,*
*❉_ और गाफ़िलीन में अल्लाह तआला का ज़िक्र करने वाले की तरफ़ हक़ तआला शान्हु ऐसी नज़र से देखेंगे कि कभी भी उसको अज़ाब नहीं देंगे, बाज़ार में अल्लाह तआला का ज़िक्र करने वाले के लिए उसके हर बाल के बदले क़यामत के दिन नूर होंगे_,"*
*📚 रवाह बेहक़ी फ़ि शोअब कज़ा फिल तरगीब-2/532,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝97 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _मय्यत को गुस्ल दीजिए और उसके उयूब छिपाइए, आपके 40 कबीरा गुनाह माफ़ और क़ब्र खोदने का सवाब _*
*❉⇨ हज़रत अबू राफ़े रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*"_जो शख़्स मय्यत को गुस्ल देता है और उसके सतर को और अगर कोई ऐब पाये तो उसको छुपाता है तो अल्लाह तआला उसके 40 बड़े गुनाह माफ़ फरमा देता है,*
*❉_ और जो अपने भाई की (मय्यत) के लिए क़ब्र खोदता है और उसको उसमें दफ़न करता है तो गोया उसने (क़यामत के दिन) दोबारा जिंदा उठाया जाने तक उसको एक मकान में ठहरा दिया यानि उसको इस क़दर अजर् मिलता है जितना कि उस शख़्स के लिए कयामत तक मकान देने का अजर् मिलता,"*
*📚 तिबरानी, मजमाउज़ ज़वाइद-3/114,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝98 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ मरहूम की तारीफ कीजिए, मरहूम के गुनाह माफ_,*
*❉⇨ जब लोग किसी की नमाजे़ जनाज़ा पढ़ ले और मय्यत के बारे मे कलमाते खैर कहे तो हक़ तआला शान्हु इरशाद फरमाते हैं-*
*"इनकी गवाही को इनके इल्म के मुताबिक़ नाफ़िज़ किया और जो ये नहीं जानते उसकी भी मग़फिरत करता हूं,"*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 15/583,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝99 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ दो पड़ोसी गवाही दे कि मरहूम भला आदमी था, मरहूम के गुनाह माफ़_,*
*❉⇨जब बंदा ए मोमिन इन्तेक़ाल कर जाए और उसके दो पड़ोसी ये कह दें कि ये शख़्स बड़ा भला था इसके अलावा हम कुछ नहीं जानते, हालांकी वो इल्मे ख़ुदावंदी में इसके बर अक्स था तो हक़ तआला शान्हु फरिश्तों से इरशाद फरमाते हैं-*
*❉⇨मेरे बंदे के बारे में मेरे बंदे की गवाही कुबूल कर लो, मेरे इल्म के मुताबिक़ ये जेसा भी था उससे दरगुज़र करो,"*
*📚_ कंजुल उम्माल- 15/685,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝100 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ जिसकी नमाज़े जनाज़ा 100 आदमियों ने पढ़ी, उसके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत इब्ने उमर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_जिस मय्यत की 100 आदमियों ने नमाजे़ जनाज़ा पढ़ ली अल्लाह तआला उस मय्यत की मगफिरत फरमा देते हैं,"*
*📚 तिबरानी व तरगी़ब- 4/343, तिर्मिज़ी, 1/122,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝101 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ मुसलमानों की तीन सफ़ो ने जिसकी नमाज़ ए जनाज़ा पढ़ी, उसके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत मालिक बिन हुबैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_जो मुसलमान इन्तेक़ाल कर जाए और उसकी नमाज़े जनाज़ा में मुसलमानो की तीन सफें हों तो मगफिरत या जन्नत वाजिब हो जाती है,"*
*❉_और हज़रत मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु जब किसी जनाज़े में शरीक होते तो तीन सफें बनाते इस हदीस पर अमल करने की वजह से,*
*📚 तिर्मिज़ी कज़ाफ़िल तरगीब- 4/343, अबू दाऊद- 2/451,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝102 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ मरहूम के लिए मग़फिरत की दुआ कीजिए, मरहूम के गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_अल्लाह तआला की तरफ से जन्नत में किसी मर्दे सालेह का दर्जा एक दम बुलंद कर दिया जाता है तो वो जन्नती बंदा पूछता है कि - ए परवरदिगार ! मेरे दर्जा और मर्तबा में तरक्की़ किस वजह से और कहां से हुई?*
*"_जवाब मिलता है तेरे वास्ते तेरी फलां औलाद की दुआ ए मग़फिरत करने की वजह से,"*
*❉_इमाम बैहकी ने अल्फ़ाज़ हदीस यूं नक़ल किए हैं कि, "तेरे बेटे की दुआ की वजह से,"*
*📚 मुसनद अहमद- 2/509, इब्ने माजा किताबुल अदब- 260,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝103 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_जिसने हर जुमा को अपने मां बाप या उनमें से एक की क़ब्र की ज़ियारत की, उसके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ जो शख़्स जुमा के दिन अपने वाल्देन या उनमें से किसी एक की क़ब्र की ज़ियारत करे तो उसकी मग़फिरत कर दी जाएगी, और उसको फ़रमाबरदार लिखा जाएगा_,"*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 17/468,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝104 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞__ तमाम मोमिनीन के लिए दुआ ए मग़फिरत कीजिए, हर मोमिन के इवज़ एक नेकी लिखी जाएगी_,*
*❉⇨ रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_जो कोई शख़्स मोमिन मर्द और मोमिन औरत के लिए मग़फिरत तलब करता है अल्लाह तआला उसके लिए हर मोमिन मर्द और मोमिन औरत के एवज़ एक नेकी लिख देते हैं,"*
*📚 तिबरानी, कंज़ुल उम्माल- 1/375,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝105 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_तमाम मोमिनीन के लिए हर रोज़ 27 मरतबा मग़फिरत की दुआ कीजिए, आप मुस्तजाबुद दावात बन जायेंगे _,*
*❉⇨जो शख़्स हर रोज़ मोमिन मर्दों और मोमिन औरतों के लिए 27 बार मग़फिरत तलब करेगा तो उसका शुमार उन लोगों में होगा जिनकी दुआ कुबूल होती है और जिनकी वजह से अहले ज़मीन को रिज़्क मिलता है,"*
*📚 तिबरानी, कंज़ुल उम्माल- 1/486,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝106 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जो जनाज़े के पीछे चला उसके गुनाह माफ़_,*
*❉ ⇨ हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"बंदा ए मोमिन को उसकी मौत के बाद सबसे पहली जो जजा़ दी जाती है वो ये है कि उसके जनाजे़ के पीछे चलने वाले तमाम अफ़राद की मगफिरत कर दी जाती है"*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 15/588,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝107 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जो वसीयत कर के फ़ौत हुआ उसके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ जिसने वसीयत की हालत में इंतकाल किया (यानि इस हालत में जिसका इंतकाल हुआ कि अपनी मालियात और मामलात वगेरा के बारे में जो वसीयत उसको करनी चाहिए थी वो उसने की और सही की) तो उसका इंतकाल ठीक रास्ते पर और शरीयत पर चलते हुए हुआ और उसकी मौत तक़वा और शहादत वाली मौत हुई और उसकी मग़फिरत हो गई,"*
*📚 रवाह इब्ने माजा कज़ाफिल तरगीब- 4/426, इब्ने माजा,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝108 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ आपस में मुहब्बत रखने वाले बंदे जब मिलें, दरूद शरीफ पढ़ें गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"नहीं है दो बंदे जो आपस में मुहब्बत रखते हों उनमें कोई एक जब अपने साथी के सामने आए और हुजूर ﷺ पर दोनों दरूद भेजें तो जुदा होने से पहले उन दोनों के आइंदा और गुज़िश्ता गुनाहों की मग़फिरत कर दी जाएगी,"*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 9/135,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝109 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ ☞ _ हुज़ूर ﷺ पर एक मर्तबा दरूद भेजिये, 10 गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_जो शख़्स मुझ पर एक मर्तबा दरूद शरीफ़ भेजता है अल्लाह तआला उस पर 10 रहमतें नाजिल फ़रमाते हैं, 10 गुनाहों को माफ़ फ़रमाते हैं और इसकी वजह से उसके 10 दर्जात बुलंद फ़रमाते हैं,"*
*📚 तरगीब-2/494, रवाह अहमद, नसाई, इब्ने हिबान, हाकिम,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝110 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_लिखा हुआ दरूद शरीफ जब तक बाक़ी रहता है फरिश्ते दुआ ए मग़फिरत करते रहते हैं _,*
*❉ ⇨ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_जिस शख़्स ने किसी किताब में मुझ पर दरूद शरीफ़ लिखा तो जब तक मेरा नाम उस किताब में बाक़ी रहेगा फ़रिश्ते उसके लिए मुसलसल दुआ ए मग़फिरत करते रहेंगे,"*
*📚 रवाह तिबरानी कज़ाफिल तरगीब- 1/111, कंज़ुल उम्माल- 1/507,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝111 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ अपने माल की ज़कात निकालिए, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि क़बीला बनू तमीम का एक आदमी हुज़ूर ﷺ की खिदमत में हाज़िर हुआ और अर्ज़ किया-*
*"_ या रसूलल्लाह! मैं बहुत मालदार आदमी हूं और अयालदार भी हूं (खूब वुसअत रखता हूं जी खोलकर खर्च कर सकता हूं) तो आप मुझे बताएं कि कैसे करूं? और किस तरह खर्च करूं?*
*❉_आप रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_अपने माल की ज़कात ऐसी पाकी है कि तुझको मा'सी और गुनाहों से पाक कर देगी, क़रीबी रिश्तेदारों से सिलह रहमी कर, मिस्कीन और पड़ौसियों और सा'इल का हक़ पहचान,"*
*📚मुसनद अहमद-3/136,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝112 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_सदका़ खैरात किया करो, गुनाह माफ _,*
*❉ ⇨ हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि उन्होंने सुना कि रसूलुल्लाह ﷺ काब बिन अजराह से फरमा रहे हैं-*
*"_ ए काब बिन अजराह! नमाज़ अल्लाह के क़ुर्ब का ज़रिया है और रोज़ा ढाल है और सदका़ गुनाहों को इस तरह बुझा देता है जिस तरह पानी आग को बुझा देता है_,*
*"_ए काब बिन अजराह! लोग सुबह करते हैं, कुछ तो अपनी जान को बेचने वाले हैं, पस वो अपनी गर्दन को बांधने वाले हैं और कुछ लोग अपने नफ्स को खरीदने वाले हैं पस वो अपनी गर्दन को आज़ाद करने वाले हैं _,*
*📚 रवाह अबू याअला बा सनद सहीह व अखरजा इब्ने हिबान,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝113 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ सदका़ ए फितर् ईद से पहले अदा कीजिए, गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_सदका़ ए फितर् रोजा़दार को बेकरार और फहश बातों से पाक कर देता है (जो हालते रोज़े में उससे सरज़द हो गई थी) और गुरबा मसाकीन के खाने की दावत है, जिसने इसको नमाज़ ए ईद से पहले अदा कर दिया तो बहुत ही मक़बूल है और जिसने इसको नमाज़ (ईद) के बाद अदा किया तो ये बाक़ी सदका़ की तरह एक सदका़ है,'' (यानि सवाब में कुछ कमी आ जाती है),*
*📚अबू दाऊद, 1/227,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝114 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ ताजिर हज़रात सदका़ खैरात किया करें, लग्व बातों का गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत क़ैस बिन गरज़ाह रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ ए ए सौदागारो ! ख़रीद फ़रोख़्त में लग्व और बे फ़ायदा बाते भी हो जाती है और क़सम भी खाई जाती है तो (इसके इलाज और कफ़्फ़ारे के लिए) इसके साथ सदक़ा भी मिला दिया करो,"*
*📚अबू दाऊद 2/474,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝115 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ रमज़ान में ग़लत काम न कीजिए, रोज़ा रखिए और अच्छे काम कीजिए, गुनाह माफ़_,*
*❉ ⇨ हज़रत अबू सईद रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ जिस बंदे ने रमज़ान का रोज़ा रखा और उसके हुदूद की पहचान हासिल की, जिन उमूर की रिआयत ज़रूरी है उसकी रिआयत की तो उसके तमाम गुज़िश्ता गुनाहों की मग़फिरत कर दी जाएगी,"*
*📚 तरगीब -2/91, कंज़ुल उम्माल- 8/481,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝116 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ रमज़ान में दर्ज़े ज़ैल काम कीजिए, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨हजरत अबू सईद खुदरी रजियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_रमजानुल मुबारक का महीना मेरी उम्मत का महीना है, जब मुसलमान ने रोज़ा रखा न उसने झूठ बोला और न किसी की गी़बत की और हलाल रिज़्क से अफ्तार किया, अंधेरी रात में फजर और इशा की नमाज़ में जाने की सई करता रहा और अपने बाक़ी फराइज़ की हिफाज़त करता रहा तो अपने गुनाहों से ऐसा निकल जाएगा जेसे सांप अपनी केंचुली से निकल जाता है _,*
*📚 रवाह अबू शेख कज़ाफिल तरगीब- 2/102,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝117 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ रोज़ा रखने और सदका़ ए फित्र अदा करने वाले के गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत अबु हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ जिसने रमज़ानुल मुबारक के रोज़े रखे और ईद के दिन गुस्ल कर के ईदगाह की तरफ गया और रमज़ानुल मुबारक को सदका़ ए फ़ित्र पर ख़त्म किया तो ईदगाह से इस हाल में लौटेगा कि उसकी मग़फिरत हो चुकी होगी_"*
*📚 रवाह तिबरानी, कंज़ुल उम्माल- 8/482,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝118 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ रमज़ान में ज़िक्र करने वाले के गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_रमज़ानुल मुबारक में अल्लाह तआला का ज़िक्र करने वाला बख्शा बख्शाया है और अल्लाह तआला से माँगने वाला नामुराद नहीं रहता,"*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 8/464,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝119 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ रमज़ान में माफ़ी मांगिये, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_जब रमज़ानुल मुबारक की पहली रात होती है तो जन्नत के तमाम दरवाज़े खोल दिये जाते हैं पूरे महीने एक भी दरवाज़ा बंद नहीं रहता और दोज़ख के दरवाज़े बंद कर दिये जाते हैं तमाम माह कोई भी दरवाज़ा नहीं खुलता और सरकश शयातीन क़ैद कर दिये जाते हैं,*
*❉_ हर रात एक मुनादी सुबह तक पुकारता है, ए खैर के तलाश करने वाले मुतवज्जह हो और बशारत हासिल कर और ए बुराई के तलबगार बस कर और आंखे खोल, इसके बाद फरिश्ता कहता है, है कोई मग़फिरत चाहने वाला कि उसकी मग़फिरत की जाए, है कोई तौबा करने वाला कि हक़ तआला शान्हु उसकी तौबा कुबूल फरमा ले, है कोई दुआ करने वाला कि उसकी दुआ कुबूल की जाए, है कोई मांगने वाला कि उसका सवाल पूरा किया जाए, ''*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 8/470,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝120 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जिसने रमज़ान के बाद शव्वाल में 6 रोज़े रखे, उसके सारे गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत इब्ने उमर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_जिसने माहे रमज़ान के रोज़ रखे उसके बाद शव्वाल में 6 (निफ़्ल) रोज़े रखे वो अपने गुनाहों से निकल जाएगा, जिस तरह अपनी माँ से पैदाइश के दिन था," (यानि कोई भी गुनाह बाकी़ ना रहेगा),*
*📚 रवाह तिबरानी, कज़ाफिल तरगीब- 2/111,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝121 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_अरफ़ा के दिन रोज़ा रखो, दो साल के गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अबू क़तादह रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ से अरफ़ा यानि 9 ज़िलहिज्जा के रोज़े के बारे में पूछा गया तो आपने इरशाद फरमाया-*
*"वो (9 ज़िलहिज्जा का रोज़ा रखना) सफ़ाई कर देगा, इसे पहले साल की और बाद के साल की,"*
*"_यानि इसकी बरकत से एक साल पहले और एक साल बाद के गुनाहों की गंदगी धुल जाएगी _,*
*📚कज़ाफ़िल तरगीब- 2/111,*
*❉_ एक और रिवायत में अल्फ़ाज़ हदीस यूँ है कि:-*
*⇨नबी करीम ﷺ ने इरशाद फरमाया- मैं अल्लाह से उम्मीद करता हूं कि वो (9 ज़िलहिज्जा का रोज़ा) सफाई कर देगा इससे पहले साल की और बाद के साल की_,"*
*❉_हज़रत क़तादह बिन नोअमान रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि मैने रसूलुल्लाह ﷺ को इरशाद फ़रमाते हुए सुना कि, जिसने अरफ़ा के दिन रोज़ा रखा यानी 9 ज़िल्हिज्जा के दिन उसकी साले गुज़िश्ता और साले आइंदा के गुनाहों की मग़फिरत कर दी जाएगी,''*
*📚 रवाह इब्ने माजा कज़ाफिल तरगीब, 2/112,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝122 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ आशूरा का रोज़ा रखिये, एक साल के गुनाह माफ़_,*
*❉⇨हजरत अबू क़तादा रजियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ से आशूरा के रोज़े के बारे में पूछा गया तो आपने इरशाद फरमाया-*
*"_ये गुज़िश्ता साल के गुनाहों का कफ़्फ़ारा बन जाएगा,"*
*❉_ (मुस्लिम वगैरह और इब्ने माजा के अल्फ़ाज़े हदीस यूं है) "योमे आशूरा के रोज़े के बारे में उम्मीद करता हूँ अल्लाह तआला से कि वो सफ़ाई कर देगा गुज़िश्ता साल के गुनाहों की,"*
*📚 मुस्लिम- 1/367, इब्ने माजा- 164,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝123 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ हर माह तीन रोज़े रख लिया करो, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत मैमुना बिन्ते साद रज़ियल्लाहु अन्हा से मरवी है कि मैने अर्ज़ किया - ए अल्लाह के रसूल! निफ़्ल रोज़ो के बारे में बताइए, आप ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ जो इस्तेदाद रखता हो हर महीने तीन रोज़े रख लिया करे, क्योंकि हर दिन का रोज़ा दस (10) खताओं की बख़्शीश का ज़रिया है और ये गुनाहों से ऐसा साफ सुथरा कर देता है जेसे पानी कपड़े को,"*
*📚 रवाह तिबरानी फिल कबीर कजा़फिल तरगीब, 2/ 121,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝124 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ जिसने बुध जुमेरात और जुमा के दिन रोज़ा रखा उसके गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत इब्ने उमर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_जिसने बुध, जुमेरात और जुमा के दिन रोज़ा रखा फिर जुमा के दिन सदका़ किया ख्वाह कलील मिक़दार में या कसीर मिक़दार में तो उसके तमाम गुनाहों की मग़फिरत कर दी जाएगी हत्ताकि वो ऐसा हो जाएगा जेसा कि वो अपनी माँ से पैदाइश के दिन था," ( यानि कोई भी गुनाह बाक़ी ना रहेगा),*
*📚 रवाह तिबरानी फिल कबीर बेहकी़ तरगीब- 2/162,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝125 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ क़ज़ा ए हाजत के वक़्त क़िब्ला की तरफ़ ना मुंह कीजिए, ना पीठ, एक गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ जो शख़्स क़ज़ा ए हाजत के वक़्त ना तो क़िब्ला की तरफ़ मुंह करे और ना पीठ करे उसके लिए एक नेकी लिखी जाएगी और एक ख़ता माफ़ की जाएगी_”*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 9/363,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝126 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ अल्लाह के घर की ज़ियारत करने वाला दुनिया में आफ़ियत से रहता है और आख़िरत में उसके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अबुज़र रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ हजरत दाऊद अलैहिस्सलाम ने अर्ज़ किया, ऐ मेरे मआबूद! आपके बंदो का आप पर क्या हक़ है जब वो आपके घर आकर आपकी ज़ियारत करें? क्योंकि हर ज़ियारत करने वाले का मेज़बान पर हक़ हुआ करता है_,*
*"_अल्लाह तआला ने इरशाद फरमाया, ए दाऊद! इनका मुझ पर हक़ ये है कि दुनिया में इनको आफ़ियत और सलामती से रखूं, और जब आखिरत में मिलूं तो इनकी मग़फिरत कर दूं"*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 5/146,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝127 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_पाँच चीज़ें देखने से गुनाह माफ़ होते हैं _,*
*❉⇨ एक सहाबी रज़ियल्लाहु अन्हु रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम से नक़ल करते हैं कि आपने इरशाद फरमाया-*
*"_ पांच तरह का देखना इबादत है, (1)- कुराने पाक को देखना, (2)- काबतुल्लाह को देखना, (3)- वाल्दैन को नज़रें शफ़क़त से देखना, (4)- जमजम शरीफ को देखना, (5)- आलिम के चेहरे को देखना और ये बातें खताओं को गिराती है यानि माफ कराती है"*
*❉_ और दारे कुतनी में यूं है कि ऐसे आदमी को देखना जो मुत्तबा ए सुन्नत हो और सुन्नत की तरफ दावत देता हो और बिदअत से रोकता हो उसके चेहरे को देखना इबादत है,*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 15/880,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝128 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ अगर नामा आमाल के शुरू में और आख़िर में ख़ैर लिखी हुई हो तो दरमियान के गुनाह माफ़_,*
*❉⇨किरामन कातबीन अपना नोश्ता जब अल्लाह तआला की जनाब में पेश करते हैं और हक़ तआला शान्हु नामा अमाल के शुरू में और आखिर में मुलाहिजा़ फरमाता है कि खैर लिखी हुई है तो हक़ तआला शान्हु फरिश्तों से इरशाद फरमाता है:-*
*"_तुम गवाह रहो कि मेरे बंदे के नामा अमाल के दरमियान में जो कुछ है उसको मैंने माफ कर दिया,"*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 15/781,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝129 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ नामा आमाल के शुरू आख़िर में इस्तग़फ़ार है तो दरमियान के गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ फरमाया रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कि-*
*"_ आमाल लिखने वाले फरिश्ते जब भी किसी दिन अल्लाह तआला की बारगाह में (किसी बंदे के) नामा आमाल पेश करते हैं और अल्लाह तआला नामा आमाल के अव्वल और आखिर में इस्तग़फार देखता है तो अल्लाह तबारक व तआला फरमाता है कि मैंने अपने बंदे के तमाम गुनाह और कसूर माफ कर दिए जो इसके नामा आमाल के अव्वल व आख़िर के दरमियान लिखे हुए हैं''*
*📚 बिज़्ज़ार,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝130 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ अल्लाह का दरवाज़ा खटखटाते रहिये, आपके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ अल्लाह जल जलालहु का इरशाद है:- ''ए इब्ने आदम तीन बातें हैं एक मेरे लिए, एक तेरे लिए और एक तेरे और मेरे दरमियान मुश्तरक है, बहरहाल जो मेरे लिए है वो ये है कि तू मेरी इस तरह इबादत कर कि मेरे साथ किसी को भी शरीक ना ठहरा,*
*❉_ और जो तेरे लिए है वो ये है कि तू जो भी अमल करेगा (भला या बुरा) मैं तुझे उसका बदला दूंगा, फिर अगर मैं तुझको माफ कर दूं तो मैं गफूरूर्रहीम हूं, और वो बात जो मेरे और तेरे दरमियान मुश्तरक है वो ये है कि दुआ और सवाल की ज़िम्मेदारी तेरी और अता और कुबूलियत की ज़िम्मेदारी मुझ पर है_,”*
*📚_अखरजा तिबरानी फिल कबीर,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝131 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_सलाम कीजिए और नर्म गुफ़्तगू कीजिए गुनाह माफ _,*
*❉⇨ हज़रत हानी बिन यज़ीद रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ मग़फिरत को वाजिब करने वाले आमाल में से सलाम को फैलाना और कलाम को नर्मी और खूबी से पेश करना भी शामिल है _,*
*📚 रवाह तिबरानी, कंज़ुल उम्माल-9/116,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝132 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ जिसने रास्ते से ख़ारदार टहनी हटाई उसके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ उस शख़्स की मग़फिरत कर दी जाएगी जो लोगों के रास्ते से ख़ारदार टहनी को हटा दे और उसकी ये मग़फिरत गुज़िश्ता और आइंदा गुनाहों की होगी,"*
*📚 रवाह इब्ने हिबान कंज़ुल उम्माल- 2/420,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝133 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ अहले खाना और पड़ोसियों की हक़ तलफ़ी का कफ़्फ़ारा_,*
*❉⇨ हज़रत हुजैफ़ा रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ आदमी अगर अपने अहलो अयाल और अपने माल जान और औलाद और पड़ोस के बारे में किसी मुसीबत में मुब्तिला हो जाए तो रोज़ा, नमाज़, सदका़, अम्र बिल मारूफ और नही अनिल मुनकर इसका कफ्फारा बन जाएंगे_,"*
*📚सही बुखारी किताबुल सलात बाब सलात कफ्फारा- 1/75, मुस्लिम किताबुल ईमान सफा- 82,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝134 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_आपके गुनाह ज़्यादा हैं तो पानी पिलायें, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_जब तेरे गुनाह ज्यादा हो जाए तो बार-बार पानी पिला (अगर तू पानी के किनारे पर हो) इस अमल से तेरे गुनाह इस तरह झड़ जाएंगे, जिस तरह सख़्त हवा में दरख़्त से पत्ते झड़ जाते हैं,"*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 2/209,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝135 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ जिसने मुसलमान भाई को खुश कर दिया उसके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत हसन बिन अली रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ मग़फिरत को वाजिब करने वाले आमाल में ये भी है कि तू अपने मुसलमान भाई को खुश कर दे_,"*
*📚 रवाह तिबरानी फिल कबीर कज़ाफिल तरगी़ब- 2/394, कंज़ुल उम्माल- 2/433,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝136 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_मेहमान का एज़ाज़ व इकराम कीजिए गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत सलमान रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_जब कभी भी कोई मुसलमान अपने मुसलमान भाई से मुलाक़ात के लिए जाए और मेज़बान मेहमान का एज़ाज़ व इकराम करने की ग़रज़ से मेहमान को तकिया पेश करे तो अल्लाह तआला उस (मेज़बान) की मग़फ़िरत फ़रमा देंगे,”*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 9/155,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝137 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जिसने लोगों के दरमियान सुलह कराई उसके गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ जो लोगों के दरमियान सुलह कराएगा अल्लाह तआला उसके मामले को दुरुस्त फ़रमाएंगे और हर कलाम के बदले जो दौराने गुफ़्तगू उसने बोला एक गुलाम आज़ाद करने का सवाब अता फ़रमाएंगे और (अपने घर) इस हाल में लौटेगा कि उसके गुज़िश्ता गुनाहों की मग़फ़िरत हो चुकी होगी,”*
*📚 रवाह अस्बहानी कज़ाफ़िल तरगीब- 2/489,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝138 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जिसने मुसलमान भाई की कोई हाजत पूरी की उसके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_जो शख़्स अपने मुसलमान भाई की किसी हाजत में चले तो अल्लाह तआला हर क़दम के बदले 70 नेकियां लिखेंगे और 70 गुनाहों को मिटाएंगे यानि माफ़ फ़रमाएंगे, यहाँ तक कि वो उस मुक़ाम पर लौटकर वापस आ जाए जहाँ उसने अपने भाई को छोड़ा था,*
*❉_अब अगर उसने उसकी हाजत पूरी कर दी तो वो अपने गुनाहों से ऐसा निकलेगा जिस तरह अपनी माँ से पैदाइश के दिन थे (यानि कुछ भी गुनाह बाक़ी न रहेगा) और अगर इसी सई व कोशिश में वफ़ात पा गया तो जन्नत में बगैर हिसाब दाखिल हो जाएगा _,*
*📚 तरगीब- 3/392,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝139 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ जो बिगड़े हुए ताल्लुक़ात को हमवार करने में पहल करेगा, उसके गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत हिशाम बिन आमिर रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ किसी मुसलमान के लिए हलाल नहीं है कि दूसरे मुसलमान से तीन दिन से ज़्यादा क़तअ ताल्लुक़ रखे पस अगर वो तीन दिन से ज़्यादा क़तअ ताल्लुक़ किए रहे तो वो दोनों हक़ से तजावुज़ करने वाले हैं जब तक वो दोनों अपनी लड़ाई पर क़ायम रहें,*
*❉_ और उन दोनों में से पहले सुलह की तरफ़ रुजू करने वाले के लिए सुलह की तरफ़ सबक़त और पहल उसके गुनाह का कफ़्फ़ारा बन जाएगी और अगर वो दोनों अपनी लड़ाई को बाक़ी रखते हुए मर गए तो जन्नत में दाख़िल ना होंगे_,”*
*📚 रवाह बुखारी बाब हिजरत, मुस्लिम, 146,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝140 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ अगर कोई फरीक़ सौदा ख़त्म करना चाहता है तो ख़त्म कर दीजिए; गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*“_जो बंदा अपने किसी मुसलमान भाई के साथ इक़ाला का मामला करे (यानि उसकी बेची हुई या ख़रीदी हुई चीज़ की वापसी पर राज़ी हो जाए) तो अल्लाह तआला उसकी गलतियाँ (यानि गुनाह) बख़्श देगा_,”*
*📚 रवाह अबू दाऊद- 490, इब्ने माजा कज़ाफ़िल तरगीब- 2/566,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝142 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞__ प्यासों को पानी पिलाएं गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ इस असना में कि एक आदमी चला जा रहा था, उसे सख़्त प्यास लगी, चलते चलते उसे एक कुंआ मिला वो उसके अंदर उतरा और पानी पीकर बाहर निकल आया, कुंवे के अंदर से निकल कर उसने देखा कि एक कुत्ता है जिसकी ज़ुबान बाहर निकली हुई है और प्यास की शिद्दत से वो कीचड़ चाट रहा है, उस आदमी ने दिल में कहा कि इस कुत्ते को भी प्यास की ऐसी ही तकलीफ़ है जैसे कि मुझे थी और वो उस कुत्ते पर रहम खाकर फिर उस कुंवे में उतरा और अपने चमड़े के मोज़े में पानी भरकर उसने उसको अपने मुँह में थामा और कुंवे से निकल आया और उस कुत्ते को वो पानी पिला दिया,*
*❉_अल्लाह तआला ने उसकी रहमदिली और उस मेहनत की क़द्र फ़रमाई और इस अमल पर उसकी बख़्शीश का फ़ैसला सादिर फ़रमाया,*
*❉_ बाज़ सहाबा रज़ियल्लाहु अन्हुम ने हुज़ूर ﷺ से ये वाक़िया सुनकर दरियाफ़्त किया- या रसूलल्लाह ! क्या जानवरों की तक़लीफ़ दूर करने में भी हमारे लिए अजरो सवाब है? आपने फरमाया- “_हाँ हर ज़िंदा और तर जिगर रखने वाले जानवर (की तकलीफ़ दूर करने) में सवाब है_,”*
*📚 बुखारी, 1/318,333, मुस्लिम, 2/237,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝143 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ भूखों को खिलाए गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत जाबिर रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ भूखे मुसलमान को खाना खिलाना भी मग़फिरत को वाजिब करने वाले आमाल में से है_,”*
*📚_ कंज़ुल उम्माल- 9/243,*
*❉⇨ हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया-*
*”_ जो शख़्स अपने मुसलमान भाई की भूख की वजह से (खाने का) अहतमाम करे, और फिर उसको खाना खिलाए हत्ताकि वो सेर हो जाए और उसको पिलाए यहाँ तक कि वो सेराब हो जाए, तो उसकी मग़फिरत कर दी जाती है _,*
*📚 रवाह अबू याअला, कंजुल उम्माल- 2/424,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝144 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ दो मुसलमान मुलाक़ात के वक़्त मुसफ़ा करें और मुस्कुराएं गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अबू दाऊद अल आमा रसूलुल्लाह ﷺ से रिवायत करते हैं कि आपने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ दो मुसलमान जब आपस में मिलें और मुसाफ़ा करें और उन दोनों में से हर एक अपने साथी के चेहरे को देखकर मुस्कुराएं और यह तमाम अमल अल्लाह ही के लिए हो तो जुदा होने से पहले दोनों की मग़फिरत कर दी जाएगी_,”*
*📚 रवाह तिबरानी कज़ाफ़िल तरगीब-, 3/431,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝145 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ लोगों पर रहम कीजिए और उनकी खताओं को माफ़ कीजिए आपके गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अम्र बिन आस रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ रहम करो तुम पर भी रहम किया जाएगा, बख़्श दिया करो तुम को भी बख़्श दिया जाएगा, खराबी है उन लोगों के लिए जो क़ैफ़ की तरह (इल्म की बात सुनते हैं लेकिन ना उसको याद रखते हैं ना उस पर अमल करते हैं, ऐसे लोगों को क़ैफ़ से तशबीह दी जिसमें तेल या शरबत या अर्क़ गुज़र कर दूसरे बर्तन में चला जाता है है उसमें कुछ नहीं रहता) और खराबी है ज़िद करने वालों के लिए जो गुनाहों पर इसरार करते हैं हालांकि उनको इल्म है _,*
*📚 अखरजा अहमद व कंज़ुल उम्माल- 3/164,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝146 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ लोगों के साथ अच्छा सुलूक कीजिए, गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ खुश ख़ल्क़ी गुनाहों को ऐसे पिघला देती है जैसे सूरज बर्फ़ को पिघला देता है_,”*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 3/3,*
*❉⇨ खुश ख़ल्क़ी ख़ताओं को यूँ पिघला देती है जिस तरह पानी बर्फ़ को पिघला देता है और बद ख़ल्क़ी अमल को यूँ बिगाड़ देती है जिस तरह सिरका शहद को बिगाड़ देता है,”*
*📗 कज़ाफ़िल तरगीब- 3/409,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝147 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ आपको कोई ज़ख्म पहुंचाए तो माफ़ कर दीजिए आपके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत उबादा बिन सामित रज़ियल्लाहु अन्हु हुज़ूर पाक रसूलुल्लाह ﷺ का इरशाद नक़ल करते हैं कि आपने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ जिस आदमी के जिस्म को ज़ख्मी कर दिया जाए फिर ये ज़ख्मी जारेह को माफ़ कर दे तो बा-क़द्रे माफ़ी अल्लाह उसके गुनाहों को माफ़ फ़रमा देंगे_,”*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 12/15,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝148 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_आपको कोई तकलीफ़ पहुंचाएं तो माफ़ कर दीजिए, आपके गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अबू दर्दा रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ जिस किसी मुसलमान को अपने जिस्म में कोई तकलीफ़ किसी आदमी की तरफ़ से पहुंचे, फिर वो उसको माफ़ कर दे तो अल्लाह तआला उसका एक दर्जा बुलंद फ़रमा देगा और एक ख़ता उसकी माफ़ फ़रमा देगा_,”*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 12/15,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝149 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जिसने नाबीना आदमी को उसके घर तक पहुंचा दिया उसके 40 कबीरा गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_जो नाबीना आदमी को ले चला हत्ताकि उसके घर तक पहुंचा दिया तो उसके 40 कबीरा गुनाहों की मग़फिरत कर दी जाएगी और 4 कबाइर भी दोज़ख को वाजिब कर देते हैं_,”*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 15/792,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝150 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_एक दूसरे से ना बोलने वाले आपस में सुलह कर लें, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अबु हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि पीर और जुमेरात में अल्लाह हर मुसलमान की मग़फिरत का फ़रमा देता है सिवाए उन दो शख़्सों के जिन्होंने आपस में बोलना छोड़ रखा है, इरशाद होता है कि, इन दोनों को छोड़ दो यहाँ तक कि ये दोनों सुलह कर लें,”*
*📚 रवाह इब्ने माजा किताबुस्सियाम, 124,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝151 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _मालदार को मोहलत दीजिए और गरीब का क़र्ज़ माफ़ कीजिए, गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ क़यामत के दिन अल्लाह के पास उसके बंदों में से एक बंदे को लाया जाएगा जिसको अल्लाह तआला ने दुनिया में माल अता फ़रमाया था, इरशाद फ़रमाएगा, दुनिया में क्या अमल किया ? वो अर्ज़ करेगा-*
*”_ या अल्लाह! मैंने कोई अमल ऐसा नहीं किया (जिसको तेरी जानिब में पेश कर सकूँ) अलबत्ता इतनी बात ज़रूर है कि तूने मुझे माल अता फ़रमाया था, मैं लोगों से तिजारत किया करता था और मेरी ये ख़सलत थी कि मालदार को मोहलत दे देता था और तंगदस्त को माफ़ कर दिया करता था,”*
*❉_ हक़ तआला शान्हु इरशाद फ़रमाएगा, (ये करीमाना रवैय्या) मेरे लिए ज़्यादा सज़ावार है और मैं इसका तुझसे ज़्यादा हक़दार हूँ कि माफ़ी और दरगुज़र का माममा करूँ, अल्लाह तआला फरिश्तों से फ़रमाएगा कि, मेरे इस बंदे से दरगुजर करो_,”*
*📚 कज़ाफ़िल तरगीब, 2/43, हाकिम -2/29,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝152 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ तलबे माश में जो थका उसके गुनाह माफ _,*
*❉⇨ हज़रत आएशा रज़ियल्लाहु अन्हा से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ जिस शख़्स ने शाम की इस हालत में कि अपने हाथ से काम करने की वजह से थका हुआ था तो उसने शाम की इस हालत में कि उसकी मग़फ़िरत हो चुकी_,”*
*📚 कज़ाफ़िल तरगीब- 2/524, कंज़ुल उम्माल- 7/4,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝153 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ रंजो ग़म और मआशी तफक्कुरात से भी गुनाह माफ़ होते हैं_,*
*❉⇨हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा से मरवी है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ जब बंदे के गुनाह बहुत हो जाएं और उसका कोई अमल ऐसा नहीं होता जो उन गुनाहों का कफ़्फ़ारा बन सके तो अल्लाह तआला उसको गम में मुब्तिला कर देते हैं ताकि अल्लाह तआला उस ग़म की वजह से उसके गुनाहों को माफ़ फ़रमा दें,”*
*📚 अख़रजा अहमद बा सनद हसन तरगीब- 4/287,*
*❉_हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*”_ मोमिन को जो थकन पहुंचती है और मर्ज़ पहुंचता है और फिक्र व रंज और अज़ियत और गम, हत्ताकि कांटा भी चुभता है तो अल्लाह तआला इन तमाम की वजह से उसकी खताओं को माफ़ फरमा देते हैं,”*
*📚 अखरजा अल बुखारी व मुस्लिम,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝154 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ कोई नामुनासिब बात कहे तो सब्र कीजिए, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ एक आदमी नमाज़ पढ़ रहा था जब वो सजदे में गया तो एक और आदमी आया और उसकी गर्दन को उसने (बे ख्याली में) रोंद दिया, जो सजदे में पड़ा था उसने कहा, अल्लाह कभी भी तेरी मग़फिरत नहीं करेगा, हक़ तआला ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_मेरे बंदे के बारे में क़सम खा कर वो ये कहता है कि मैं उसकी मग़फिरत नहीं करूँगा तहकी़क़ मैंने उसकी मग़फिरत कर दी,”*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 3/560,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝155 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_आज़माइश के वक्त सब्र कीजिए, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ मोमिन बंदा और मोमिन औरत की जान में उसकी औलाद और माल में आज़माइश आती है हत्ताकि वो अल्लाह तआला से जा मिलता है और उस पर कोई भी गुनाह नहीं होता,”*
*📚 जामिआ तिर्मिज़ी बाब सब्र, 2/63,*
*❉⇨ क़रीब क़रीब रहो और सीधे सीधे रहो हर नागवार बात जो मुसलमान को पहुंचे वो उसके गुनाहों का कफ्फारा है हत्ताकि कोई मुसीबत जो उसको पहुंचे और काँटा जो उसको चुभे,”*
*📚 अखरजा मुस्लिम व तिर्मिज़ी व अहमद रवाह मुस्लिम बाब सवाब, 2/319,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝156 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_तीन चीज़ों को छुपाएं, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ तीन चीज़ें नेकी के ख़ज़ानों में से हैं:-*
*1- सदक़ा को मख़फ़ी तरीक़े से अदा करना,*
*2- मुसीबत को छिपाना,*
*3- हर काबिले शिकायत बात को छिपाना,*
*❉_ अल्लाह अज़ व जल इरशाद फ़रमाते हैं -*
*”_ जब मैं अपने किसी बंदे को आज़माइश में मुब्तिला करूँ, फिर वो सब्र करे और अपनी इयादत के लिए आने वालों से शिकायत न करे, फिर मैं उसको तंदूरस्त कर दूँ तो उसके गोश्त से बढ़िया गोश्त और उसके खून से बढ़िया खून बदले में उसे अता करता हूँ, और अगर उसको छोड़ दूँ (यानी मर्ज़ ही की हालत में ज़िंदा रखा) तो इस हाल में छोड़ता हूँ कि उस पर कोई गुनाह बाक़ी ना रहे और अगर उसकी रूह क़ब्ज़ करूँ तो इस हाल में क़ब्ज़ करूँगा कि मैं अपनी रहमत में उसको ठिकाना दूँगा_,”*
*📚 अखरजा तिबरानी व हाकिम, कंज़ुल उम्माल- 15/480,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝157 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ नामूनासिब हालात पर सब्र कीजिए, गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ बला हर रोज़ पूछती है कि आज किस तरफ रुख़ करूँ? हक़ तआला इरशाद फ़रमाते हैं- “मेरे महबूब और मति फ़रमाबरदार बंदों की तरफ़, तेरी वजह से लोगों में से सबसे बेहतरीन को जांचता हूँ और उनके सब्र का इम्तिहान लेता हूँ और उनके गुनाहों को ज़ायल करता हूँ और तेरी ही वजह से उनके दरजात बुलंद करता हूँ_,”*
*❉_ फ़राखी (खुशहाली) भी रोज़ अल्लाह तआला से पूछती है कि आज किस तरफ रुख़ करूँ? इरशाद होता है, "मेरे दुश्मनों और मेरे नाफरमानों की तरफ, तेरे ज़रीए उनकी सरकशी बढ़ाना चाहता हूँ उनके गुनाहों में इज़ाफ़ा करना चाहता हूँ और तेरी वजह से उनकी फ़ोरी गिरफ़्त करता हूँ और तेरी वजह से उनकी ग़फलत ज़्यादा करना चाहता हूँ,"*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 3/341,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝158 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ जिसने बीमार की अयादत की उसके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अली करमुल्लाहु वजहु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_जो शख़्स शाम के वक़्त किसी मरीज़ की अयादत करे तो उसके हमराह 70 हज़ार फ़रिश्ते चलते हैं जो सुबह तक उसके लिए इस्तगफ़ार करते हैं और जो शख़्स सुबह के वक़्त किसी मरीज़ की अयादत को जाए तो उसके हमराह 70 हज़ार फ़रिश्ते चलते हैं जो शाम तक उसके लिए इस्तगफ़ार करते हैं_,”*
*📚 अख़रजा अबू दाऊद व हाकिम कज़ाफ़िल तरगीब- 4/320, अबू दाऊद बाब अयादत -2/442,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝159 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_बीमार आदमी की दुआ मक़बूल और गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत इब्ने उमर रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ बीमारों की अयादत किया करो और उनसे अपने लिए दुआ की दरख़्वास्त किया करो क्योंकि मरीज़ की दुआ मक़बूल है और उसका गुनाह माफ़ है,”*
*❉⇨ और एक रिवायत में हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि हुज़ूर पाक ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ जब तुम मरीज़ के पास जाओ तो उससे अपने लिए दुआ की दरख़्वास्त करो क्योंकि मरीज़ की दुआ फरिश्तों की दुआ की तरह है,”*
*📚 कंजुल उम्माल- 9/96,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝160 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ हालते इस्लाम में जिसका एक बाल सफ़ेद हुआ उसका एक गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत इब्ने उमर रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ हालते इस्लाम में कोई आदमी बुढ़ा नहीं होता मगर अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त इसकी वजह से उसके लिए एक नेकी लिखते हैं और उसकी एक खता माफ़ फ़रमाते हैं,”*
*❉_ इब्ने हिबान ने अल्फ़ाज़े हदीस यूं नकल किए हैं:-*
*"_ नहीं है कोई मुसलमान कि वो हालते इस्लाम में बुढ़ा हो जाए मगर अल्लाह तआला उसके लिए एक नेकी लिखते हैं और उसकी एक खता माफ़ फरमाते हैं और इस बुढ़ापे की वजह से अल्लाह तआला उसका एक दर्जा बुलंद फरमाते हैं _,*
*📚 अबू दाऊद, 29/578,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝161 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ मामूली बीमारी पर एक गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ कभी भी किसी मुसलमान की रग नहीं फड़की मगर इसकी वजह से अल्लाह तआला उसकी एक ख़ता माफ़ फ़रमा देते हैं और उसके लिए एक नेकी लिखते हैं और एक दर्जा अल्लाह तआला उसका बुलंद फ़रमाते हैं_,”*
*📚_ कंज़ुल उम्माल- 3/306,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝162 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ एक रात के बुखार से एक साल के गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत इब्ने मसऊद रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ बुखार हिस्सा है हर मोमिन का आग से यानि दोज़ख से और एक रात का बुखार एक पूरे साल के गुनाहों का कफ़्फ़ारा बन जाता है,”*
*📚 अख़रजा अल-क़सनाई,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝163 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ बुखार को बुरा भला ना कहो, इससे गुनाह माफ़ होते हैं_,*
*❉⇨ हज़रत जाबिर रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ हज़रत उम्मे साइब के वहाँ तशरीफ़ ले गए, आपने इरशाद फ़रमाया- "अरे क्या बात है कपकपा रही हो ?" वो अर्ज़ करने लगीं कि बुखार है अल्लाह इसमें बरकत ना दे_,*
*❉_ हुज़ूर ﷺ ने इरशाद फ़रमाया- “बुखार को बुरा मत कहो क्योंकि ये बनी आदम की खताओं को इस तरह दूर कर देता है जिस तरह भट्टी लोहे के मेल को दूर कर देती है,”*
*📚 सही मुस्लिम, 2/319,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝164 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ सफर में जिसकी तबीयत खराब हो गई, उसके गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी हैं कि हुज़ूर पाक ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ मुसाफ़िर आदमी जब बीमार हो जाए और अपने दाएं बाएं और आगे पीछे देखने लगे और कोई भी उसको जान पहचान का आदमी नज़र ना आए तो अल्लाह तआला उसके गुज़िश्ता गुनाहों को माफ़ फ़रमाता है_”*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 3/308,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝165 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जो एक रात या इससे ज़्यादा बीमार रहा उसके गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु हुज़ूर ﷺ का इरशाद नक़ल करते हैं कि आपने फ़रमाया-*
*”_ जो आदमी एक रात बीमार रहा, फिर उस पर सब्र किए रहा और अल्लाह तआला से राज़ी रहा तो वो अपने गुनाहों से ऐसे निकल जाएगा जैसे माँ से पैदाइश के दिन था यानि कुछ भी गुनाह बाक़ी नहीं रहेगा_,*
*📚 तिर्मिज़ी फ़िल तरगीब, 4/299,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝166 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞__ बीमारी से सारे गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ मरीज़ का दर्द से कराहना तस्बीह है और दर्द से चीखना तहलील है और साँस लेना सदका़ है बिस्तर पर लेटना इबादत है एक पहलू से दूसरे पहलू की तरफ़ करवट लेना ऐसा है जैसे कि अल्लाह की राह में दुश्मन से क़िताल कर रहा हो, अल्लाह तआला फरिश्तों से फ़रमाता है कि, “सहत की हालत में वो जो अच्छे अमल किया करता था उनको नामा आमाल में लिखो,”*
*❉_जब वो सहतयाब हो कर बिस्तर से उठ कर चलता है तो इस तरह हो जाता है गोया उसने कोई गुनाह नहीं किया जैसा कि अपनी माँ से पैदाइश के दिन था,”*
*📚 कंजुल उम्माल- 3/311,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝166 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_अयादत करने वालों के सामने बीमार आदमी अल्लाह की तारीफ़ करे, उसके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ जब बंदा बीमार पड़ जाता है तो अल्लाह तआला उसके पास दो फरिश्तों को ये कह कर भेजते हैं कि, “उसे ज़रा देखो अपनी अयादत को आने वालों से क्या कहता है? फिर अगर वो बीमार बंदा मिज़ाज पुरसी के लिए आने वालों के सामने अपनी इस हालत पर अल्लाह की तारीफ़ करता है तो फ़रिश्ते उसके इस क़ौल को अल्लाह तआला की बारगाह में पेश करते हैं, हालांकि अल्लाह तआला सबसे ज़्यादा जानने वाले हैं, फिर मलाइका से इरशाद होता है कि, ”इसको अगर मौत दे दी तो इसको जन्नत में दाखिल करूंगा और अगर शिफा दी तो पहले गोश्त से बढ़िया गोश्त और पहले खून से बढ़िया खून इसको दूंगा और इसके गुनाहों को माफ़ कर दूंगा,_ ”*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 3/15,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝167 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ बीमार आदमी ” ला इलाहा इल्ला अन्ता……” 40 मरतबा पढ़े, सारे गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत साद बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि मैंने रसूलुल्लाह ﷺ को ये इरशाद फरमाते हुए सुना- ''क्या मै तुमको अल्लाह तआला का इस्मे आज़म ना बताऊं कि जिसके ज़रिए से दुआ की जाए तो अल्लाह ताला क़ुबूल फरमाते हैं और सवाल किया जाए तो पूरा फरमाते हैं, ये वो दुआ है जिसके ज़रिये हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम ने अल्लाह तआला को तीन अँधेरियों में पुकारा था, "ला इलाहा इल्ला अन्ता सुबहानका इन्नी कुंतु मिनज़्ज़ालिमीन"*
*आपके सिवा कोई माबूद नहीं, आप तमाम ऐबों से पाक हैं, बेशक मैं ही कुसूरवार हूं, (तीन अंधेरियों से मुराद रात, समंदर और मछली के पेट के अंधेरे हैं)*
*❉⇨एक आदमी ने रसूलल्लाह ﷺ से पुछा: या रसूलल्लाह! क्या ये दुआ हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम के लिए खास है या तमाम ईमान वालो के लिए आम है? आप ﷺ ने इरशाद फरमाया- "क्या तुमने अल्लाह तआला का इरशाद नहीं सुना कि हमने यूनुस अलैहिस्सलाम को मुसिबतों से निजात दी और हम इसी तरह ईमान वालो को निजात दिया करते हैं,(सूरह अंबिया 88)"*
*❉⇨रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया- जो मुसलमान इस दुआ को अपनी बीमारी में 40 मर्तबा पढ़े अगर वो इस मर्ज़ में फ़ौत हो जाए तो उसको शहीद का सवाब दिया जाएगा और अगर इस बीमारी से उसे शिफ़ा मिल गई तो इस शिफ़ा के साथ उसके तमाम गुनाह माफ़ किए जा चुके होंगे_,"*
*📚 रवाह हाकिम, 1/506,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝168 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ अल्लाह के रास्ते में आपके सर में दर्द हुआ तो सब्र कीजिए, गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_अल्लाह तआला के रास्ते में जिस शख़्स के सर में दर्द हुआ और वो इस पर सवाब की नियत रखे तो इससे पहले के तमाम गुनाह माफ़ कर दिए जाएंगे _"*
*📚 मजमाउल ज़वाइद, 2/306,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝169 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_जिसने अरफ़ा के दिन अपने कान, अपनी निगाह और ज़बान को क़ाबू में रखा, उसके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि एक नव उमर लड़का अरफ़ा के दिन हुज़ूर पाक ﷺ का रदीफ़ था (यानि आपकी सवारी पर आपके पीछे बैठा हुआ था) पस ये नौजवान औरतों को देखने लगा, रसूलुल्लाह ﷺ ने उसको फरमाया-*
*"_ ए भतीजे! ये वो दिन है कि जिसमें अगर आदमी अपने कान अपनी निगाह और अपनी ज़बान पर का़बू रखे तो अल्लाह तआला उसकी मग़फिरत फरमा देंगे_,"*
*📚 मुसनद अहमद, 1/329,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝170 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_अराफा के दिन बड़े-बड़े गुनाह माफ होते हैं_,*
*❉⇨ हज़रत तल्हा बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ गज़वाह बदर का दिन तो मुस्तश्ना है (इसको छोड़ कर) शैतान किसी भी दिन इतना ज़लील, इतना ख्वार, इतना धुतकारा और फटकारा हुआ और इतना जला भुना नहीं देखा गया जितना वो अराफा के दिन ज़लील व ख़्वार, रूसिया और जला भुना देखा जाता है और ये सिर्फ इसलिए कि वो इस दिन अल्लाह की रहमत को (मूसलाधार) बरसते हुए और बड़े-बड़े गुनाहों को माफ़ी का फैसला होते हुए देखता है और ये उस लईन के लिए ना का़बिले बर्दाश्त है_,*
*❉_ क्यूँकि बदर के दिन शैतान ने हज़रत जिब्राईल अलैहिस्सलाम को देखा कि वो मलाइका में पेश क़दमी कर रहे हैं जो मुसलमानों की मदद को उतरे थे,"*
*📚मौता इमाम मालिक, बाब जामिया अल हज, 164, रवाह मालिक व बैहकी़ कज़ाफिल तरगीब- 2/201,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝171 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_क़ज़ा ए हाजत के वक़्त क़िब्ला की तरफ़ ना मुंह कीजिये, ना पीठ, एक गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ जो शख़्स क़ज़ा ए हाजत के वक़्त ना तो क़िब्ला की तरफ मुंह करे और ना पीठ करे उसके लिए एक नेकी लिखी जाएगी और एक ख़ता माफ़ की जाएगी, _"*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 9/363,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝172 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_पाँच चीज़ें देखने से गुनाह माफ़ होते हैं _,*
*❉⇨ एक सहाबी रज़ियल्लाहु अन्हु रसूलुल्लाह ﷺ से नक़ल करते हैं कि आपने इरशाद फरमाया-*
*"_पाँच तरह का देखना इबादत है,*
*1- क़ुरान ए पाक को देखना,*
*2- काबतुल्लाह को देखना,*
*3- वाल्दैन को नज़रे शफ़क़त से देखना,*
*4- ज़मज़म शरीफ़ को देखना,*
*5- आलिम के चेहरे को देखना,*
*"_और ये बातें खताओं को गिराती है यानि माफ़ करती है, "*
*❉_और दारे कुतनी में यूँ है कि ऐसे आदमी को देखना जो मुत्तबा ए सुन्नत हो और सुन्नत की तरफ दावत देता हो और बिदअत से रोकता हो उसके चेहरे को देखना इबादत है_,*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 15/880,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝173 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ हज कीजिए आपके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨बेशक अल्लाह तआला अपने ख़ुसूसी लुत्फ़ व करम के साथ अहले अराफ़ात की तरफ मुतवज्जह होते हैं और अपने बंदों के ज़रिए मलाइका पर फ़ख़र फ़रमा कर इरशाद फ़रमाते है, ''_ ए मेरे फ़रिश्तों! मेरे बंदों को देखो कि परागंदा बाल गुबार आलूद जिस्म लेकर दूर दराज़ की राह तय करके मेरे दरबार में पहुंचे हैं, मैं तुम को गवाह बनाता हूं और मैंने उनकी दुवाओं को क़ुबूल कर लिया और उनकी रग़बत और ख़्वाहिश का मै सिफ़ारिशी बन गया, उनके बदकारो को उनके मोहसिनीन (नेको कारों) की वजह से माफ़ कर दिया, उनके नेक लोगों ने जो कुछ मांगा वो मैने दे दिया सिवाए तावान और दंड के जो उनके दरमियान हैं,'*
*❉_ फिर जब लोग अराफात से लोटे तो सब लपक कर चले यहां तक कि मुज़दलफा में आ कर ठहरे, फिर अल्लाह तआला फरमाते हैं, ''ऐ मेरे फरिश्तों! मेरे बंदों को देखो दोबारा मुझसे दरख्वास्त करते हैं, मैं तुम को गवाह बनाता हूं कि मैंने उनकी दुवाओं को क़ुबूल कर लिया, और उनकी रग़बत व ख़्वाहिश का सिफ़ारिशी बन गया और उनके बदकारों को उनके नेको कारों की वजह से माफ़ कर दिया और उनके नेक लोगों ने जो कुछ माँगा वो मैंने उनको दे दिया, और उनके तावान और दंड जो उनके दरमियान थे उसका मै कफ़ील यानि ज़िम्मेदार बन गया_,"*
*📚कज़ाफ़िल तरगी़ब- 2/202,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝174 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जिसने अच्छी तरह हज किया, उसके सारे गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि मैने रसूलल्लाह ﷺ से सुना है आप इरशाद फरमा रहे थे-*
*"_ जिसने इस तरह हज किया कि उसमें ना तो किसी शहवानी और फहश बात का इर्तिकाब किया और ना अल्लाह तआला की कोई नाफरमानी की तो वो गुनाहों से ऐसा पाक साफ होकर वापस होगा जैसा उस दिन था जिस दिन उसकी माँ ने उसको जना था_,"*
*📚 बुखारी, 1/206, मुस्लिम, 1/436,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝175 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ हज और उमराह किया करो, फक्र दूर होगा और गुनाह माफ_,*
*❉⇨ हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ पे दर पे हज और उमराह किया करो, क्योंकि हज और उमराह दोनों फक़्र व मोहताजी और गुनाहों को इस तरह दूर कर देते हैं जिस तरह लोहार और सुनार की भट्टी लोहे और सोने चाँदी का मेल कुचेल दूर कर देती है _,*
*"_और हज ए मबरूर का सिला और सवाब तो बस जन्नत ही है,"*
*📚 तिर्मिज़ी, 1/100,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝176 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ इस्लाम हिजरत और हज से गुज़िश्ता गुनाह माफ़_,*
*❉⇨हजरत अबी शमाता महरी से रिवायत है कि हम हजरत अमरू बिन आस रजियल्लाहु अन्हु के पास उनके आखिरी वक्त़ में हाज़िर हुए, वो ज़ारो क़तार रो रहे थे, (और दीवार की तरफ अपना रुख किये हुए थे) उनके साहबजादे उन्हें समझाने लगे कि ए अब्बा जान! हुजूर ﷺ ने तो आपको बड़ी-बड़ी बशारतें दी हैं, ये सुनकर उन्होंने दीवार की तरफ से अपना रुख बदला और फरमाया-*
*"_भई सबसे अफ़ज़ल चीज़ जो हमने आख़िरत के लिए तैय्यार की है वो तोहीद और रिसालत की शहादत है, मेरी ज़िंदगी के तीन दौर गुज़रे हैं, एक दौर था जब आपसे बुग्ज़ रखने वाला मुझसे ज़्यादा कोई और शख़्स ना था और जबकि मेरी सबसे बड़ी तमन्ना ये थी कि किसी तरह आप पर मेरा का़बू चल जाए तो मैं आपको मार डालूं, ये तो मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा दौर था, अगर खुदानाख्वास्ता इस हाल में मर जाता तो यक़ीनन दोज़खी होता,*
*❉_इसके बाद जब अल्लाह ने मेरे दिल में इस्लाम की हक्का़नियत डाली तो मै आपके पास आया और मैंने कहा, लाओ हाथ बढ़ाइए, मै आपसे बैत करता हूं, आपने हाथ बढ़ा दिया, मैंने अपना हाथ पीछे खींच लिया, आपने फरमाया, ए अमरू! यह क्या? मैने अर्ज़ किया “मै कुछ शर्त लगाना चाहता हूँ, फरमाया, ”क्या शर्त लगाना चाहते हो ? मैने कहा कि मेरे सब गुनाहों की मग़फिरत हो जाये,*
*"_आपने फरमाया, ए अमरु ! क्या तुम्हें खबर नहीं है कि इस्लाम तो कुफ्र की जिंदगी के तमाम गुनाहों को मिटा देता है और हिजरत भी पहले तमाम गुनाहों को साफ कर देती है और हज भी पहले सब गुनाहों को खत्म कर देता है,"*
*📚 कज़ाफिल तरगीब- 2/313, सहीह मुस्लिम किताबुल ईमान, 1/76,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝177 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ हाजी जिसके लिए मग़फिरत की दुआ करे उसके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ हाजी की और जिसके लिए हाजी बख़्शीश की दरख़्वास्त करता है, उसकी अल्लाह तआला मग़फिरत फरमा देते हैं,"*
*❉_ और एक और रिवायत में यूं है:-"ऐ अल्लाह ! हाजी की और जिसके लिए हाजी मग़फिरत की दरख़्वास्त करे उसकी मग़फिरत फरमा दे,"*
*📚कन्ज़ुल उम्माल-5/137,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝178 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ जब हाजी अहराम बांध कर तलबिया पढ़ता है तो उसके गुनाह माफ हो जाते हैं_,*
*❉⇨ हज़रत सहल बिन साद रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ नहीं जाता कोई मुसलमान बंदा अल्लाह के रास्ते में या कोई हाजी "ला इलाहा इल्लल्लाह" पढ़ते हुए या "लब्बैक" पढ़ते हुए मगर सूरज उसके गुनाहों को ले कर डूब जाएगा और वो गुनाहों से निकल जाएगा,"*
*📚कन्ज़ुल उम्माल-5/18,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝179 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_हज या उमरा करने वाला रास्ते में मर गया तो उसके गुनाह माफ _,*
*❉⇨ हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_ जो मक्का मुकर्रमा के रास्ते में जाते या आते हुए मर गया ना उसकी अदालत में पेशी है और ना हिसाब लिया जाएगा और उसकी मग़फिरत कर दी जाएगी,"*
*📚 रवाह अल असबहानी कज़ाफिल तरगीब- 2/179,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝180 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞__जिसने मस्जिदे अक़्सा से हज या उमरा का अहराम बांधा, उसके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ उम्मुल मोमिनीन हज़रत उम्मे सलमा रज़ियल्लाहु अन्हा से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_जिसने मस्जिदे अक़्सा से मस्जिदे हराम की तरफ हज या उमरा का अहराम बांधा उसके पिछले गुनाहों की मग़फिरत कर दी जाएगी,"*
*❉_ और एक रिवायत में इतना इज़ाफ़ा है कि उसके लिए जन्नत वाजिब हो जाएगी_,"*
*📚अबू दाऊद- 1/243,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝181 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जिसने मनासिके हज पूरे किये और उसके हाथ और ज़बान से मुसलमान मेहफूज़ रहे, उसके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_जिसने मनासिके हज पूरे किये और उसकी ज़बान और हाथ से मुसलमान मेहफूज़ रहे यानि हज के बाद तो अल्लाह तआला उसके पिछले अगले गुनाहों की मग़फिरत फरमा देते हैं"*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 5/8,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝182 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जिसने बेतुल्लाह के 50 तवाफ़ किये, उसके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया-*
*"_जिसने बेतुल्लाह के पचास मर्तबा तवाफ किए वो अपने गुनाहों से ऐसा निकल जाएगा जिस तरह अपनी मां से पैदाइश के दिन था,"*
*📚 अखरजा तिर्मिज़ी, कज़ाफिल तरगीब, 2/192*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝183 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ तवाफ़ करने वाले के हर क़दम पर एक गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ जिसने अल्लाह के इस घर का 7 बार तवाफ़ किया वो ना कोई क़दम उठाता है ना रखता है मगर अल्लाह तआला उसके लिए एक नेकी लिखते हैं और एक गुनाह उससे मिटाते हैं और उसके लिए एक दर्जा बुलंद फ़रमाते हैं,*
*❉_ और रावी कहते हैं मैंने हुज़ूर ﷺ को ये फ़रमाते हुए सुना कि जिसने बेतुल्लाह का सात बार तवाफ़ किया और अहतमाम व फ़िक्र के साथ किया ( यानि सुनन व आदाब की रिआयत के साथ) तो उसका यह अमल एक गुलाम आज़ाद करने के बराबर होगा,”*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 5/53,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝184 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞_ जिसने हजरे असवद और रुक्ने यमानी का इस्तिलाम किया, उसके गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ हजरे असवद और रुक्ने यमानी का इस्तिलाम ख़ताओं को मिटा देता है”*
*❉_ इमाम तिर्मिज़ी और हाकिम के यहाँ अल्फ़ाज़े हदीस यूं है:-*
*”_ हजरे अस्वद और रुक्ने यमानी गुनाहों के कफ़्फ़ारे का ज़रिया है (बंदा तवाफ़ करते हुए जब एक क़दम रखेगा और दूसरा अकदाम उठाएगा तो अल्लाह तआला उसके हर क़दम के बदले एक गुनाह माफ़ करेगा और एक नेकी का सवाब उसके लिए लिखा जाएगा)_”*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 5/189,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝185 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ जो बैतुल्लाह में दाखिल हो गया, उसके गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ जो बैतुल्लाह शरीफ़ में दाखिल हो गया वो नेकी की ख़ान में दाखिल हो गया और गुनाह से बख्शा बख्शाया निकल आया,”*
*📚 कंज़ुल उम्माल- 12/197,*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝186 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ जिसने मका़मे इब्राहीम के पीछे दो रकात पढ़ी, उसके गुनाह माफ़_,*
*❉⇨ जिसने मका़मे इब्राहीम के पीछे दो रकात पढ़ी तो उसके अगले पिछले गुनाहों की मग़फिरत कर दी जाएगी और क़यामत के दिन ईमान वालों के साथ उसको उठाया जाएगा_,”*
*📚 कज़ा फ़ी खसाइल मगफिरतुल इब्ने हजर, 102,*
*
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*⚄ पार्ट↝187 ⚄* ▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
*☞ _ अल्लाह के घर की ज़ियारत करने वाला दुनिया में आफ़ियत से रहता है और आख़िरत में उसके गुनाह माफ़ _,*
*❉⇨ हज़रत अबूज़र रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया-*
*”_ हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम ने अर्ज़ किया, ऐ मेरे माबूद ! आपके बंदों का आप पर क्या हक़ है जब वो आपके घर आकर आपकी ज़ियारत करे ? क्योंकि हर ज़ियारत करने वाले का मेज़बान पर हक़ हुआ करता है,*
*❉_ अल्लाह तआला ने इरशाद फ़रमाया- ऐ दाऊद ! इनका मुझ पर हक़ यह है कि दुनिया में इनको आफ़ियत और सलामती से रखूं और जब आखिरत में मिलूं तो इनकी मग़फिरत कर दूं”*
*📚_ कंजुल उम्माल- 5/146,*
*∆_ अलहम्दुलिल्लाह पोस्ट मुकम्मल हुई,
▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔▔
💕 *ʀєαd,ғσʟʟσɯ αɳd ғσʀɯαʀd*💕 https://whatsapp.com/channel/0029VaoQUpv7T8bXDLdKlj30
*👆🏻 Follow वाट्स एप चैनल फाॅलो कीजिए _,*
*❥✍ Haqq Ka Daayi ❥*
http://haqqkadaayi.blogspot.com
*👆🏻हमारी अगली पिछली सभी पोस्ट के लिए साइट पर जाएं ,*
https://chat.whatsapp.com/E5mIxTIuH6ZCelS7wTwmAD
*👆🏻वाट्स एप पर सिर्फ हिंदी ग्रुप के लिए लिंक पर क्लिक कीजिए _,*
https://t.me/haqqKaDaayi
*👆🏻 टेलीग्राम पर हमसे जुड़िए_,*
https://www.facebook.com/share/1BYZV136N9/
*👆🏻 फेसबुक पेज लाइक करें _,*
▉
0 Comments